Betul Samachar: पार्षद खुद ठेकेदार, नपा के खर्च से खस्ताहाल सड़कों की मरम्मत
Betul News: Councillor himself is a contractor, repairing dilapidated roads at the expense of the municipality

100 कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े और नपा मिथ्या खर्च में लूटा रही लाखों रुपए
Betul Samachar: बैतूल। नपा की माली हालत ठीक नहीं है, यह बात किसी से छिपी नहीं है। हालात यह है कि 30 हजार से अधिक वेतन वाले 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारियों को 21 अगस्त बीत जाने के बाद जुलाई माह का वेतन नहीं मिल पाया है। इसके विपरित नपा सत्तारूढ़ पार्टी के कई पार्षदों को हाथों-हाथ लेते हुए उनकी ठेकेदारी पर इस कदर मेहरबान है कि सड़क समय पर न बनने के बाद नपा से लाखों रुपए खर्च करवाकर इसकी मरम्मत करवा दी। कुछ ठेके भी निरस्त कर अपने आप को बचाने का तथाकथित पार्षदों ने प्रयास किया है। इसी वजह नपा की वित्तीय हालत खराब होते जा रही है।
शहर में 50 प्रतिशत से अधिक ठेकेदार सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े होने के अलावा पार्षद या पार्षद पति भी है। इनका मासिक खर्च इसी ठेकेदारी से चलते आ रहा है। पहले स्थिति यह थी कि इक्का- दुक्का पार्षद ही ठेकेदारी करते थे, लेकिन फायदा देख दूसरे पार्षदों ने भी इस पेशे को अपना लिया। यह बात इतर है कि सत्तारूढ़ पार्टी के अलावा विपक्षी पार्टी के पार्षद और नेता भी ठेकेदारी में लगे हैं। हालांकि इस पर कोई रोक नहीं है, लेकिन जिस तरह बैतूल नपा में हालात निर्मित हो रहे हैं। इसके बाद पार्षद और पार्टी के कई ठेकेदारनुमा नेता कटघरे में आ खड़े हुए हैं।

नपा ने नोटिस-नोटिस खेला और हो गई चूक
चौकाने वाली बात यह है कि कई पेंच का हवाला देकर पार्षदों, नेताओं ने मई माह में विधायक हेमंत खंडेलवाल द्वारा ली गई बैठक को नजर अंदाज कर 30 जून की अवधि तक काम पूरे नहीं किए। नपा ब्लैक लिस्ट करने के लिए नोटिस-नोटिस खेलती रही। केवल 1-2 ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट का नोटिस जारी कर नपा के जिम्मेदार विधायक के आदेश को भूल बैठे। यहां दूसरी चौकाने वाली बात यह है कि ठेकेदारों ने तथाकथित पद का दुरुपयोग कर समय पर काम न कर विधायक खंडेलवाल के निर्देशों की अवहेलना कर नागरिकों की भी फजीहत बढ़ा दी।
महीनों से टेंडर होने के बाद भी करीब ढाई दर्जन ठेकेदारों ने सड़क का काम शुरू नहीं किया। ठेकेदार यह अच्छी तरह से जानते थे कि नपा द्वारा दिया जा रहा नोटिस केवल औपचारिकता है। उनमें किसी भी तरह का कोईडर नहीं है। यही कारण है जितने भी ठेकेदारों को नोटिस दिया गया है उसमें से एक ने भी नोटिस का जवाब नहीं दिया। इससे नपा में ठेकेदारों के दबदबे का पता चल जाता है।
नपा की राशि से लाखों की बंदरबांट
सांझवीर टाईम्स की पड़ताल में सामने आया है कि सत्तारूढ़ पार्टी के तथाकथित पार्षदों और नेताओं के अलावा विपक्षी पार्टी से जुड़े नेताओं ने नपा को राजस्व के दबाव में ला दिया है। दरअसल तथाकथित ठेकेदारों ने समय पर काम नहीं किया और बारिश हुई तो गड्ढें आने पर लोगों की नाराजगी बढ़ने पर डस्ट और गिट्टी के लिए नपा में आवेदन देना शुरू कर दिया। कुछ ठेकेदारों ने तो सीधे डस्ट और गिट्टी डालने वाले सहयोगी ठेकेदार से सीधे अपने टेंडर वाली सड़क का काम शुरू न करने पर गिट्टी और डस्ट डलवा ली। उन्हें पता है कि भुगतान करवाने में नपा का कोई अधिकारी-कर्मचारी रोक टोक नहीं कर सकता। इसी वजह शहर में करीब आधा सैकड़ा खस्ताहाल सड़कों का टेंडर लेने वाले तथाकथित नेताओं ने लाखों रुपए का चूना नपा को लगा दिया।
अपने पर आई तो टेंडर भी करा दिए निरस्त
कुछ पार्षदनुमा नेताओं ने तो अपनी राजनीति का उपयोग करते हुए सीधे पीआईसी की पिछले दिनों हुई बैठक में वार्ड के लोगों की नाराजगी का कोप भाजन बनने से पहले ही टेंडर निरस्त करवा दिए। यह बात नेताजी अच्छे से जानते थे कि ऐसा करने से नपा को राजस्व का तगड़ा नुकसान होगा, लेकिन अपने हित के लिए टेंडर ही निरस्त करवा दिए। यह बात पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को संज्ञान में लेकर पड़ताल कराना चाहिए कि जिस नपा की माली हालत ऐसी है, जहां पर सौ कर्मचारियों को वेतन नहीं मिला है, वहां पर दबाव में पार्षद और ठेकेदारनुमा नेता टेंडर रद्द करवाकर राजनैतिक रोटी सिकवा रहे हैं। इस बारे में स्थानीय विधायक और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष उनके मोबाइल पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन व्यस्तता के कारण चर्चा नहीं हो सकी।
इनका कहना…
मुझे इस बारे में जानकारी मिली है। गिट्टी और डस्ट के बिल की बारिकी से जांच कराई जाएगी। जिन सड़कों के टेंडर पार्षदों और नेताओं ने लिए। यहां पर गिट्टी-डस्ट की जानकारी ली जा रही है। अपने फायदें के लिए जो लोग टेंडर निरस्त करवा रहे हैं, इसकी जानकारी लेकर विधायक और नपा अध्यक्ष को भी अवगत कराया जाएगा।
सतीष मटसेनिया, सीएमओ नपा बैतूल




