Betul Samachar: बिना प्लानिंग के अस्पताल परिसर में पोल लगाने कर दिए गड्ढे
Betul News: Pits dug for poles in hospital premises without planning

ट्रांसफार्मर और पोल लगाने की तकनीक की जा रही नजरअंदाज
Betul Samachar: बैतूल। जिला अस्पताल परिसर में निर्माणाधीन क्रिटिकल केयर यूनिट (सीसीयू) के लिए बिजली आपूर्ति का काम किया जा रहा है, लेकिन कार्य के दौरान तकनीकी पहलुओं की अनदेखी स्पष्ट रूप से नजर आ रही है। बिजली पोल और ट्रांसफार्मर लगाए जाने के लिए खोदे गए गड्ढे न केवल मानकों के विपरीत हैं, बल्कि यह बिना उचित प्लानिंग के कराए गए प्रतीत होते हैं। इससे यह खतरा बन गया है कि भविष्य में इन पोलों को सरकाना या ट्रांसफार्मर को हटाना पड़ सकता है।
जानकारी के अनुसार, जिला अस्पताल के भवन के ठीक बगल में क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। यूनिट को स्थायी बिजली आपूर्ति देने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा दो पोल और एक ट्रांसफार्मर लगाए जाने का प्रावधान है। ठेकेदार द्वारा इन पोलों और ट्रांसफार्मर की नींव के लिए गड्ढे खोदे जा चुके हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्य तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं है।
गड्ढों की दिशा और दूरी ऐसी नहीं रखी गई है जिससे बिजली के तार सीधे और सुरक्षित रूप से जोड़े जा सकें। स्थानीय जानकारों का कहना है कि बिजली के पोल और ट्रांसफार्मर एक सीध में होने चाहिए ताकि तारों का खिंचाव सीधा और संतुलित रहे। लेकिन अस्पताल परिसर में जिस तरह से गड्ढे खोदे गए हैं, उससे ट्रांसफार्मर और पोल के बीच तार तिरछे होकर गुजरेंगे। इस स्थिति में न केवल तकनीकी कठिनाइयां उत्पन्न होंगी, बल्कि लंबे समय में बिजली आपूर्ति व्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। तारों का झुकाव या ढीलापन शॉर्ट सर्किट या ट्रिपिंग जैसी समस्याओं को जन्म दे सकता है।
विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि यदि विभाग समय रहते इस त्रुटि को सुधार लेता है, तो न तो लागत बढ़ेगी और न ही दोबारा श्रम करना पड़ेगा। लेकिन यदि कार्य इसी तरह जारी रहा, तो बाद में पोल हटाने या ट्रांसफार्मर शिफ्ट करने में दोहरा खर्च उठाना पड़ेगा। इस पूरे मामले में सवाल यह उठता है कि लोक निर्माण विभाग के इंजीनियर ने अब तक साइट का उचित निरीक्षण क्यों नहीं किया। या तो विभागीय अधिकारी मौके पर जाकर सत्यापन नहीं कर रहे हैं, या फिर ठेकेदार अनुभवहीन कर्मचारियों से कार्य करा रहा है। किसी भी स्थिति में यह लापरवाही भविष्य में अस्पताल की बिजली आपूर्ति के लिए परेशानी का कारण बन सकती है। यदि समय रहते तकनीकी मानकों के अनुरूप सुधार कर लिया जाए, तो न केवल अतिरिक्त खर्च बचेगा बल्कि कार्य की गुणवत्ता भी सुनिश्चित होगी।




