Betul Samachar: पहली नज़र, जो जि़ंदगी भर दिल में बस जाए!

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समर्पण अस्पताल में नवजात की पहली झलक को बनाया जा रहा यादगार अनुभव

Betul Samachar: बैतूल। किसी भी दंपत्ति के लिए उनके नवजात शिशु की पहली झलक उस क्षण का प्रतीक होती है जिसका वे लंबे समय से इंतजार करते हैं। यह सिर्फ एक क्षण नहीं होता, बल्कि एक ऐसी आत्मिक अनुभूति होती है जो जीवन भर के लिए स्मृति बन जाती है। इसी भावना को और भी खास बनाने के उद्देश्य से समर्पण मदर एंड मल्टीकेयर हॉस्पिटल ने एक अनूठी और सराहनीय पहल की है।

यहां अब अस्पताल से डिस्चार्ज होने वाले हर नवजात शिशु की ‘पहले घंटे की तस्वीरÓ माता-पिता को एक विशेष फ्रेम में सजाकर तोहफे के रूप में दी जाती है। इस पहल को नाम दिया गया है – हृद्ग2 क्चशह्म्ठ्ठ स्नद्बह्म्ह्यह्ल ॥शह्वह्म् रुशशद्म यह पहल जितनी भावनात्मक है, उतनी ही अनमोल भी।

भावना की नई परिभाषा

समर्पण अस्पताल की यह पहल उन सभी दंपत्तियों के लिए किसी सौगात से कम नहीं जो इस सुखद अनुभूति को जीवनभर अपने पास सहेजना चाहते हैं। अस्पताल प्रबंधन की यह सोच आज के दौर में दुर्लभ मानी जा सकती है, जहां प्रोफेशनलिज्म और मुनाफा कमाने की दौड़ में इंसानी जज़्बातों को अक्सर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है] लेकिन समर्पण अस्पताल इस सोच से अलग हटकर मानवीय भावनाओं को प्राथमिकता देते हुए एक मिसाल पेश कर रहा है। यहां नवजात के जन्म को सिर्फ मेडिकल प्रक्रिया नहीं माना जाता, बल्कि एक भावनात्मक अध्याय के रूप में देखा जाता है, जिसे खूबसूरत यादों में तब्दील किया जाता है।

पहल की सूत्रधार डॉ. प्रतिभा रघुवंशी

इस सराहनीय सोच के पीछे हैं जिले की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतिभा रघुवंशी, जो किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपने वर्षों के अनुभव और समर्पण से उन्होंने न जाने कितनी महिलाओं को मातृत्व का सुख प्रदान किया है। डॉ. रघुवंशी बताती हैं कि डिलीवरी के समय पति-पत्नी और पूरा परिवार तनाव, चिंता और अनजाने डर से घिरा होता है। ऐसे में जब बच्चा सुरक्षित पैदा हो जाता है, तो वह क्षण एक राहत, आभार और आनंद का संगम होता है। मैंने महसूस किया कि उस पल को सही रूप में जीने का समय किसी को नहीं मिल पाता, इसलिए सोचा कि क्यों न इस एक घंटे को कैमरे में कैद कर, उसे भावनात्मक तोहफे के रूप में दंपत्ति को भेंट किया जाए।

हर नवजात की पहली स्मृति बन रही जीवनभर की धरोहर

डिलीवरी के तुरंत बाद अस्पताल का स्टाफ माता-पिता को बधाई देता है, और फिर एक छोटा-सा $फोटो सेशन आयोजित किया जाता है। डॉ. रघुवंशी स्वयं माता-पिता और नवजात के साथ तस्वीर खिंचवाती हैं। इस तस्वीर को आकर्षक रूप से फ्रेम किया जाता है। फ्रेम में सुंदर डिज़ाइन और प्रेमपूर्वक शब्दों के साथ वह तस्वीर सौंपी जाती है, जो ना केवल एक स्मृति बनती है, बल्कि एक भावनात्मक धरोहर बनकर परिवार के दिल में बस जाती है। अब तक दर्जनों दंपत्तियों को यह उपहार मिल चुका है, और यह प्रयास लगातार जारी है।

अस्पताल की यह पहल मातृत्व को गरिमा और संवेदनशीलता से जोड़ती है, जिससे हर जन्म एक सुंदर कहानी का आरंभ बन जाता है। समर्पण अस्पताल की यह छोटी-सी लेकिन गहरी सोच आज के समाज को यह संदेश दे रही है कि भावनाओं की कोई कीमत नहीं होती, लेकिन उनका सम्मान हमेशा किया जाना चाहिए। यह पहल इस बात की मिसाल है कि एक डॉक्टर सिर्फ रोगों का इलाज ही नहीं करता, वह जीवन के सबसे सुंदर पलों को और भी खास बना सकता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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