Eklavya Model Residential School: कैसे चला एकलव्य में तथाकथित पीआरटी और मिडिल स्कूल के शिक्षकों का राज?
Eklavya Model Residential School: How did the so-called PRT and middle school teachers rule in Eklavya?

नेता नगरी और अधिकारियों की मिलीभगत से जम कर काटी जा रही चांदी, नए प्रभारी की चुप्पी पर भी सवाल
Eklavya Model Residential School: बैतूल। करोड़ों रुपए के बजट वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर में गिद्ध दृष्टि गड़ाए नेताओं और जिला मुख्यालय के अधिकारियों का गहरा गठजोड़ अब छन-छन कर बाहर आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि विद्यालय में लगभग 8- 10 शिक्षक जो एकलव्य शाहपुर में लगातार कार्य कर रहे हैं, इनमें से कई ऐसे भी हैं जो पिछले दो दशक से अधिक समय से इस संस्था में कार्यरत है। कुबेर के खजाने पर मिलीभगत के चलते डाका डालने वाले इनमें से ज्यादातर शिक्षकों की चल अचल संपत्ति की जांच की जाए तो लोकायुक्त विभाग को बड़ी सफलता हाथ लग सकती है, जबकि दूसरी तरफ विभागीय अधिकारियों का सिर शर्म से झुक जाएगा।
लालच और रसूख के चलते हवा में उड़ रहे नियम
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक शाहपुर आवासीय विद्यालय में पदस्थापना के गठजोड़ में अधिकारियों की गहरी मिलीभगत देखने को मिल रही है। सांझवीर टाईम्स द्वारा जब इस काले खेल की सच्चाई उजागर की और मामले में विभागीय जांच हुई तो प्राचार्य सहित लगभग 7 लोगों के खिलाफ निलंबन की ताबड़तोड़ कार्यवाही की गई। ऐसा लग रहा है मानों केवल मोहरे इस बिसात में शामिल किए गए हैं, अभी कई मछलियां इस मामले में सामने आ सकती है।
अपात्रों को मिलती रही जिला मुख्यालय से शह
सूत्रों की माने तो एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर में जिला स्तर के अधिकारियों का खासी रुचि नजर आ रही है। अधिकारियों से मिलीभगत कर लगभग आधा दर्जन से एक दर्जन रसूखदार शिक्षकों ने अपात्र होते हुए भी जनजातीय कार्य विभाग की आंख में मिर्ची डाल कर पूरी तरह अपना स्वहित साधा। वेतन पूरा और काम कम के चक्कर में करोड़ों के बजट को कैसे ठिकाने लगा दिया इसे 7 कर्मचारियों के निलंबन से समझा जा सकता है। नियम के मुताबिक सीबीएससी की गाइडलाइन के अनुसार बिना सीटीईटी उत्तीर्ण कर्मचारियों को यहां पढ़ाने की पात्रता ही नहीं है, बावजूद इसके नियमों की खुली अनदेखी की गई है।
नेताओं और अधिकारियों का गठजोड़ भी चर्चा में!
सूत्रों की माने तो दो दशक से अधिक समय से नियम विरुद्ध कई शिक्षक यहां टिके रहना कहीं ना कहीं स्थानीय नेताओं और जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों का गठजोड़ नजर आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि विद्यालय के एक वरिष्ठ व्याख्याता जिनके राज्य और जिला स्तरीय अधिकारियों से सीधा संबंध है, उन्होंने उच्च अधिकारियों और सोसायटी के कर्मचारियों पर दवाब बना कर शासन के नियम के विरुद्ध जाकर वित्तीय व्यवस्था के लिए पृथक से डीडीओ बनवाया और लगातार इसका आहरण करते रहे, जबकि इन शिक्षकों का वेतन डीडीओ बीईओ शाहपुर से होना था ।
हैरत की बात यह है कि इनमें से कई शिक्षक ऐसे भी हैं, जिन्हें बिना पात्रता के कागजों में पोस्टेड बताया गया, लेकिन वास्तविकता यह है कि शिक्षक काम कुछ और ही कर रहे थे। सूत्रों के अनुसार कागजों पर मूल पदस्थापना कहीं और बताई जा रही है और काम कहीं और किया जा रहा है। इसी वजह कई शिक्षकों का अपना हक भी छिन लिया गया है।
टीजीटी और पीजीटी की पोस्ट पर प्राथमिक और सहायक शिक्षक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार यहां कई ऐसे शिक्षक भी यहां मौजूद है, जो मॉडल स्कूल ईएमआरएस निर्माण तक बड़ी कक्षाओं में पढ़ाते रहे, जबकि इनकी अहर्ताएं इस संस्था में किसी भी पद पर कार्य करने के लिए है ही नहीं । इन शिक्षकों के इस कृत्य से एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय के साथ साथ राज्य शासन के स्कूलों का भविष्य भी अंधकार में धकेलने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार कई बार विरोध के बाद भी इन अपात्र शिक्षकों को जनजातीय कार्य विभाग यहां से हटा नहीं पाया । साथ ही दबी आवाज में पूछने पर मालूम पड़ा कि कई सोसायटी के नियुक्त शिक्षकों को डरा धमका कर रखा जाता रहा है। वर्तमान में नियुक्त कई कर्मचारियों के कार्यों में भी इनका हस्तक्षेप आज भी जारी है ।
इनका कहना..
मुझे आपके माध्यम से जानकारी मिली है। मामला गंभीर है, इसे प्राथमिकता से दिखवाया जाएगा।
नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल





