Betul Samachar : शराब कारोबार में ओवर और अंडर रेट का बड़ा खेल
Betul Samachar: Big game of over and under rates in liquor business

मनमानी कीमतों पर नहीं आबकारी विभाग का अंकुश नहीं, ग्रुपों में बटे ठेकेदार वसूल रहे मनचाही कीमत
Betul Samachar : बैतूल। जिले में शराब का कारोबार करोड़ो में पहुंच गया है। ठेकेदारों ने महंगी शराब दुकान का ठेका तो ले लिया, लेकिन अब शराब दुकानों पर ओवर रेट और अंडररेट का बड़ा खेल शुरू हो गया है। महंगी अंग्रेजी शराब को अलग-अलग कीमत में बेचने की होने लगी पड़ी है। यह सब शराब के शौकीनों को आकर्षित करने के लिए किया जा रहा है। दूसरी तरफ सस्ती देसी शराब की कीमतों में भी आबकारी विभाग का कंट्रोल ना के बराबर नजर आ रहा है।
ओवर रेट में बेची जा रही है। यह खेल पूरे जिले की शराब दुकानों में चल रहा है। शहर में तो हाल यह है की हर दुकान में शराब की अलग-अलग कीमतें ठेकेदारो ने तय कर रखी है। कहीं एक बोतल शराब हजार रुपए की है तो कहीं वही बोतल 700 रुपए में भी मिल जाती है। हालात यह हैं कि जैसा ग्राहक सध रहा उसे उसी रेट में शराब उपलब्ध करवा दी जाती है।
बड़ी बात यह है कि आबकारी विभाग इस पूरे मामले में आंख पर पट्टी बांधकर बैठा है, जबकि शासन के नियमों के मुताबिक शराब की कीमतें तय कर रखी गई हैं। समय-समय पर आबकारी विभाग के अधिकारियों को इसकी समीक्षा भी करनी है, लेकिन शराब कारोबार ठेकेदार अपने हिसाब से चला रहे हैं।
हाशिए पर रखी शराब की न्यूनतम और अधिकतम कीमतें
जिले के 19 समूहों में बंटी 65 एकीकृत शराब दुकानों पर नजर रखने के लिए अलग अलग ब्लाकों में आबकारी निरीक्षक नियुक्त किये गए हैं, लेकिन इस गोरखधंधे का पर्दाफाश करने के लिए सुरा प्रेमी ही काफी हैं। जानकारी के मुताबिक अलग अलग दुकानों में देसी शराब अधिकतम कीमत से 20 से 25 रुपए ज्यादा कीमत में बेची जा रही जबकि शराब की न्यूनतम और अधिकतम कीमत विभाग तय कर देता है।
नियम के मुताबिक शराब न्यूनतम कीमत से कम में नहीं बेची जा सकती और अधिकतम कीमत से ज्यादा में नहीं बेची जा सकती। इन दोनों ही कीमतों का शराब कारोबार में बड़ा महत्व है, लेकिन यहां तो कहानी ही उलट है। ठेकेदार खुद तय कर रहा है कि शराब को किस कीमत में बेचा जाना है। हालतों पर नजर डालें तो सरकारी दुकानों पर यह कारोबार तो खुलेआम संचालित हो रहा है वह तो अपनी जगह है। इसके अलावा अवैध कारोबार भी बराबरी से चल रहा है।
प्रतिस्पर्धा के कारण शराबियों की मौज,अंग्रेजी शराब अंडर रेट
वित्तीय वर्ष 3024-25 के लिए शराब ठेकेदारों ने महंगे ठेके ठेकेदारों ने उठा तो लिए, अब हाल यह है कि पूरे जिले में ठेकेदारों का कंपटीशन चल रहा है। ज्यादा से ज्यादा शराब बेचने की होड़ में अंग्रेजी शराब अंडर रेट बिकने लगी। हर दुकान में अंग्रेजी शराब की अलग अलग कीमतें है। जिससे शराबियों की मौज हो गई है।
शराब दुकानों में एक ही ब्रांड की शराब की अलग-अलग कीमतें देखने को मिल जाएगी। कहीं एक नियत ब्रांड की शराब की बोतल 800 रुपए की मिल रही है तो वहीं बोतल कहीं 700 रुपए में भी मिल रही है। जबकि इस बोतल की तय कीमत 1380 रुपए है। और यही ब्राण्ड कोई ठेकेदार हजार रुपए में भी बेच रहा है। तो कोई उससे भी कम कीमत में यह हाल शहर के अंदर ही हैं । जहां पूरा आबकारी अमला बैठा हुआ है।
उसके बाद भी शराब के रेट को कंट्रोल नहीं किया जा रहा है। दुकानों में रेट लिष्ट लगाई तो गई है, लेकिन क्या वास्तव में सूरा प्रेमियों को इसी रेट में शराब मिल भी रही है या नहीं इसे देखने की किसी को भी फुर्सत नहीं है और ठेकेदार खुले मैदान में नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
ब्लाक स्तर और गांवों में सबसे अधिक मारामारी
यह तो बात हुई शहर में आबकारी के अधीन आने वाली शराब दुकानों की। ब्लाक स्तर पर ठेकेदार की ज्यादा धूम मची हुई है। गांव-गांव में किराना दुकानों, पान ठेलों सहित कई लोग शराब के धंधे में उतर चुके है। शराब के शौकीनों को लोकल स्तर पर ही आसानी से शराब उपलब्ध हो रही है, लेकिन ब्लाक मुख्यालयों पर बैठे निरीक्षकों का इससे अंजान बना रहना विभाग की बदनामी भी करवा रहा है।
जबकि नियम के मुताबिक डिपो से शराब दुकानों तक लाये जाने की बकायदा समय सीमा तक तय की जाती है। दुकानों तक शराब पहुंचने के बाद इसका कहीं भी परिवहन किया जाना नियमों के खिलाफ है, लेकिन जिस तरह गांव गांव शराब बिक्री हो रही है उससे साफ है की आबकारी विभाग के अधिकारियों ने शराब के अवैध परिवहन को अपनी मौन स्वीकृति दे रखी है।
इनका कहना…
कोई भी ठेकेदार न्यूनतम से कम और अधिकतम से ज्यादा कीमत में शराब नहीं बेच सकता। इसके बीच किसी भी रेट में शराब बेची जा सकती है। इस संबंध में अधीनस्थ अधिकारियों से जानकारी लेंगे, यदि ऐसा किया जा रहा है तो निश्चित रूप से कार्यवाही होगी।
अंशुमान सिंह चढार, जिला आबकारी अधिकारी, बैतूल





