Betul News: विपक्ष के 12 विधायक भी खा रहे हिचकोले, लेकिन जनता की आवाज नहीं बने
Betul News: 12 opposition MLAs are also facing difficulties, but are not becoming the voice of the people

3 संसदीय क्षेत्र के विधायकों को भी गड्ढों से कोई सरोकार नहीं, टोल नहीं चुकाने से आम लोगों की परेशानी से भी दूर
Betul News: बैतूल। राजधानी भोपाल का सफर करना है तो करीब 3 जिलों के 3 सांसदों (एक केंद्रीय मंत्री), 21 विधायकों को बैतूल से होकर जाना ही पड़ेगा। जिले के कुंडी के पास एनएचएआई ने अधूरी सड़क के बाद सड़क निर्माण कंपनी जितेंद्र सिंंह एंड कंपनी को टोल लगाने की अनुमति दे डाली है। इस बात का चहूूंओर विरोध हो रहा है, लेकिन चौकाने वाली बात यह है कि सत्ता पक्ष के मंत्री, सांसद और विधायकों के अलावा सशक्त विपक्ष की भूमिका निभाने वाले कांग्रेस के पांच विधायक भी इस मुद्दें पर खामोश है। अपने क्षेत्र से लग्जरी वाहन से निकलते समय उन्हें इस बात का एहसास नहीं होता है कि सड़क पर आए गड्ढों से कितनी फजीहत हो रही है। बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा के विपक्ष के 12 विधायक भी आम जनता को इस समस्या से मुक्ति नहीं दिला पाए। लोग टोल के साथ खस्ताहाल सड़क के पर हिचकोल खाकर सफर करने को मजबूर है।
इस समय केंद्रीय भूतल मंत्री नितिन गडकरी पूरे देश में चमचमाती सड़कों के लिए राशि देने में परहेज नहीं कर रहे हैं। कई 8-लेन, 6-लेन, 4-लेन की सौगात देते जा रहे हैं। बैतूल से भोपाल फोरलेन भी इसी सौगात में से एक था, लेकिन 7-8 वर्षों में भी यह फोरलेन पूरा नहीं हो सका है। अधूरे फोरलेन को लेकर केंद्रीय मंत्री दुर्गादास उइके समेत अन्य जनप्रतिनिधि पत्राचार भी कर चुके हैं, किंतु नतीजा सिफर निकला।
मजबूरी में लोग कुंडी के पास बनाए गए टोल पर पहले तो जेब से पैसा लगाकर राशि चुका रहे हैं। आगे बढ़ने पर उन्हें इटारसी तक हजारों गड्ढों से रूबरू होना पड़ रहा है। यह बात इतर है कि जनप्रतिनिधियों को बिना टोल चुकाए सफर करने का आनंद मिल जाता है, लेकिन गड्ढों में वे भी हिचकोले खाकर राजधानी भोपाल पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी चुप्पी इस समस्या से लोगों का ध्यान नहीं हटा सकी है।
21 में से 12 विधायक विपक्ष के, सभी मौन
इतना जरूर कहा जा सकता है कि बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा और बैतूल मिलाकर कुल 21 विधायक ऐसे हैं जो इसी मार्ग से सफर कर भोपाल तक पहुंच रहे हैं। इनमें से 12 विधायक विपक्ष की भूमिका में है। कुछ दिन पहले ही विधानसभा का मानसून सत्र खत्म हुआ है। बालाघाट के 2, सिवनी के 2 और छिंदवाड़ा जिले के 6 विधायक सशक्त विपक्ष की भूमिका में है। अधिकांश विधायक भोपाल जाने के लिए बैतूल होते हुए इटारसी से पहुंचते हैं।
जुन्नारदेव और परासिया के विधायक सारणी, बरेठा होते हुए इटारसी मार्ग से भोपाल का सफर तय करते हैं। इस बीच में कुंडी पर बने टोल से इन्हें छूट मिली है, लेकिन भौंरा के आगे इटारसी तक जिस तरह हिचकोले खाकर उनके भी वाहन निकल रहे हैं और पूरे मानसून सत्र में वे अपनी विधानसभा के प्रश्न लगाते रहे, लेकिन खस्ताहाल सड़क से गुजरने के बावजूद मानसून सत्र में एक भी प्रश्न इन्होंने नहीं लगाया। हालांकि बैतूल जिला अछूता है, यहां पांचों विधानसभा में भाजपा के विधायक है, लेकिन पड़ोसी जिले छिंदवाड़ा में 7 में से 6 विधायक कांग्रेस के पास है।
इनमें कमलनाथ, सोहन वाल्मिक, नीलेश उइके, सुनील उइके, सुदीप चौधरी, विजय रेवनाथ चौरे इसके अलावा बालाघाट में 6 में से 4 संजय उइके, अनुभा मुंजारे, मधु भगत और विक्की पटेल कांग्रेस से जीत हासिल की है। वहीं सिवनी में 4 में से 2 विधायक रंजनीश सिंह और योगेंद्र सिंह बाबा कांग्रेस के पास है। ओवरआल 21 विधायकों की बात करें तो 12-9 से विपक्ष का पड़ला भारी है। बावजूद इसके विपक्ष कभी भी सशक्त भूमिका नहीं निभा पाया है।
सुविधाओं के अभाव में बंद हुई सशक्त विपक्ष की आवाज
4 जिलों और 3 संसदीय क्षेत्र के सत्ता-विपक्ष के 3 सांसद और 21 विधायक होने के बावजूद खस्ताहाल सड़क एवं अधूरे फोरलेन के बावजूद टोल वसूली का मुद्दा रंग नहीं ला पाया है। यह बात चर्चा का केंद्र बनी है कि चार जिले के 21 में से 12 विधायक विपक्ष के होने के बावजूद सशक्त विपक्ष की भूमिका क्यों नहीं निभा पाया है? जबकि राजधानी भोपाल जाने में इन्हीं माननीयों को गड्ढों के कारण लंबा समय लग रहा है।
इसके बावजूद अपनी बोलती बंद करने पर सवाल उठ रहे हैं। केवल टोल पर मिलने वाली छूट जैसी सुविधाओं के आगे विपक्ष की आवाज न तो विधानसभा और न ही सत्ता पक्ष के सांसदों ने लोकसभा में उठाई। नतीजा यह हुआ कि कुंडी टोल पर लोग प्रदर्शन करने खुद आगे आए। उन्हें सशक्त भूमिका की अभी भी तलाश है जो टोल मुक्ति के अलावा खस्ताहाल फोरलेन के गड्ढों से मुक्ति दिला सके।




