Betul Samachar: विकास नहीं विनाश का प्रतीक बना ड्रेनेज सिस्टम का सपना
Betul News: The dream of a drainage system has become a symbol of destruction, not development.

ठेकेदार ढूंढ रहा पेटी कांट्रेक्टर, 15 दिन की खुदाई के बावजूद धेले का काम नहीं
Betul Samachar: बैतूल। कोठीबाजार क्षेत्र में चल रहे बहुप्रतीक्षित ड्रेनेज प्रोजेक्ट की हालत दिन-ब-दिन नाराजगी और अव्यवस्था का नया रिकॉर्ड बना रही है। हालात यह हैं कि प्रमुख ठेकेदार खुद काम पूरा कराने के बजाय लगातार पेटी कांट्रेक्टर की तलाश में उलझा हुआ है, जबकि सड़क किनारे की गई खुदाई लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनी हुई है। करीब 15 दिन पहले से खुदाई कर छोड़ दिया गया है, लेकिन मजेदार बात यह कि अब तक ड्रेनेज का धेले भर भी काम नहीं हो पाया और ठेकेदार पेटी कांट्रेक्टर की तलाश में जुटा है। स्थानीय लोग इसे ठेकेदार और संबंधित विभागों की मनमानी कार्यप्रणाली का सबसे बड़ा उदाहरण बता रहे हैं।
एक पेटी कांट्रेक्टर, भागा दूसरे की तलाश
दरअसल कोतवाली से लल्ली चौक तक ड्रेनेज का काम का वर्क आर्डर सिंगरौली की सीएम इंफ्रा को मई में ही जारी कर दिया गया था। स्थानीय नागरिकों की मानें तो ठेकेदार द्वारा काम की जिम्मेदारी निभाने के बजाय लगातार विलंब करने की कोशिश में पूरा प्रोजेक्ट ठप पड़ गया है। बताया जा रहा है कि ड्रेनेज बनाने के लिए किसी सुर्यवंशी को पेटी पर ठेका दिया गया था, लेकिन बात नहीं बनने पर ठेका छोड़ दिया गया। अब दूसरे पेटी कांट्रेक्टर को ढूंढने और रेट पर मोलभाव करने में पूरा प्रशासनिक और तकनीकी सिस्टम मानो उलझकर रह गया है। उधर जनता सब कुछ अपने सिर पर झेल रही है मकानों और दुकानों के सामने खोदे गए बड़े बड़े गड्ढे, उखड़ी हुई पेवर ब्लॉक, टूटी पानी की लाइनें और दिन-रात हो रही परेशानी। दुकानदारों और आवागमन करने वालों के लिए किसी मुसीबतों भरे जाल से कम नहीं है। स्थानीय रहवासियों के लिए खुले गढ्ढ़े खतरा बनकर खड़े हैं।
निरीक्षण के बजाय दिशा निर्देशों पर ही चल रहा काम
जनता से जुड़े इस मामले में सबसे चिंताजनक यह कि ड्रेनेज की खुदाई तो कर दी गई, पर कोई कार्ययोजना, समय सीमा और निगरानी व्यवस्था कहीं नहीं दिख रही। नपा अधिकारी मौके पर पहुंचने के बजाय सिर्फ कागजी बैठकों और निर्देशों तक सीमित हैं। शुरूआत से ही जनता ने मांग की थी कि पहले काम की चरणबद्ध योजना और वैकल्पिक मार्ग सुनिश्चित किया जाए लेकिन जिम्मेदारों ने इन बातों पर ध्यान देना जरूरी नहीं समझा। अब न काम आगे बढ़ रहा है और ना ही अधिकारियों का कोई हस्तक्षेप नजर आ रहा है।
40 से 50 प्रतिशत नीचे गिरा व्यापारियों का व्यापार
दुकानदारों का कहना है कि 15 दिनों से खोदे गए गड्ढे जस की तस पड़े हुए हैं। इसकी वजह से व्यापार 40 से 50 प्रतिशत तक प्रभावित हो चुका है। आसपास के मकानों में पानी की सप्लाई भी बाधित हो चुकी है, और लोग अपने खर्चे पर पाइप जोड़ने को मजबूर हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब लाखों-करोड़ों का प्रोजेक्ट हाथ में है, तब ठेकेदार को पेटी कांट्रेक्टर की जरूरत क्यों पड़ रही है? और यदि स्टाफ और संसाधन नहीं थे, तो फिर प्रोजेक्ट की शुरुआत ही क्यों की गई? स्थानीय नागरिकों की मांग है कि काम को तुरंत गति दी जाए, जिम्मेदार अधिकारी मौके पर उतरकर समीक्षा करें और बिल्कुल तय समय सीमा में कार्य पूरा कराया जाए। वरना ड्रेनेज प्रोजेक्ट विकास नहीं बल्कि विनाश का प्रतीक बनकर रह जाएगा।
इनका कहना….
मामला संज्ञान में आया है। ठेकेदार को आज ही निर्देशित किया गया है कि काम स्वयं करवाएं या पेटी पर, लेकिन काम जल्द से जल्द शुरू करवाया जाए, ताकि आम नागरिकों को राहत मिल सके।
नीरज धुर्वे, एई नपा बैतूल




