Betul News: दुर्घटना में घायल छात्र को सड़क मार्ग से भोपाल भेजने पर सवाल

महीनों से बैतूल नहीं पहुंची एयर एंबुलेंस, शासन की योजना को बैतूल में पलीता

Betul News: बैतूल। गंभीर रूप से घायल और अति गंभीर मरीजों को त्वरित एवं उन्नत उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई एयर एंबुलेंस सेवा बैतूल जिले में बीते कई महीनों से निष्क्रिय बनी हुई है। इसका सीधा असर गंभीर मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें समय की अहम घड़ी में सड़क मार्ग से भोपाल रेफर किया जा रहा है। हाल ही में भैंसदेही क्षेत्र में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद यह मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है।

भैंसदेही क्षेत्र में स्कूली वैन और तूफान वाहन की आमने-सामने की टक्कर में एक छात्र गंभीर रूप से घायल हो गया था। हादसे के बाद छात्र को बेहतर उपचार के लिए भोपाल रेफर किया गया, लेकिन एयर एंबुलेंस की सुविधा होने के बावजूद उसे सड़क मार्ग से भेजा गया। इस घटना के बाद आम नागरिकों में नाराजगी देखी गई। लोगों का कहना है कि जब शासन द्वारा एयर एंबुलेंस जैसी महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की गई है, तो गंभीर रूप से घायल छात्र को तत्काल एयरलिफ्ट कर भोपाल भेजा जाना चाहिए था।

मई 2025 में बैतूल आई थी एंबुलेंस

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कारणों के चलते छात्र को एयर एंबुलेंस से भेजना संभव नहीं था। उनका सवाल है कि जिले में जब लगातार गंभीर मरीज भोपाल रेफर हो रहे हैं, तो एयर एंबुलेंस सेवा का वास्तविक लाभ आखिर किसे मिल रहा है। जानकारी के अनुसार मई 2025 में आखिरी बार एयर एंबुलेंस बैतूल पहुंची थी। इसके बाद अब तक एक भी बार एयर एंबुलेंस जिले में उपलब्ध नहीं हो सकी है। जबकि जिला अस्पताल से प्रतिदिन मरीजों को भोपाल रेफर किया जा रहा है, जिनमें सड़क दुर्घटना के गंभीर घायल, हार्ट अटैक, न्यूरो और अन्य जटिल बीमारियों के मरीज शामिल रहते हैं।

 रोजाना 5 से 6 एंबुलेंस भोपाल के लिए रवाना

जिला अस्पताल से प्रतिदिन औसतन 5 से 6 गंभीर मरीज भोपाल रेफर किए जा रहे हैं। इसके लिए 108 एंबुलेंस सेवा के वाहन लगातार बैतूल-भोपाल मार्ग पर दौड़ते नजर आते हैं। 108 एंबुलेंस के जिला प्रभारी शुभम धोटे ने बताया कि रोजाना कई ऐसे मरीज होते हैं जिन्हें एयर एंबुलेंस के माध्यम से कम समय में भोपाल पहुंचाया जा सकता है, लेकिन किसी न किसी कारण से यह सेवा उपयोग में नहीं आ पा रही है।

 परिजनों की असहमति भी बनी बाधा

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कई मामलों में मरीज के परिजन भी एयर एंबुलेंस सेवा लेने से मना कर देते हैं। विभाग का कहना है कि एयर एंबुलेंस में केवल मरीज को ले जाया जाता है, परिजनों को साथ जाने की अनुमति नहीं होती। इसी कारण कई बार मरीज और उनके परिजन सड़क मार्ग से ही भोपाल जाना बेहतर समझते हैं। फिलहाल, जिले में एयर एंबुलेंस सेवा के नियमित संचालन को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि करोड़ों रुपये खर्च कर शुरू की गई यह सेवा जमीनी स्तर पर कब और कैसे प्रभावी रूप से संचालित होगी, ताकि गंभीर मरीजों को समय पर जीवनरक्षक सुविधा मिल सके।

इनका कहना….

भैंसदेही में हुए सड़क हादसे में घायल छात्र को मेडिकल समस्या के कारण एयर एंबुलेंस से भोपाल नहीं भेजा गया। शासन की इस सेवा का लाभ मरीजों को मिल रहा है। मैं जब से बैतूल आया हूं। पहली बार इस तरह का हादसा सामने आया है।

डॉ मनोज कुमार हुरमाड़े, सीएमएचओ बैतूल 

छात्र के दोनों पैर फैक्चर थे और सिर में भी गंभीर चोट थी। सर्जन डॉक्टरों की असहमति के कारण छात्र को एयर एंबुलेंस से नहीं भेजा। छात्र को एंबुलेंस के जरिए भोपाल भेजा और उसे बेहतर उपचार भी मिल गया है।

डॉ जगदीश घोरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बैतूल 

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button