Betul News: मुलताई को पांढुर्णा जिले में शामिल करने की सुगबुगाहट से गरमाई राजनीति
Betul News: Politics heated up due to rumors of including Multai in Pandhurna district

पहले से ही मुलताई को जिला बनाने की मांग होते आई, अब परिसीमन से लोगों की नाराजगी बढ़ने की संभावना
Betul News: बैतूल। हाल ही में मप्र के जिलों और संभागों के बीच सीमा निर्धारण को लेकर राज्य शासन ने परिसीमन आयोग का गठन किया है। इसी बीच बैतूल जिले की मुलताई विधानसभा को पांढुर्णा जिले में शामिल किए जाने की चर्चा भी अचानक गर्म होने से जिले का राजनीतिक तापमान भी गर्माने लगा है। मुलताई विधानसभा में कांग्रेस के कद्दावर नेता, विधायक और मंत्री रह चुके सुखदेव पांसे ने इसकी खुली खिलाफत करनी शुरू कर दी है।
उनका कहना है कि मुलताई को किसी भी कीमत पर पांढुर्ना जिले में शामिल नहीं होने दिया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ मुलताई क्षेत्र में भाजपा की राजनीति में खासा दखल रखने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार ने पूरी साफगोई के साथ राजनीति को अलग रखकर जनता के पक्ष की बात की है। उनका साफ कहना है कि मुलताई को जिला बनाना या किसी दूसरे जिले में शामिल करना मुद्दा नहीं है। हमारा मुद्दा केवल मुलताई और क्षेत्रवासियों के विकास का है। विचारणीय प्रश्न यह है कि इससे मुलताई क्षेत्र और हमारी जनता को क्या मिलेगा, क्योंकि हमें सिर्फ जनता का हित ही देखना है। ताकि हमारा क्षेत्र आर्थिक रूप से सम्पन्न हो सके और जनता को भी इसका फायदा मिल सके।
मुलताई को आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाना पहली प्राथमिकता: राजा पंवार
सूर्यपुत्री माता ताप्ती की पवित्र नगरी मुलताई आज ताप्ती का उद्गम स्थल होने से पूरे देश मे विख्यात है, लेकिन इसके बावजूद जिस तरह से इसका विकास होना चाहिए था वैसा होता नजर नहीं आ रहा है। अब चर्चा यह चल पड़ी है कि मुलताई को पांढुर्ना जिले में शामिल करने से मुलताई का विकास संभव हो पायेगा वो भी तब क्षेत्र की जनता पिछले लंबे समय से खुद ही मुलताई को जिला बनाने की मांग समय समय पर करती आई है। जिला पंचायत अध्यक्ष राजा पवार ने बिना किसी लाग लपेट के बेबाकी से अपना पक्ष सामने रखा है। उनका साफ कहना है कि मुलताई और यहां रहने वाली जनता का हित उनके लिए सर्वोपरी है । मुलताई को पांढुर्ना जिले में शामिल किया जाना अभी केवल एक चर्चा के रूप में सामने आ रहा है।
सरकारी या शासन स्तर पर अभी कुछ भी ऑथेंटिक नहीं है। एक नजर से देखा जाए तो हम बैतूल जिले में ही ठीक है।यदि मुलताई को जिला बनाया जाता है तो हमे सारणी विधान सभा को शामिल करना पड़ेगा, क्योंकि आज की कंडीशन में मुलताई क्षेत्र में माइनिंग के कोई स्रोत ही नहीं है। चाहे वो मुलताई हो पट्टन हो या फिर बोरदेही। यदि ऐसा होता है तो सारणी क्षेत्र का मुलताई और यहां की जनता को फायदा भी मिलेगा। रही बात पांढुर्ना जिले में शामिल करने की तो जब तक हमारे क्षेत्र का विकास ना हो, माइनिंग के स्रोत ना बड़े तब तक इसके बारे सोचना कोई मतलब की बात नहीं है। हमारी सोच सिर्फ इतनी है कि मुलताई के विकास के साथ साथ यहां की जनता को रोजगार मिले और लोग आर्थिक रूप से सम्पन्न हो सकें। हमारा फोकस केवल विकास और आम जनता पर ही है और हमेशा रहेगा।
मुलताई को पांढुर्ना में शामिल करना षड़यंत्र का हिस्सा: पांसे
जैसे ही मुलताई को पांढुर्ना जिले में शामिल किए जाने की चर्चा शुरू हुई विपक्ष की राजनीति भी गर्मा गई है, लेकिन सवाल यह है कि क्या सब सम्भव हो पाएगा। क्योंकि कहीं न कहीं स्थानीय नेताओं के साथ-साथ मुलताई की जनता भी अपने क्षेत्र को जिला बनाने की पक्षधर रही है। इस मामले को लेकर मुलताई के पूर्व विधायक एवं कांग्रेस सरकार में मंत्री रह चुके सुखदेव पांसे ने भाजपा नेताओं पर सीधा आरोप लगाते हुए इसे षड़यंत्र करार दिया है।
उनका कहना है कि किसी भी कीमत पर मुलताई को पांढुर्ना जिले में शामिल होने नहीं दिया जाएगा। पूर्व में जब पांढुर्ना को जिला बनाने के लिए वहां आंदोलन किया जा रहा तो यहां के कुछ स्थानीय भाजपा नेताओं ने वहां जाकर इसका समर्थन किया था। यह मामला पूरी तरह षडयंत्र नजर आ रहा है और यदि ऐसा हुआ तो यह मुलताई की जनता के साथ धोखा ही समझा जाएगा। मुलताई पांढुर्ना में शामिल क्यों हो यहां की जनता भी चाहती है कि मुलताई को जिला बनाना चाहिए। हमने पहले भी इसका विरोध किया था और आगे भी करेंगे।
करीब होने का तर्क, जिले से छीनेगा ताप्ती के उद्गम का दर्जा!
जानकार सूत्रों ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा परिसीमन आयोग के गठन की घोषणा के बाद मुलताई को पांढुर्णा से निकट होने पर नुकसान उठाना पड़ सकता है। पहले ही मुलताई को जिला बनाने की मांग जोर-शोर से उठी है। यदि परिसीमन आयोग की चली तो बैतूल से मुलताई की दूरी 50 किमी और पांढुर्णा की दूरी 40 किमी का तर्क दिया जाकर जिले से एक प्रमुख तहसील को छीनने का प्रयास हो सकता है। यदि ऐसा हुआ तो जिले से सूर्यपुत्री मां ताप्ती का तमगा भी जिले से छीन सकता हैं। दूसरा तर्क यह भी दिया जा रहा है कि मुलताई से पांढुर्णा करीब होने के कारण विकास की दिशा में महत्वपर्ण कदम हो सकते हैं, लेकिन बैतूल जिले के साथ कुठाराघात होने से इनकार नहीं किया जा सकता। भौगोलिक दृष्टि से मुलताई की पांढुर्णा की निकटता और व्यापारिक संबंध की बात भी रखी जा रही है।
इनका कहना..
चूंकि यह मामला काफी संवेदनशील है। इस पर गहन विचार-विमर्श के बाद ही निर्णय लिया जाएगा। वैसे मुलताई क्षेत्र के लोगों के सभी हितों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लेने के प्रयास किए जाएंगे।
चंद्रशेखर देशमुख, मुलताई विधायक





