एकलव्य में फर्जीवाड़ा: वर्षों से पढ़ा रहे सीटीईटी की जगह प्राइमरी स्कूल के शिक्षक
मलाई खाने के चक्कर में हजारों बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ गहरी सांठगांठ से चल रहा खेल

बैतूल। प्रतिवर्ष करोड़ों के बजट को ठिकाने लगाने वाले एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में जनजातीय कार्य विभाग इस कदर मशगूल है कि यहां जरूरत से ज्यादा शिक्षक अपने रसूख के कारण यहां ना सिर्फ अटैच हैं, बल्कि यहां से हटना अपनी शान के खिलाफ समझ रहे हैं। नियमों के मुताबिक केंद्रीय शिक्षकों की यहां नियुक्तियां भी हो चुकी हैं। इस फर्जीवाड़े का सबसे ज्यादा असर शाहपुर और भैंसदेही एकलव्य विद्यालय में नजर आ रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाहपुर बीईओ ने जहां जानकारी देने तक से इनकार कर दिया।
दूसरी ओर भैंसदेही बीईओ ने इस गंभीर मामले में अपनी जिम्मेदारी दूसरे कर्मचारी पर टाल दी। ऐसे में ट्रायबल के उन स्कूलों में पढ़ने वाले आदिवासी बच्चों का नुकसान हो रहा है, जिनके परिजन अपने बच्चों के भविष्य को लेकर गम्भीर हैं। पूरे मामले में जनजातीय कार्य विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी संदेह गहरा रहा है कि आखिर क्या वजह है जो विद्यालय में पदस्थापना पूर्ति होने के बावजूद अटैच अन्य शिक्षकों को यहां से हटाया नहीं जा रहा है।
शाहपुर में बाहुबल का बोलोबाला, अधिकारी नतमस्तक
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार करोड़ों रुपए के खजाने और स्वहित साधने का सबसे बड़ा खेल एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर में चल रहा है। पूर्व में सांझवीर टाईम्स द्वारा वित्तीय फर्जीवाड़ा उजागर करने के बाद प्राचार्य सहित लगभग आधा दर्जन कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर चुकी है। वर्तमान मे शाहपुर एकलव्य में भारत सरकार की केंद्रीय भर्ती परीक्षा के माध्यम से 24 शिक्षक एवं कर्मचारियों की नियुक्ति की जा चुकी है। सभी शिक्षक 18 जून से 30 जून के समय काल में ज्वाइन भी हो चुके हैं, किंतु मध्यप्रदेश शासन के शिक्षक एवं कई अपात्र शिक्षक जो रेवड़ी खाने के लिए वर्षों से शाहपुर के इस विद्यालय में अंगद के पाव की तरह जमे हैं। इन्हें प्रशासन ने उन्हें अभी तक कार्य मुक्त क्यों नहीं किया।
सूत्र बताते हैं कि इनके बाहुबल के सामने विभागीय अधिकारी भी नतमस्तक है। आरोप है कि एकलव्य शाहपुर में वित्तीय वर्ष 23-24 में की गई अनियमितताओं पर हुई पूर्व की कार्यवाही में गेहूं तो सही पिसा, परंतु बचे हुए घुन अभी भी इस संस्था को खोखला करने में लगे हैं। सवाल उठाएं जा रहे हैं कि जब एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय शाहपुर मॉडल स्कूल के नाम से जाना जाता है तो इन घुन को प्रशासन नतमस्तक होकर अपात्र होने के बाबजूद क्यों ढो रहा है। सूत्रों का कहना है कि वर्तमान में भी प्रभारी प्राचार्य से गहरी सांठगांठ के चलते संस्था की कार्यविधि में इन अपात्रों का खुला हस्तक्षेप चल रहा है ।
बीईओ ने झाड़ा पल्ला, बोले मैं प्रभार में नहीं, फोन भी किया बन्द
सूत्र बताते हैं कि शाहपुर एकव्य आवासीय विद्यालय को संगठित होकर दुधारू गाय की तरह धोया जा रहा है और विभागीय अधिकारियों की चुप्पी खुद उन्हें ही कटघरे में खड़े कर रही है। हद तो तब हो गई जब इस मामले को लेकर बीईओ शाहपुर वीके नामदेव से शिक्षकों के अटैचमेंट को लेकर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने एकलव्य का प्रभार होने से इनकार कर दिया, जबकि यह बीईओ जनजातीय कार्य विभाग के ही अंतर्गत शाहपुर में पदस्थ किए गए हैं। यहे कहीं से कहीं तक संभव नहीं है कि एकलव्य में मौजूदा शिक्षकों का रिकार्ड बीईओ के पास उपलब्ध ना हो। थोड़ी ही देर बाद बीईओ का फोन भी स्विच ऑफ हो गया।
सूत्र बताते हैं कि शाहपुर एकलव्य में गहरी सांठगांठ के चलते पूरे खेल को अंजाम दिया जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यहां तीन असिस्टेंट टीचर ऐसे हैं जो कक्षा पहले से पांचवीं तक ही पढ़ाने की योग्यता रखते हैं, परंतु यही टीचर एकलव्य स्कूल में पढ़ा रहे हैं। जबकि नियम के मुताबिक एकलव्य स्कूल में पढ़ने के लिए सीटीईटी उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। इस गम्भीर मामले को लेकर जब सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग प्रमुख शिल्पा जैन से चर्चा करने का प्रयास किया गया तो अपने चिपरिचित अंदाज में उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
इनका कहना…
एकलव्य का प्रभार मेरे पास नहीं है। वहां के प्राचार्य ही आपको ज्यादा जानकारी दे सकते हैं।
व्हीके नामदेव,बीईओ शाहपुर, जनजातीय कार्य विभाग शाहपुर
केंद्रीय परीक्षा के जरिए 24 शिक्षक ज्वाइन हो चुके हैं। लगभग 17 अन्य अतिरिक्त शिक्षकों की रिपोर्ट भेजी है। जो भी आदेश आएंगे। उसी के अनुसार नई पदस्थापना स्थल पर शिक्षकों को भेजा जाएगा।
डीसी बर्डे, प्रभारी प्राचार्य एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, शाहपुर




