Betul News: कलेक्टर की साफगोई के कायल हुए स्कूल संचालक
Betul News: School operators convinced of Collector's candor

किस्सा सुनाकर आरटीओ को भी किया भविष्य के सचेत
Betul News: जिले के कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की कार्यप्रणाली से लोग भलीभांति परिचित हो चुके हैं। शिकायतों के त्वरित निराकरण की कार्यशैली ने कलेक्टर को कम समय मे लोकप्रियता की ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। आम जनता को ये एहसास हो चुका है कि उम्मीद लेकर कलेक्टर के पास पहुंचने वालों को ना उम्मीद नहीं होना पड़ेगा। ऐसा ही एक नजारा शुक्रवार कलेक्ट्रेट में देखने को मिला।
यहां मीटिंग हाल में आयोजित मीटिंग के दौरान स्कूल संचालक भी कलेक्टर के कायल हो गए। बाहर निकलने के बाद हर किसी का यही कहना था कि कलेक्टर बहुत देखे पर ऐसे कलेक्टर पहली बार देखने में आए हैं जिनकी कार्य प्रणाली, जिनका स्वभाव, जिनका बातचीत करने का तरीका एक आम आदमी की तरह है। मीटिंग में कलेक्टर ने कुछ अधिकारियों की तारीफ भी की तो वहीं निर्वाचन के दौरान कहीं समस्या निर्मित ना हो इसके लिए एक किस्सा भी सुनाया।
यह किस्सा खास तौर पर जिला परिवहन विभाग के लिए एक सुझाव के रूप में उन्होंने प्रस्तुत किया था। हुआ यूं कि कलेक्टर ने निर्वाचन में लगने वाले वाहनों के सम्बंध में यह मीटिंग बुलवाई थी । मीटिंग में समस्त स्कूल संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, जिला परिवहन अधिकारियों के अलावा अन्य अधिकारी भी उपस्थित थे। मीटिंग के दौरान स्कूल संचालकों से आग्रह किया कि निर्वाचन के लिए अपने अपने स्कूलों की बसें उपलब्ध कराना प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित करें।
इसके पूर्व बसों में सुधार कार्य आदि पूर्ण करावा लिया जाए। साथ ही बसों के सारे दस्तावेज भी परिवहन कार्यालय से दुरुस्त करवा लिया जाए ताकि किसी प्रकार की कोई समस्या या इशू निर्मित ना हो सकें। इसके लिए उन्होंने जिला परिवहन अधिकारी अनुराग शुक्ला सहित स्कूल संचालकों को किसी जिले में अपनी पदस्थापना के दौरान घटित हुआ एक किस्सा भी सुनाया। कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवँशी ने बताया कि दरअसल निर्वाचन के दौरान बसों को जो अनुमति पत्र दिया जाता है उस अनुमति पत्र का दुरुयोग किया गया था।
एक बस के दुर्घटना ग्रस्त होने के बाद उसके मालिक ने अनुमति पत्र की फोटोकॉपी कहीं से हासिल कर उसमे काट छांट कर यह बताने की कोशिश की थी कि घटना के वक्त उनकी बस निर्वाचन के कार्य मे लगी हुई थी। इस आपत्ति के बाद मेरे सामने नई समस्या निर्मित हो गई। मैंने मामले को गम्भीरता से लेते हुए इसकी छानबीन शुरू की। निर्वाचन के रिकार्ड सहित परिवहन के रिकार्ड खंगाले।
जिस पेट्रोल पंप को ईंधन के लिए अधिकृत किया गया था, उसके भी रिकार्ड देखे, लेकिन उस बस का रजिस्ट्रेशन नम्बर कहीं भी नजर नहीं आया। इससे साफ हो गया कि बस मालिक ने कहीं से अनुमति पत्र की फोटो कॉपी हासिल कर उसमें कांटछांट की है और इसी आधार पर उसने अपने आप को बचाने की कोशिश की।
किस्सा सुनाते हुए उन्होंने जिला परिवहन अधिकारी अनुराग शुक्ला को निर्देशित किया कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बसों और अन्य वाहनों में निर्वाचन कार्यालय द्वारा जारी किए जाने वाले अनुमति पत्र की ओरिजनल कॉपी ही चस्पा की जाए। किसी भी स्थिति में फोटोकॉपी का उपयोग ना हो। साथ ही अनुमति पत्र का बेजा इस्तेमाल ना हो यह भी सुनिश्चित किया जाए। मीटिंग खत्म होने के बाद स्कूल संचालक यह कहते हुए भी नजर आए की भाई वाह कलेक्टर हो तो ऐसे।





