Betul College Road : टू-लेन के डिवाइडर पर मकान का मलबा डालकर खड़े किए पोल
कालेज रोड के डिवाइडरों की गुणवत्ता पर कई सवाल

Betul College Road : बैतूल (सत्येन्द्र सिंह परिहार)। नगरपालिका द्वारा कराए जाने वाले निर्माण कार्यों में बरती जाने वाली लापरवाही जनता को तो दिखती है, लेकिन नपा के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को दिखाई नहीं दे रही है। स्वहित साधने के चक्कर मे जिस तरह जनता का पैसा विकास कार्यों की आड़ में ठिकाने लगाया जा रहा है। इससेे साफ है कि जनता की भावनाओं से ना ही अधिकारियों को बल्कि जनप्रतिनिधियों को भी कोई सरोकार नहीं है।
दरअसल, महीनों से बन रही उस कालेज रोड का जहां रंग बिरंगे पौधे लगाने के लिए डिवाइडरों में काली मिट्टी डाले जाने के बजाय टूटे मकानों से निकाला जाने वाला मलबा डाला जा रहा है। सीमेंट ,कंक्रीट और रेत में पौधे लगाने की नगर पालिका के अधिकारियों की यह कथित तैयारी अब कितना रंग लाएगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन जनता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को सरेआम ठिकाने लगाने की यह शर्मनाक हरकत आम जनता के हित मे कहीं से कहीं तक ठीक नहीं है।
करोड़ों की खूबसूरती की बदरंग तस्वीर
कालेज चौक से गंज मस्जिद चौक टू लेन सड़क पिछले लंबे समय से बनाई जा रही है। यहां सड़क बनाने के बाद होटल आभाश्री तक डिवाडर भी बना दिये गए हैं। प्लानिंग ये है कि डिवाइडरों में रंग बिरंगे फूलों के पौधे लगाए जाएंगे, ताकि सड़क की और इस इलाके की खूबसूरती में चार चांद लग जाएं, लेकिन इन डिवाइडरों और सड़क को बदरंग बनाए जाने की कोशिश की जा रही है। डिवाइडरों में काली मिट्टी डालने के बजाए ठेकेदार टूटे मकानों से निकलने वाला मलबा लाकर डाल रहा है और अधिकारी आंखे मूंदे बैठे हुए हैं। नपा के अधिकारियों का ध्यान इस तरफ ना होना कई सवालों को भी जन्म दे रहा है। जानकारों का मानना है कि डिवाइडरों में यदि सीमेंट कंक्रीट और रेत का मलबा डाला जा रहा है तो यहां पौधों का पनपना लगभग नामुमकिन है।
ऊपर से डाली जा रही काली मिट्टी की लेयर
लगभग 1 करोड़ रुपये की लागत से से यह सड़क उत्कृष्ठ सड़क के नाम पर बनाई जा रही है। इसमें सड़क और डिवाइडर का ठेका ही एक करोड़ रुपये का है। इसके अलावा करीब 1 करोड़ रुपए बिजली पोल, लाइन शिफ्टिंग और विद्युत व्यवस्था में खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन उत्कृष्टता को चूना लगाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जा रही। ठेकेदार रोजाना मलबा लाकर डिवाइडरों में डाल रहा है। सड़क के किनारे मलबे के ढेर लगे हुए हैं । ठेकेदार की यह कारस्तानी आम जनता को तो दिख रही है लेकिन नपा के अधिकारी और जनप्रतिनिधियों को ना दिखना गले नहीं उतर रहा। डिवाइडरों में नीचे से लेकर ऊपर तक मलबा डाला जा चुका है। सिर्फ दिखाने के लिए डिवाइडर के ऊपरी सतह पर काली मिट्टी की पतली लेयर बिछाई जा रही है। बावजूद इसके नपा के अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की खामोशी किसी बड़े झोल की तरफ इशारा कर रही है।
आम के आम और गुठलियों के दाम
नगर पालिका परिषद द्वारा बनवाई जा रही सड़क के डिवाइडरों में बरती जा रही यह लापरवाही आम के आम और गुठलियों के भी दाम वसूलने की तर्ज पर की जा रही है। इस तरह के निर्माण से जुड़े एक्पर्ट का मानना है कि, निर्माण कार्य कराए जाने के पूर्व बकायदा इसकी डीपीआर तैयार की जाती है। डीपीआर के मुताबिक ही ठेकेदार को निर्माण करना होता है। डीपीआर में डिवाइडरों को किस तरह पूर्ण किया जाना है कितनी लम्बाई रहेगी कितनी गहराई और चौड़ाई सहित इसमें कौनसी मिट्टी डाला जाना है इसका उल्लेख भी होता है, लेकिन सीमेंट कंक्रीट का मलबा डाले जाने का उल्लेख तो कतई नहीं हो सकता। ठेके की रकम में मिट्टी की काष्ट भी जुड़ी होती है।
इनका कहना….
डिवाइडर में मलबा डाले जाने की जानकारी मेरे संज्ञान में आई है। इस संबंध में ठेकेदार से चर्चा करेंगे।
नगेन्द्र वागद्रे, सब इंजीनियर नपा बैतूल




