Betul News: प्रशासनिक कोना: नपा में शर्मा साहब के आने के पहले आखिर क्यों चल पड़ी चर्चा?? मां सरस्वती के बाद लक्ष्मी प्रेमी साहब से आखिर महकमे के लोग परेशान क्यों??? इन थानेदार का सटोरियो से प्रेम की क्या चर्चा????? पढ़िए विस्तार से हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…..
Betul News: Administrative corner: Why did the discussion start before Sharma Saheb's arrival in NAPA?? After Maa Saraswati, why are the people of the department troubled by Lakshmi Premi Saheb???

शर्मा साहब के आने के पहले जमकर सुगबुगाहट
एक प्रमुख निकाय में नए सीएमओ को लाने की चर्चा खूब जोर पकड़ रही है। इन चर्चाओं को सत्तारूढ़ पार्टी के कुछ पार्षदों ने खूब तूल दिया है। कहा जा रहा है कि इस बार पसंद के सीएमओ को नपा में पदस्थ किया जा रहा है। उनकी पसंद कोई शर्मा साहब बताए जा रहे हैं, लेकिन जिनकी पदस्थापना की चर्चा चल रही है, वे पहले से ही सुर्खियों में है।
चर्चा है कि शर्मा साहब जिस नपा में पदस्थ रहे हैं, वहां पर गुल खिलाकर जमकर फीलगुड किया है। उनका कमिशन मांगने की स्टाइल भी काफी अलग है, इसलिए जहां पर भी पदस्थ रहे। न तो जनप्रतिनिधियों और न अधिकारियों से उनकी पटरी बैठती है। ऐसे में यदि शर्मा साहब को प्रमुख नपा में पदस्थ कर दिया तो अभी होने वाले अच्छे भले कामों पर भी कमिशन तय हुए तो खुद उनके लिए लाबिंग करने वाले पार्षद और पार्षद पति को भी मुंह की खानी पड़ सकती है। बताते चले कि यह साहब बैतूल के ही मूल निवासी है।
साहब का सरस्वती-लक्ष्मी प्रेम मातहतों पर भारी
जिला मुख्यालय से जुड़े पड़ोसी विकासखंड में पदस्थ एक अधिकारी के सरस्वती और लक्ष्मी प्रेम से विभाग के कर्मचारी परेशान हैं। ग्राम विकास करने वाले इस विभाग के मुखिया का रसूख भी कुछ ऐसा है कि चाह कर कर्मचारी ना कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
साहब के बारे में कहानी सुनाई दे रही है कि उनको गीत-संगीत का जबरदस्त शौक है। मानो साहब के कंठ पर सरस्वती विराजमान है। कार्यालयीन समय समाप्त होने के पहले ही गीत- संगीत सुनने के लिए कार्यालय के कर्मचारी श्रोता के रूप में चिन्हित कर लिए जाते हैं। नियत समय पर साहब के निवास पर हारमोनियम और तबले की थाप पर गीत संगीत की महफिल जमती है और मजबूरी में कर्मचारी रूपी श्रोताओं को साहब के सुर और ताल पर वाहवाही करनी पड़ती है। ये तो हुआ साहब का सरस्वती प्रेम। साहब का लक्ष्मी प्रेम भी खासा दिलचस्प है।
किसी भी ग्राम विकास की फाइल साहब के टेबल पर पहुंचने के बाद तब तक नहीं उठती, जब तक इस फाइल पर 10 से 15 प्रतिशत का वजन नहीं रखा जाता। फिर भले ही फाइल क्लियर कराने के लिए सम्बन्धित कर्मचारी को दर्जनों चक्कर क्यों न लगाने पड़े। अब बेचारे कर्मचारी इसी उधेड़बुन में समय काट रहे हैं कि आखिर साहब के सरस्वती और लक्ष्मी प्रेम से उन्हें कब मुक्ति मिलेगी।
साहब की सटोरियों पर गजब की मेहरबानी
जिला मुख्यालय के सबसे प्रमुख थाने के एक थानेदार की सटोरियो पर मेहरबानी के चर्चे थाने के चौराहों से निकलकर अब गली कूचे तक सुनाई दे रहे हैं। आखिर यह किस्से सुनाई क्यों न दें, महीनों से लोगों ने इस थाना क्षेत्र में सटोरियो पर कार्रवाई की खबर न तो सुनी और न ही अखबारनवीसों ने पढ़ाई। लोगों के कान तरस गए कि थानाक्षेत्र में सामने से लेकर पीछे और आजूबाजू खुलेआम नामी सटोरी सट्टा पर्ची काट रहे हैं।
साहब की एमपी-03 सीरीज वाला शासकीय वाहन भी सटोरियो की गलियों और मुख्य मार्ग से गुजरता रहता है, लेकिन साहब की दृष्टि सटोरियों तक नहीं जा पाती है। इस बात से लोग भ्रमित है कि आखिर शहर में सट्टे का कारोबार बंद है या मिलभगत से चलाया जा रहा है।
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