राजनीतिक हलचल: कालोनी में सुविधा दिलाने के लिए मिलने पहुंचे लोगों को किस जनप्रतिनिधि ने चुनाव में वोट न देने की बात कह डाली?? पार्टी के लिए कुछ नहीं, लेकिन समर्थकों की नियुक्तियों के लिए कौन कर रहा लॉबिंग??? धौंस दिखाकर कहीं दबाव तो नहीं डाल रही यह महिला जनप्रतिनिधि???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

कालोनी में सुविधा के लिए यह कैसी नेतागिरी
माननीय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभालेने के बावजूद जिले के विपक्षी पार्टी के एक प्रमुख नेता हर कहीं चुनावी पैतरे को सामने ला रहे हैं। उनकी इस आदत से करीबी ही नहीं बल्कि उनके पास किसी समस्या को लेकर जाने वाले लोग भी सिर पीट रहे हैं। चर्चा है कि पिछले दिनों इन्हीं पूर्व माननीय के पास उनके द्वारा बनाई गई एक कालोनी के रहवासी काफी उम्मीद के साथ मिलने गए थे। उनकी पीड़ा थी कि सुविधा के नाम पर सब्जबाग दिखाए गए, लेकिन नागरिक सुविधाएं नहीं मिल रही है।
कहा जा रहा है कि कालोनी के संभ्रांत नागरिकों ने पूर्व माननीय से यह बात निवेदन की मुद्रा में कही, लेकिन आदत के मुताबिक उन्हें पहले अपने चुनाव को लेकर बात कही और वोट नहीं देने पर नाखुशी जाहिर कर दी। कालोनी वाले सुविधा मांगने गए थे, लेकिन उन्हें फिर चुनावी मुद्दों से दो-दो हाथ होना पड़ा। निराश होकर वापस लौटते समय कालोनी वालों को पूर्व माननीय ने इतना आश्वासन दिया कि दिखवाते हैं।
पार्टी के लिए कुछ नहीं और ब्लाक अध्यक्षों के लिए लाबिंग शुरू
जिले के विपक्षी पार्टी के माननीय हमेशा असंतुष्ट मुद्रा में रहते हैं। हार के बाद पार्टी को भी समय नहीं दे पा रहे हंैं और न ही संगठन के लिए कुछ कर पा रहे हैं और उनकी चाह है कि संगठन उनके ही कंट्रोल में रहे। इसी वजह यह असंतुष्ट शिकवा-शिकायतों को आधार बनाकर हथियार बनाने में काफी माहिर बताए जाते हैं। पिछले दिनों सत्ता पक्ष के एक बड़े नेता का राजधानी में विवाह समारोह था। ऐसे में इन असंतुष्ट धड़े को जानकारी मिली कि इस दिन उनकी पार्टी के सभी वरिष्ठ नेता राजधानी में रहेंगे तो वाहनों का जुगाड़ कर पार्टी के दिग्गजों के बंगले पर मेल मुलाकात की जानकारी सोशल मीडिया पर डाल दी गई। यहां आकर कुछ दिग्गज डिंगे हांकते दिखाई दिए कि उनकी पसंद के ब्लाक अध्यक्षों के लिए दबाव बनाने के लिए राजधानी गए थे। अब इनकी कथनी और करनी में कितना अंतर है यह तो उनसे अच्छा कोई नहीं जान सकता।
मैडम की सक्रियता या दबाव
इन दिनों राजनीति में सत्ताधारी पार्टी की एक कुछ वर्ष पहले पार्टी में आई नेता की दबंगाई खासी चर्चा में है। इन्हें पार्टी ने एक चुनाव में टिकट दिया तो लहर में जनप्रतिनिधि बनने का मौका मिल गया। इसके बाद इनका घमंड इस कदर सिर चढ़कर बोल रहा है कि पार्टी के नेता भी खासे परेशान हो गए। मैडम का तर्क है कि उनके क्षेत्र में तिनका भी उउ़े तो उनकी अनुमति के बिना नहीं उड़ना चाहिए। अधिकारियों को हर कार्यक्रमों में निमंत्रण देने का उनका फरमान किसी के गले नहीं उतर रहा है। बातों-बातों पर बिफर कर सीधे सीएम और मंत्रियों की धौंस देने से उनकी छवि को भी खासा धूमिल कर रहा है। भले ही पार्टी महिला होने के नाते मैडम को तवज्जों दे रही है, लेकिन पांच वर्ष का कार्यकाल इसी तरह अधिकारियों की शिकवे शिकायत करते निकल जाए तो क्षेत्र के
विकास के लिए मैडम क्या करेंगी?
इस बात की चर्चा न आम लोग नहीं बल्कि पार्टी के कार्यकर्ता भी दबी जुबान से कर रहे हैं। वैसे प्रोटोकाल की बात करें तो निमंत्रण देने अधिकारियों के अधिकार क्षेत्र में है, लेकिन कार्यक्रम में जाना या न जाना सत्तारूढ़ पार्टी के सुरक्षित क्षेत्र के इस नेत्री के ऊपर है, लेकिन बातों-बातों में उनके धमकाने के अंदाज से सरकारी नुमाइंदे भी परेशान होकर उनके क्षेत्र में रहना ही नहीं चाहते हैं।




