Betul Samachar: मोबाईल की लाईट बच्चों की आंखों की दुश्मन

Betul News: Mobile light is the enemy of children's eyes

बढ़ने लगी आंखों की समस्या, छोटी उम्र में लग रहा चश्मा

Betul Samachar: बैतूल। डिजीटल युग में मोबाईल और अन्य स्क्रीन डिवाइस बच्चों की दिनचर्या का अहम हिस्सा बन चुके हैं। मनोरंजन से लेकर पढ़ाई तक, हर कार्य में बच्चे मोबाईल का उपयोग कर रहे हैं। लेकिन यही बदलती आदत अब उनकी आंखों की सबसे बड़ी दुश्मन बनती जा रही है। आंखों में जलन, पानी आना, धुंधलापन व सिर दर्द जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। सबसे चिंता की बात यह है कि कम उम्र में ही बच्चों को चश्मा लगाना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल बैतूल की नेत्र चिकित्सक इकाई के मुताबिक प्रतिदिन 10 से 15 बच्चे आंखों की शिकायत लेकर उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार इनमें से अधिकांश बच्चों को या तो चश्मा लगाया जा रहा है या उनके पहले से लगे चश्मे का नंबर बढ़ रहा है। लगातार स्क्रीन देखने से आंखों की क्षमता कमजोर हो रही है और मायोपिया (निकट दृष्टि दोष) का खतरा कम उम्र में ही तेजी से बढ़ रहा है।

डॉक्टरों का मानना है कि 1 फीट यानी लगभग 30 सेमी से कम दूरी पर लंबे समय तक स्क्रीन देखना आंखों के लिए सबसे अधिक हानिकारक है। छोटे बच्चे अक्सर गेम, वीडियो या कार्टून देखते समय स्क्रीन को बहुत करीब रख लेते हैं। इससे आंखों पर ज़ोर पड़ता है और आंखों की मांसपेशियां तनाव में आ जाती हैं। यही कारण है कि कुछ ही समय में उन्हें चश्मा लगाने की जरूरत पड़ जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्क्रीन की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) बच्चों की विकसित हो रही आंखों पर अधिक असर डालती है। यह लाइट आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकती है तथा लंबे समय में दृष्टि हानि का कारण भी बन सकती है। इसके अलावा मोबाइल देखने के दौरान पलकें कम झपकने के कारण आंखें सूख जाती हैं और जलन महसूस होती है।

डॉक्टरों की सलाह : बच्चों को बचाएं स्क्रीन की चमक से

डॉक्टर अभिभावकों को स्पष्ट रूप से सलाह दे रहे हैं कि बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित करें और उन्हें खुले वातावरण में अधिक समय बिताने के लिए प्रेरित करें। बाहर खेलने से आंखों की मांसपेशियों को आराम मिलता है और नैचुरल लाइट आंखों के लिए लाभदायक होती है। मोबाइल की ब्राइटनेस सही रखें और बच्चों को अंधेरे कमरे में स्क्रीन देखने से रोकें। डॉक्टरों का कहना है कि यदि बच्चे शिकायत करें कि उन्हें धुंधला दिखाई दे रहा है, सिर दर्द रहता है या आंखों में जलन है, तो इसे अनदेखा न करें और तुरंत नेत्र परीक्षण करवाएं। समय पर उपचार न होने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। डिजीटल दौर में तकनीक से बच्चों को पूरी तरह दूर करना संभव नहीं, लेकिन इसका संतुलित उपयोग ही उनकी आंखों को सुरक्षित रख सकता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे बच्चों की स्क्रीन आदतों पर नियंत्रण रखें और स्वस्थ नेत्र सुरक्षा उपाय अपनाने के लिए उन्हें जागरूक करें, तभी बच्चों की आंखों को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है।

इनका कहना…

बच्चों में मोबाईल की लत के कारण आंखों की समस्या बढ़ रही है। छोटी उम्र में बच्चों को चश्मा लगने लगा है। परिजनों को सलाह दी जा रही है कि बच्चों को मोबाईल से दूर रखे।

डॉ. विनोद बर्डें नेत्र रोग विशेषज्ञ, जिला अस्पताल बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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