Betul Samachar: विधायक के भोपाल में व्यस्त होते ही अधिकारी बेपरवाह
Betul News: As soon as the MLA gets busy in Bhopal, the officials become careless.

कई विभागों में काम बेतरतीब हुआ, आम लोगों की परेशानी भी बढ़ी
Betul Samachar: बैतूल। स्थानीय विधायक हेमंत खंडेलवाल प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बनते ही उनकी व्यवस्तता काफी बढ़ गई है। हालांकि वे समय मिलते ही सप्ताह में एक या दो दिन बैतूल आकर लोगों से मिलने और अधिकारियों से संवाद करते आ रहे हैं, इसके बावजूद पहले जैसा समय न देने के कारण कई विभाग के अधिकारी बेपरवाह हो गए हैं। इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे हालातों के बीच कई काम भी बुरी तरह से प्रभावित होने की शिकायतें मिलने लगी है।
जिला मुख्यालय का विधायक होने के कारण हेमंत खंडेलवाल का कई मामलों में अधिकारियों पर नियंत्रण था। वे सिर्फ बैतूल के न होकर अन्य विधानसभाओं के मामलों में भी सीधे हस्तक्षेप कर अन्य चार विधायकों के कामों को भी प्राथमिकता देते आए हैं। इसी वजह अधिकारी हेमंत खंडेलवाल की बातों को गंभीरता से तवज्जों देते हैं, लेकिन पौने तीन माह पहले उन्हें भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष बनाया तो उनकी व्यवस्तता बहुत अधिक बढ़ गई है।
चूंकि उनके पास पूरा प्रदेश के संगठन का जिम्मा है, इसलिए पूर्व की तरह बैतूल में समय नहीं दे पा रहे हैं। उनका शुक्रवार और शनिवार का कार्यक्रम बैतूल के लिए तय रहता है। इसमें भी कई मर्तबा प्रदेश स्तर पर होने वाले कार्यक्रम के कारण बैतूल नहीं पहुंच पाते। फिर समय मिलते ही अगले कार्य दिवस पर बैतूल आकर स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होकर अधिकारियों और आम लोगों से भी चर्चा करने से नहीं चुकते हैं।
समझाइश दी तो तबादले की बात सामान्य
इधर सरकारी विभागों में जिस तरह के हालात निर्मित हो रहे हैं। उससे आम लोगों की फजीहत बढ़ गई है। दरअसल जनता से सीधे जुड़े विभागों में स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई। इसमें पहला नाम जिला मुख्यालय की नपा का है। यहां पर सीएमओ का अपने अधीनस्थों पर नियंत्रण नहीं है। कलेक्टर अतिक्रमण को लेकर अपना एजेंडा बता चुके हैं, लेकिन सीएमओ अपने अधीनस्थ राजस्व निरीक्षक से नियत तिथि तक अतिक्रमण नहीं हटवा पाए। नतीजा यह हुआ कि उन्हें कलेक्टर ने सीधे निर्वाचन कार्यालय में लूपलाइन में भेज दिया और खुद सीएमओ लंबे अवकाश पर चले गए। नपा में हालात यह है कि प्रभारी के भरोसे काम चल रहा है।
उधर राजस्व से जुड़े विभागों में भी स्थिति ठीक नहीं है। सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं के अलावा कई आम लोग मामले की शिकायत कर चुके हैं। इनके निराकरण में संबंधित अधिकारी लेटलतीफी कर रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कुछ मामले में विधायक और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक भी पहुंच चुकी है। इसके अलावा निर्माण कार्य और पेयजल से जुड़े विभाग के अधिकारी भी बेपरवाह होकर आम लोगों की समस्याओं को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
कलेक्टर को नकेल कसने लगाना पड़ रहा फटकार
इधर लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि स्थानीय विधायक के भोपाल में व्यस्त होने के कारण कई अधिकारी मर्जी के मालिक होते जा रहे हैं। इसी वजह कलेक्टर को इन अधिकारियों पर नकेल कसने के लिए फटकार लगाना पड़ रहा है। टाइम लिमिट की बैठक में भी कई बार नजारे देखने को मिले हैं कि एक ही बात बार-बार दोहराना पड़ता है। हालात यह है कि विभागीय अधिकारी अपने एजेंडे के कामों का होमवर्क तक कर टीएल में नहीं पहुंच पा रहे हैं। इसका सीधा खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
देखने में आया है कि सीएम हेल्पलाइन से लेकर अन्य शासकीय योजनाओं की क्रियान्वयन में लेटलतीफी और फिसड्डी होने के बाद कलेक्टर को कड़ा रूख अपनाते हुए अधिकारियों को फटकार सहित वेतनवृद्धि तक रोकना पड़ रहा है। इसके बावजूद इनके रवैए में कोई बदलाव नहीं आ रहा है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर तक कुछ अधिकारियों के रवैऐ से इतने परेशान है कि जनप्रतिनिधियों तक इनकी शिकायत करना पड़ चुका है।




