भारी बारिश होते ही सड़क का स्विमिंग पूल बनना तय
पानी निकासी की व्यवस्था किये बिना किया जा रहा डामरीकरण, डबल लेयर की जगह एक लेयर में डाली जा रही गिट्टी

बैतूल। पेट्रोल पंप चौराहे से थाना चौक तक 1 करोड़ 57 लाख की लागत से बनाई जा रही सड़क के निर्माण में इंजीनियरिंग जहां फेल नजर आ रही है तो वहीं पूरा काम मात्र औपचारिकता से भरा नजर आ रहा है। सड़क निर्माण कार्य मे इस बात का जरा भी ध्यान नहीं रखा जा रहा है कि बारिश के पानी की निकासी का प्रबंध किए बिना आखिर सड़क का डामरीकरण कैसे किया जा सकता है।
ठेकेदार पिछले तीन दिन से सड़क पर डामर, गिट्टी बिछाए जा रहा है। मौके पर नपा के इंजीनियर निरीक्षण भी कर रहे हैं, लेकिन बारिश में इस सड़क के क्या हाल होंगे, इस तरफ सोचने की किसी को फुर्सत नहीं है। अगर बारिश का दौर शुरू होता है तो इस सड़क का स्विमिंग पूल में तब्दील होना तय माना जा रहा है। सड़क के डामरीकरण में भी नियमों को ताक पर रखा जा रहा है। डबल लेयर की जगह सिंगल लेयर में गिट्टी डालकर रोलिंग किया जाना भी सड़क की गुणवत्ता खराब करने के लिए काफी माना जा रहा है।
स्ट्रोटर्फ से बसस्टैंड तक नहीं पानी निकासी की व्यवस्था
ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण का काम आनन फानन में निपटाया जा रहा है। लापरवाही की हद तब हो गई, जब पानी निकासी की कोई व्यवस्था तक नहीं कि गयी है। स्ट्रोटर्फ मैदान की बाउंड्रीवाल से लगकर नाली पूरी तरह गायब है। यहाँ बाउंड्रीवाल तक डामर की लेयर बिछाई जा रही है। यही स्थिति उत्कृष्ट स्कूल की बाउंड्रीवाल की भी है। कुल मिलाकर बस स्टैंड तक पानी निकासी के लिए कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। ऐसे में बारिश का पानी सड़क पर ही जमा होगा और सड़क अपनी जगह से उखड़नी शुरू हो जाएगी। हालांकि नपा के अधिकारी पशुचिकित्सालय के सामने स्थित नाले में पानी निकासी की व्यवस्था बनाने की बात कर रहे हैं, लेकिन भीषण बारिश होने की स्थिति में यह सकरा नाला भी पानी के फ्लो को झेल पाने में कहीं से कहीं तक सक्षम नहीं है।
एक बार मे झोंक दी जा रही है डामर और गिट्टी
सड़क निर्माण कर रहे ठेकेदार किस कदर लापरवाही कर सड़क का निर्माण कर रहे हैं। इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। सड़क निर्माण के एक्पर्ट बताते हैं कि यहाँ टुकड़ों में डामरीकरण किया जा रहा है। डबल लेयर में काम नहीं करते हुए सिंगल लेयर में ही डामर डालकर गिट्टी बिछाना गलत है। उदाहरण के लिए मान लिया जाए कि सड़क पर एक फीट ऊंची डामर की लेयर बिछानी है तो इसे दो पार्ट में बिछाना पड़ेगा। पहले आधे फिट की लेयर डालकर उसे रोलिंग करना पड़ेगा। इसके बाद आधा फिट गिट्टी डालकर इसे पुन: रोलिंग किया जाएगा, इससे सड़क ज्यादा मजबूत बनेगी और गिट्टी एक दूसरे से जुड़ी रहेगी, लेकिन यहां एक ही बार गिट्टी डालकर रोलिंग की जा रही है। जिससे सड़क का ज्यादा दिन टिक पाना नामुमकिन है।
डामर का सबसे बड़ा दुश्मन है पानी
एक्सपर्ट से जब पानी निकासी की व्यवस्था नहीं किए जाने के विषय मे पूछा गया तो उन्होंने पूरी स्थिति साफ करते बताया कि ठेकेदार को या नपा को पहले पानी निकासी की व्यवस्था करनी थी, क्योंकि पानी डामर का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। निकासी के प्रबंध नहीं होने से जैसे पानी जमा होगा सड़क इसे सोखना शुरू कर देगी और डामर अपनी जगह छोड़ना शुरू कर देगा। ऐसे में पहली बारिश में ही सड़क का उखड़ना तय है।
इनका कहना….
सड़क का ढलान पशु चिकित्सालय के सामने बने नाले की तरफ किया जा रहा है। बारिश का पानी सीधा नाले में जाएगा। रही बात डबल लेयर की तो ड्रम रोलर होने की वजह से ही बार गिट्टी बिछाकर रोलिंग कराई जा रही है।
ब्रजेश खानुरकर, सब इंजीनियर नपा बैतूल




