Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: आधी रात को महिला बीएलओ को साहब ने किया फोन, पति ने की बात, फिर क्या हुआ?? थाने में नितिन की एंट्री से किस साहब की बांछे खिली??? किस अफसर के 10 पेटी की गूंज जंगल से लेकर दफ्तरों तक दे रही सुनाई???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

आधी रात का को महिला बीएलओ को साहब का कॉल

एसआईआर की भागदौड़ के बीच, हमारे अनुविभागीय साहब को अचानक रात 2 बजे सेवा भाव जाग उठा। सीधा फोन महिला बीएलओ को!अब इतनी रात को साहब का फोन किस एंगल से ‘ऑफिशियल’ माना जाए, यह तो साहब ही बता सकते हैं। बीएलओ के होश उड़ गए… पर उससे पहले पति देवता जाग गए। फोन छीनकर बोले कि साहब, रात 2 बजे सर्वे करवाते हैं क्या?कहते हैं कि साहब तो बस एसआईआर में हुई गलती बताने वाले थे, पर पति महाशय ने गलती-सलती का पूरा लेखाजोखा साहब को सुना दिया—वह भी मोबाइल पर ही। अच्छी बात ये कि मामला घर की दीवार पार कर सरकारी दीवारों तक तो पहुंच गया, पर फाइल तक नहीं चढ़ा। अब दफ्तरों में यही चर्चा है कि साहब का सर्वे आधी रात को शुरू होता है या सुबह खत्म होता है? जो भी हो, विभाग को आधी रात की ड्यूटी भत्ता शुरू करने पर जरूर विचार करना चाहिए!

नितिन की फिर एंट्री, थाना वहीं, फिल्म नई!

बड़े थाने में नए साहब आए। वैसे साहब का इस थाने में आना उतना ही अप्रत्याशित था जितना कि गर्मी में बारिश… पर ऊपर वालों ने आदेश दिया तो पास में थाने में ही कुर्सी मिल गई। बस फिर क्या था नितिन की धमाकेदार वापसी! जिसे पिछले थानेदार ने साइडलाइन कर दिया था, वह अब नए साहब के ‘सुपर सारथी’ बन गए। बिल्कुल वैसे ही, जैसे पुराने रवि… साहब के समय। साथ में पड़ोसी थाने का शिव भी जोड़ दिया गया है टीम में। दोनों की सेटिंग सेवा इतनी बेहतरीन है कि थानाक्षेत्र में महीनों से एक भी ओपन-क्लोज वालों पर केस नहीं बना। वाह साहब, वाह! ऐसी सामाजिक सद्भावना आज तक किसी एनजीओ ने भी नहीं बना पाई। इस थाने में अब केस नहीं, केवल कनेक्शन बनते हैं। बड़े साहब को अब बस दूरबीन लेकर इस ओर देखना बाकी है।

दस पेटी का महामिलन, जंगल से दफ्तर तक गूंज!

जिले की अफसरशाही में इन दिनों ‘दस पेटी’ का किस्सा ऐसा हिट हो गया है कि लोग चाय की हर घूंट के साथ इसे दोहरा रहे हैं। जंगल विभाग में करोड़ों की हेराफेरी का मामला भोपाल तक पहुंच गया। राजधानी से पत्राचार हुआ तो विभाग में भगदड़।फिर जांच का जिम्मा सौंपा गया बड़े साहब को…और आगे सुनिए— साहब ने अपने ही खास-तटस्थ-अधीनस्थों से जांच करवाई। कई दिन बाद पता चला कि जांच तो कम, जुगाड़ ज्यादा हुई।

कहा तो यह भी जा रहा है कि फर्जी दस्तावेज इतने जलाए गए कि अगर धुआं आसमान तक न जाता तो शायद पता भी नहीं चलता। लेकिन साहब की दृष्टि वैसे ही थी जैसे बादल में चांद कभी दिखा, कभी गायब। अब सबसे चटपटा हिस्सा फुसफुसाहट है कि दस पेटी की गाड़ियां साहब के समारोह की तरफ निकल गईं, और मामला ऐसे शांत हो गया जैसे जंगल में कोई आवाज ही न हुई हो,लेकिन क्या करें… जंगल की हवा दफ्तरों की दीवारों तक पहुंच ही गई और अब पूरा स्टाफ अचरज में है कि क्लीनचिट मिली कि क्लीन-चिट दी गई?

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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