Politics: राजनीतिक हलचल: नागपुर में पीटे नेता अब शादियों में कर रहे टुन्नी होकर कर रहे हरकतें…. किस पार्षद ने पहले पाइप लाइन पर मचाया हंगामा, अब क्यों हुए चुप??? सदस्यता अभियान में पेंच से दुखी क्यों है युवा नेता???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……
Politics: Political stir: The leaders who were beaten up in Nagpur are now doing mischief in weddings...

पीटने के बाद भी आदत में सुधार नहीं
करीब दस दिन पहले विपक्षी पार्टी के दो नेता अपने एक मित्र के साथ मौज करने के बाद नागपुर में खूब पिटे-कुटे। एक ब्लॉक प्रमुख के तो कपड़े तक फटने की खबर है, इसके बावजूद उनकी दो शराब के पैक नीचे उतरते ही हरकते खत्म होते दिखाई नहीं दे रही। पूरे शहर में जगहसाई के बाद विपक्षी पार्टी के एक ब्लाक प्रमुख, एक पार्षद वैवाहिक मौके पर भी शराब पीकर जाने की आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। उनकी इस हरकत से करीबियों के अलावा विवाह में आमंत्रित करने वाले लोग भी खासे परेशान है। हाल ही में हुई एक शादी में उनकी टुन्नी हरकत की वजह से लोग कहते देखे गए कि इन्हें शुभ अवसर पर बुलाना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना जैसा होगा। शहर में चर्चा है कि दोनों नेताओं से अब अन्य लोग भी धीरे-धीरे कन्नी काटते जा रहे हैं।
पार्षद ने पहले मचाया हल्ला, अब फीलगुड
राजनीति में जिम्मेदारों का रूख कब बदल जाए, यह कहा नहीं जा सकता है। ऐसा ही शहर में एक पार्षद की तथाकथित राजनीति खूब सुर्खियां बटोर रही है। विपक्ष के अल्पसंख्यक पार्षद पहली बार ही चुनाव जीते हैं, लेकिन उनकी मंझी हुई राजनीति से पुराने खिलाड़ी दिखाई दे रहे हैं। मामला पिछले दिनों उनके वार्ड में अमृत योजना की पाइप लाइन से जुड़ा है। पाइप लाइन बिछाने पर उन्होंने खूब हल्ला मचाया और तरह-तरह के आरोप लगाए। कुछ दिनों बाद यही पाइप लाइन की उन्होंने खूब प्रशंसा की। अंदर की खबर छनकर बाहर आई तो पता चला ठेकेदार ने पार्षद की 20 हजार की सेवा कर दी। बस इसी वजह से पार्षद के सुर बदल गए। बताते चले कि यह पार्षद नपा में सर्वाधिक आरटीआई भी लगाते हैं।
सदस्यता अभियान में यह कैस पेंच
एक प्रमुख विपक्षी पार्टी के युवा संगठन में इन दिनों सदस्यता अभियान जोर-शोर से चल रहा है। सदस्यता के अलावा उम्मीदवारी भी करना इस बार महंगा साबित हो रहा है। दरअसल एक सदस्य पचास रुपए लिए जा रहे हैं। इस चक्कर में प्रतिभावान लीडर सामने नहीं आने की चर्चा हो रही है। पार्टी के एक युवा आदिवासी नेता ने तो अपनी पीड़ा सोशल मीडिया पर जाहिर करते हुए कहा कि चुनाव लड़ना है तो किसी पूंजीपति नेता का एहसान लेकर गुलाम बनना पड़ेगा। इस नेता ने जो बात कही है, इससे वरिष्ठ नेतृत्व के भी कान खड़े हो गए हैं। सौ टके की इस बात पर यदि संगठन ने अमल नहीं किया तो वास्तव में इस युवा विंग में प्रतिभावान नेता सामने नहीं आ पाएंगे।




