Prashasnik Kona : प्रशासनिक कोना: आखिर क्या हुआ जो मंत्रीजी के सामने पानी वाले साहब पानी- पानी हुए?? अपने को ईमानदार बताने वाले इस अधिकारी पर क्यों उठने लगे सवाल??? किस निकाय को नोटिस देकर भूलने की आदत से अतिक्रमणकारियों की मौज???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……
Prashasnik Kona: Administrative corner: What happened that the water man became very upset in front of the minister?

पानी वाले साहब पानी-पानी हुए
मंत्री जी के दौरे दौरान अपने विभाग की पोल खुलता देख एक पानी वाले साहब ने नया पैतरा खेलने का प्रयास किया, लेकिन इसमें वे कामयाब नहीं हो सके। एक बैठक के बाद शाम को मंत्री जी वापस मुख्यालय आए तो पहले से परिचित पानी वाले साहब ने सामान्य सी बात में उन्हें कह दिया कि विभाग के मुखिया ने बैठक में बुलाया है। इतना कहते ही मंत्री जी का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने पानी वाले साहब को बातों से इतना पानी पिला दिया कि उनसे न उगलते बन रहा था और न निगलते। मंत्री जी को हल्के में लेना पानी वाले साहब को इतना महंग पड़ गया कि कई अधिकारियों के सामने उनकी लू उतर गई और वे चेहरा लटकाकर बैरंग लौट गए।
ईमानदारी पर उठने लगे सवाल
जिले में एक घोटाला सामने आने के बाद में विभाग के चीफ कहे जाने वाले युवा और ईमानदार साहब पर उंगली उठने लगी है। साहब अपने आप को बहुत ईमानदार और पाक-साफ बताने से नहीं चुकते थे। कुछ जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को भी बताते थे कि दो वर्ष से अधिक के कार्यकाल में एक भी आरोप उन पर नहीं लगे। साहब बोल ही रहे थे कि उतने में जिले में सबसे बड़े घोटाले में से एक मामला उन्हीं के विभाग का सामने आने के बाद भौहे तन गई। हालांकि अपने को बचाने के लिए साहब ने जिन मैडम से जांच कराई वे इतनी माहिर है कि सच को गलत और गलत को सच कर देती है और साहब भी यही चाह रहे थे। अपने को पाक-साफ बताने वाले युवा साहब इन दिनों विभाग के करोड़ों के घोटाले में खुद घिरे हुए हैं। उन पर आरोप है कि अपने जूनियर को बचाने के लिए सारे मापदंड किनारे कर दिए।
नोटिस के बाद भूलने की आदत
एक प्रमुख नगरपालिका में अवैध निर्माण को लेकर नोटिस-नोटिस का खेल खूब खेला जा रहा है। एई साहब अपने हस्ताक्षर से नोटिस जारी करवाते हैं, लेकिन उनका अमला उसका पालन ही नहीं करवाता है। दिखावे के लिए नोटिस देने के बाद वर्षों तक संबंधितों पर कार्रवाई न होने से खुद नपा अध्यक्ष, सीएमओ और पार्षद भी नाराज बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि नपा के जिम्मेदार अफसरों के लिए नियम के विरूद्ध बन रहे व्यवसायिक भवन अच्छा गणित साबित हो रहा है। इसी वजह से शिकायतों में नोटिस देने के बाद भी पता नहीं चल रहा है कि अतिरिक्त निर्माण तोड़े ही नहीं जा रहे हैं। उल्टा अवैध निर्माण करने वालों के लिए सहानुभूति दिखाने के लिए नपा में संबंधित को भाव देते हैं। बची कसर आन स्पाट जाकर सहानुभूति भी दिखाई जा रही है।




