Betul Ki Khabar: ग्रहण और समुद्र की लहरों ने रोका जुनून और जज्बात का रास्ता
Betul Ki Khabar: Eclipse and ocean waves blocked the path of passion and emotion

इंग्लिश चैनल पार करने का सपना अधूरा रहने पर रामबरन की कहानी, उन्ही की जुबानी
Betul Ki Khabar: बैतूल। इंग्लिश चैनल पार करने का रामबरन का सपना अधूरा रह गया , प्रकृति के आगे किसी की भी नहीं चलती प्रकृति के कुछ ऐसे ही घटनाक्रमों के आगे रामबरन मायूस तो हैं , लेकिन उनके जज्बे और जुनून में कमी नहीं आई है। सूर्य ग्रहण के चलते समुद्र में उठने वाली लहरों और खतरों ने उनका रास्ता रोक लिया। यदि रामबरन इंग्लिश चैनल पार कर लेते, तो भारत के इकलौते दिव्यांग तैराकों में उनका नाम शुमार हो जाता। लंदन से लौटने के बाद सांझवीर टाईम्स से खास बातचीत में उन्होंने अपने अधूरे सपने को पूरा करने का संकल्प लिया है।
अपने सपने और रोमांचक अनुभव को लेकर रामबरन बताते हैं कि, मन मे देश भक्ति, जुनून, और जज्बात लिए इंग्लिश चैनल पार करने के लिए 18 दिनों तक ठंडे-ठंडे पानी में कठोर तपस्या और परिश्रम कर हर चुनौती का सामना किया, हर कठिनाई को स्वीकार किया, लेकिन प्रकृति और मौसम के सामने किसी की नहीं चलती। जब सब तैयारियां पूरी थीं और हम पानी में उतरने ही वाले थे, तभी पायलट माइकल ने जीवन की सुरक्षा को देखते हुए स्विमिंग रोक दी। उनका कहना था कि सूर्य ग्रहण की वजह से समुद्र में भारी उथल पुथल मची हुई है। इस समय मौसम की स्थिति जानलेवा हो सकती है। अभी 8-10 दिन और रुकना पड़ेगा जब तक मौसम सही नहीं हो जाता है। चूंकि मेरे स्वदेश लौटने का टिकट 26 सितंबर के था। मौसम के भी खुलने की संभावना कम ही नजर आ रही थी। लिहाजा वापस लौटना ही एकमात्र विकल्प बचा था।
प्रकृति के सामने झुकने को मजबूर
उन्हें अफसोस है कि पहली बार प्रकृति के सामने झुकना पड़ा जिसकी वजह से सपना पूरा नहीं हो पाया, लेकिन यह अंत नहीं है—यह एक नई शुरुआत है। मैं वादा करता हूं कि हम और मेहनत करेंगे, सही समय का इंतज़ार करेंगे और इस सपने को जरूर पूरा करेंगे। क्योंकि,जीवन में जीत और हार मायने नहीं रखते, मायने रखता है कर्तव्य-पथ पर डटे रहना।
14 घण्टे में तय करना था 36 किमी का सफर
दिव्यांग तैराक रामबरन के जज्बे और जुनून को हमेशा प्रोत्साहित करने में उनके अभिन्न मित्र चेतन( मोनू) लोखंडे ने बताया कि इंग्लिश चैनल पार करने का सपना पूरा करने के लिए रामबरन ने काफी परिश्रम किया लेकिन अधूरे सपने को पुन: साकार करने के लिए कमर कस ली गई है। दरअसल इंग्लिश चैनल इंग्लैंड और फ्रांस के बीच की समुद्री सीमा है। 14 घण्टे की समय सीमा में लगभग 36 किलोमीटर तैरकर इंग्लैंड से फ्रांस पहुंचना पड़ता है।
इस दौरान पानी का तापमान भी 17 से 18 डिग्री सेल्सियस होता है, लगातार पानी मे रहने से यह तापमान झेलना भी मुश्किलों भर क्षण होता है। रामबरन के परिश्रम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 18 दिन के अभ्यास के दौरान तैय्यारी पूरी कर ली गई थी, लेकिन प्राकृतिक सूर्यग्रहण की वजह से समुद्र में काफी तेज हलचल होनी शुरू हो गई, और रामबरन का सपना अधूरा रह गया। इधर रामबरन का कहना है कि चाहे जो भी हो अपना सपना पूरा करने का उनका जुनून कभी ठंडा नहीं पड़ने दिया जाएगा। जब भी समय बनकर आएगा वे देश का नाम रोशन करने के लिए समुद्र में कूद पड़ेंगे।




