Betul Mandi News: मंडी में प्रवेश की टाइमिंग बनी किसानों के लिए परेशानी का सबब

सुबह 10 बजे के बाद नहीं मिलता प्रवेश, कई वाहन अगले दिन का कर रहे इंतजार
Betul Mandi News: बैतूल। जिले की कृषि उपज मंडी में लागू की गई नई प्रवेश व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बनती जा रही है। मंडी प्रशासन द्वारा जारी किए गए आदेश के तहत अब किसानों को अपनी उपज लेकर मंडी में सुबह 5 बजे से 10 बजे तक ही प्रवेश दिया जा रहा है। तय समय के बाद पहुंचने वाले किसानों को मंडी गेट से ही वापस लौटा दिया जा रहा है। इस फैसले को किसान तुगलकी फरमान करार दे रहे हैं।
किसानों का कहना है कि खेती पहले से ही मौसम, लागत और बाजार के उतार-चढ़ाव से जूझ रही है, ऐसे में मंडी प्रशासन के नए-नए नियम उनकी मुश्किलें और बढ़ा रहे हैं। कई किसान दूर-दराज के गांवों से रात या तड़के निकलते हैं, लेकिन रास्ते की खराब हालत, ट्रैक्टर-ट्रॉली की धीमी गति, तकनीकी खराबी या अन्य कारणों से कई बार समय पर मंडी पहुंचना संभव नहीं हो पाता। ऐसे में 10 बजे के बाद प्रवेश न मिलने से उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

देरी की समस्या, पर सुनवाई नहीं
किसानों ने बताया कि वे जब मंडी पहुंचने में हुई देरी का कारण गेट पर मौजूद कर्मचारियों को बताते हैं, तब भी कोई सुनवाई नहीं होती। आदेशों का हवाला देकर उन्हें लौटा दिया जाता है। मजबूरी में किसान या तो अगले दिन फिर से उपज लेकर आने को विवश होते हैं या फिर खुले में खड़ी उपज के खराब होने का जोखिम उठाते हैं। कई किसानों का कहना है कि एक दिन की देरी से उन्हें किराया, मजदूरी और समय तीनों का नुकसान होता है।
बंपर आवक से बिगड़े हालात
इन दिनों मंडी में उपज की बंपर आवक हो रही है। खासकर मक्का, सोयाबीन, गेंहू और अन्य फसलों की बड़ी मात्रा मंडी पहुंच रही है। हालात यह हैं कि मंडी परिसर में किसानों को उपज रखने की पर्याप्त जगह नहीं मिल पा रही है। कई किसान घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, तो कई को अपनी बारी के इंतजार में सड़क किनारे ही ट्रॉली खड़ी करनी पड़ रही है।
किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने प्रवेश का समय सीमित तो कर दिया, लेकिन आवक के हिसाब से व्यवस्थाएं नहीं बढ़ाईं। न तो अतिरिक्त गेट खोले गए हैं और न ही अस्थायी व्यवस्था कर उपज रखने की जगह बढ़ाई गई है। इससे अव्यवस्था और तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रहा है। बड़े किसान तो किसी तरह मैनेज कर लेते हैं, लेकिन छोटे किसानों के पास न तो अतिरिक्त संसाधन होते हैं और न ही बार-बार मंडी आने की क्षमता। कई किसानों ने बताया कि उन्हें सुबह जल्दी पहुंचने के लिए रात में ही घर से निकलना पड़ रहा है, जिससे सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर असर पड़ रहा है।




