Prashasnik Kona: प्रशासनिंक कोना: जंगल विभाग के घोटाले की बू राजधानी पहुंची, किन अफसरों पर शक की सुई?? चर्चित मामले में साहब ने ऐसा क्या कहा, जिसकी चर्चा खूब??? किस प्रशिक्षु महिला अधिकारी को धरना देने वालों का मिल रहा मुफ्त ज्ञान भंडार???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में….

जंगल विभाग के घोटाले की बू दूर तक

जंगल-जंगल बात पता चली, पता चला है….. यह जुमला टीवी के एक प्रसिद्ध मोगली के धारावाहिक में बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक जाना-पहचाना जाता है। इन दिनों जंगल विभाग में ही करोड़ोंं के एक मामले में फर्जीवाड़े ने अधिकारियों तक की फजीहत बढ़ा दी है। चर्चा है कि इस मामले में पहले दस पेटी तक लेनदेन की चर्चा थी, लेकिन बाद में यह मामला पचास पेटी तक पहुंचने की पक्की खबर है। जंगल विभाग के एक पुराने अधिकारी ने कुछ माह पहले बैतूल से तबादला होने के पहले जिस तरह फर्जीवाड़े को अंजाम दिया। इसकी जांच भोपाल से हुई और जिले के एक प्रमुख अधिकारी से जांच प्रतिवेदन मांगा, लेकिन इस घोटाले की बू ने प्रमुख अधिकारी को तक भ्रष्टाचार में जकड़ लिया। चर्चा के मुताबिक सवा दो करोड़ के घोटाले में बाउचर तक जलाने के बाद जब बात आगे बढ़ी तो एफआईआर के डर से यहां पर भी मामला पुराने साहब ने सेट कर लिया। कुल मिलाकर दो प्रमुख विभागों के अधिकारियों ने सवा दो करोड़ से अधिक के घोटाले में जंगल विभाग को क्लिनचिट तो दी, लेकिन लेनदेन की चर्चा बैतूल से निकलकर राजधानी तक पहुंच गई। ऐसे अधिकारियों और जनप्रतिनिधि की रडार पर भी आ गए हैं।

साहब आप तो ऐसे न थे!

वर्दी वाले विभाग में एक प्रमुख अधिकारी के बदले स्वभाव से सभी आश्चर्य में है। कुछ माह पहले उनकी पदस्थापना जिले में हुई है। उम्मीद थी कि पुराने साहब की हर किसी को मुंह लगाने की परंपरा खत्म होगी, ऐसा हुआ भी। गंदगी काफी हद तक दूर हुई। इसके बाद विभाग में आमूलचूल परिवर्तन और परिणाम देखने को मिले, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अपराधों का ग्राफ अचानक बढ़ा तो मीडिया की सुर्खियां बटोरने लगी। साहब के अधीनस्थ बैठकों में दी गई हिदायत को इस कान से सुनकर उस कान से निकालने लगे। इसी वजह स्थिति नियंत्रण के बाहर हो गई। हाल ही में एक चर्चित मामले में नर्मदापुरम से उनके बिग बॉस को खुद मोर्चा संभालना पड़ा। चूंकि मामला मासूम बच्ची से जुड़ा था, इसलिए बड़े अफसर भी जिले में आए। चौकाने वाली बात तो तब सामने आई जब साहब से इस संबंध में अखबार नवीसों ने पूछा तो वे बोल पड़े पहले ही अखबारों में घटना छप चुकी है, लेकिन साहब का यह पैतरा काम नहीं आया। दरअसल मामला देर रात का था, इसलिए खबर कहीं छपी नहीं। तर्क दिया जा रहा है कि साहब अखबारनवीसों को गुमराह का मामले को आगे न बढ़ने और अपने विभाग की किरकिरी न होने से गलत जानकारी परोस चुके थे।

प्रशिक्षु अधिकारी को मिल रहा ज्ञान का भंडार

एक प्रशिक्षु महिला अधिकारी को इन दिनों अपार ज्ञान का भंडार देने वालों की जैसे कतार लगी है। इनमें वे लोग भी है जो पिछले दिनों प्रशिक्षु अधिकारी के विभाग के खिलाफ ही एक अधिकारी से नाराज होकर कार्यालय के सामने धरने पर बैठे थे। कप्तान भी इस कारगुजारी से खासे नाराज थे। विभाग में कुछ बदलाव के बाद प्रशिक्षु अधिकारी को एक जगह की कमान दी गई तो उन्हें यही गैंग ज्ञान देने के लिए उनके कार्यालय में कुंडली मारकर बैठे रहते हैं। पूरे विभाग में चर्चा है कि इस गैंग को लेकर कप्तान साहब को पता चला तो प्रशिक्षु अधिकारी को कार्यकाल पूरा होने के पहले दूसरे जगह रवानगी काटना पड़ सकता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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