Betul Samachar: 50 किलोमीटर का सफर तय ना करने की मिली सजा
Betul News: Punishment for not travelling 50 kilometres

वन विभाग के दो डिवीजनों में 90 कर्मचारियों के एक दिन की वेतन रोका
Betul Samachar: बैतूल। वन वृत बैतूल के उत्तर और दक्षिण वन मंडलों में लगभग 90 कर्मचारियों के एक दिन का वेतन रोकने की कार्यवाही के बाद विभागीय कर्मचारियों में नाराजगी फैल गई है। इनमे बड़ी संख्या में वनपाल और वन रक्षक शामिल हैं। जानकारी के अनुसार, फील्ड में तैनात वन रक्षक और वनपालों को हर माह 50 किलोमीटर का भृमण करना अनिवार्य किया गया है, लेकिन कई कर्मचारियों ने यह दूरी तय नहीं की। इसे लापरवाही मानते हुए अधिकारियों ने उनके वेतन पर रोक लगा दी। कर्मचारियो के वेतन रोके जाने के बाद यूनियन के नेता भी कर्मचारी हित मे कुछ नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि, कर्मचारियो को जवाब देने का अवसर प्रदान किया गया है। संतुष्टि पूर्ण जवाब मिलने पर वेतन बहाली भी की जा सकती है।
वेतन रोके जाने के बाद कर्मचारियो में भारी आक्रोश व्याप्त है, लेकिन अनर्गल कार्यवाही के डर से कर्मचारियों की मजबूरी है कि वह खुल कर इसका विरोध नहीं कर पा रहे है।उत्तर वन मंडल अधिकारी नवीन गर्ग का कहना है कि कर्मचारियों का वेतन काटा नहीं गया है, बल्कि रोका गया है। फील्ड भृमण में लापरवाही और अनिवार्य प्रशिक्षण में हिस्सा न लेने के कारण यह कदम उठाया गया। कर्मचारियों को स्पष्टीकरण देने का अवसर भी दिया गया है। वहीं दक्षिण वन मंडल के प्रभारी लक्ष्मीकांत वासनिक ने बताया कि प्रशासनिक कार्यवाही के चलते कुछ कर्मचारियों का वेतन रोका गया है, हालांकि संख्या की सटीक जानकारी उन्हें नहीं है।
ना तकनीकी पद ना प्रशिक्षण और लिया जा रहा तकनीकी काम
दरअसल जंगलों में वन्यजीवों की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाने वाले वनकर्मियों के लिए एक मोबाइल एप जारी किया गया है, जिसके माध्यम से उनके भृमण की निगरानी की जाती है। इस एप में कर्मचारियों के कदमों की दूरी और फील्ड गतिविधियों का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होता है। लेकिन कई कर्मचारियों का कहना है कि यह कार्य तकनीकी श्रेणी का है, जबकि विभाग में तकनीकी पद स्वीकृत ही नहीं हैं। उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया, ऐसे में एप का संचालन और तकनीकी त्रुटियों की जिम्मेदारी उन पर डालना अनुचित है। कर्मचारियों का आरोप है कि विभाग तकनीकी गलती को आधार बनाकर उन्हें बलि का बकरा बना रहा है।
कर्मचारी हित मे नेतानगरी की खामोशी सवालों में
वेतन रोकने की इस कार्रवाई से कर्मचारियों में असंतोष व्याप्त है। यूनियन के पदाधिकारी भी इस मुद्दे पर कोई ठोस निर्णय नहीं ले पा रहे हैं। कर्मचारियों का कहना है कि तीन-तीन महीने से होने वाली विभागीय बैठकें तक नहीं हो रही हैं, जिससे उनकी समस्याएं अनसुनी रह जाती हैं। यदि यूनियन समय पर हस्तक्षेप करे तो अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच बेहतर समन्वय बन सकता है। कुल मिलाकर, 50 किलोमीटर का सफर पूरा न करने और तकनीकी त्रुटियों की वजह से वेतन रोके जाने का मामला अब यूनियन नेताओं की परीक्षा बन गया है। देखना यह होगा कि वे अपने साथियों के हक में किस तरह न्याय दिलाने की दिशा में कदम उठाते हैं।
इनका कहना……
कर्मचारियों का वेतन वन मण्डल स्तर पर रोका गया होगा, इसकी पूरी जानकारी मुझे नहीं है, जानकारी लेकर ही कुछ कहा जा सकेगा।
वासु कनोजिया, मुख्य वन संरक्षक वनवृत, बैतूल
प्रशिक्षण और भृमण में लापरवाही की वजह से कर्मचारियो का एक दिन का वेतन रोका गया है, कर्मचारियो को जवाब देने के लिए कहा गया है।
नवीन गर्ग, वन मण्डल अधिकारी उत्तर सामान्य वन मण्डल, बैतूल
वेतन रोकना प्रशासनिक कार्यवाही है, कितने कर्मचारियो का वेतन क्यों रोका गया इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
लक्ष्मीकांत वासनिक , प्रभारी वन मण्डल अधिकारी , दक्षिण सामान्य, बैतूल
कर्मचारियो का एक दिन का वेतन रोके जाने की जानकारी मिली है, कर्मचारी हित मे अधिकारियों से चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।
आकाश प्रधान, अध्यक्ष, वन एवं वन्य प्राणी सुरक्षा संघ




