Betul News: जहां हर मिनट गुजरते 300 वाहन, वहां ट्रैफिक सिग्नल का ठिकाना नहीं
Betul News: Where 300 vehicles pass every minute, there is no traffic signal.

वर्षों से धूल खा रही कारगिल चौक पर सिग्नल की फाइल और कालेज चौक का प्रस्ताव हाथों हाथ लिया
Betul News: (बैतूल)। यह भी इत्तेफाक है कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहा कहलाने वाले कारगिल चौक पर यातायात का इतना दबाव है कि पूरे शहर के लोगों का ध्यान यही लगा रहता है। दूसरी तरफ बैतूल की भाजपाई नगरपालिका इससे जरा भी इत्तेफाक नहीं रखती है। अगर रखती होती तो पूर्व अध्यक्ष अलकेश आर्य के कार्यकाल में यहां ट्रैफिक सिग्नल लगाने का लिए गए प्रस्ताव की फाइल धूल नहीं खाती और अब तक ट्रैफिक सिग्नल की सौगात लोगों को मिल जाती। इधर गजब का संयोग कहे कि कालेज चौक पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव कुछ माह पहले ही परिषद में आया और यहां पर ताबड़तोड़ काम भी शुरू हो गया, जबकि यातायात का दबाव यहां पर कालेज चौक पर कम कहा जा सकता है। यानी नगरपालिका में पावरफूल राजनीति के आगे नपा अध्यक्ष और अधिकारी भी बौने साबित हो रहे हैं।
नगरपालिका की पीआईसी बैठक और सम्मेलन में लिए गए प्रस्तावों पर कितनी गंभीरता दिखाई जाती है। इसके उदाहरण कई बार देखने को मिल चुके हैं। इसके बावजूद यह ढर्रा बदलने का नाम नहीं ले रहा है। जिस भी पार्षद और राजनीतिज्ञ में काम कराने का गड्स हो, वह शहर में कुछ भी करवा सकता है। यह सिलसिला भाजपा के शासन काल में पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है, लेकिन इसमें कोई परिवर्तन नहीं हुआ। छोटे और मंझोले कहे जाने वाले पार्षद हमेशा निर्माण कार्य को लेकर ठगा महसूस करते हैं।
परिषद के सम्मेलन में अक्सर इन पार्षदों की आवाजों को गूंजते हुए देखा जा सकता है। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का महीनों तक निराकरण नहीं हो पा रहा और इधर पावर दिखाने वाले ठेकेदारनुमा पार्षद अपना रौब झाड़कर अपने पुराने और नए वार्डों में काम कराने के लिए अधिकारियों पर इतना अधिक दबाव बना रहे हैं कि गलत को सही कराने से भी नहीं चुक रहे हैं। ऐसे में अन्य वार्ड के पार्षद और वार्ड के लोग अपने आप को अपमानित महसूस कर रहे हैं।

कारगिल चौक पर ट्रैफिक सिग्नल सपना बना
इसे गजब का संयोग कहे या बैतूल की राजनीति का बेहतरीन उदाहरण कि शहर के सबसे यातायात वाले कारगिल चौक पर ट्रैफिक सिग्नल का प्रस्ताव लिए जाने के बाद नगरपालिका भूल चुकी है। जानकारी के मुताबिक पूर्व नपा अध्यक्ष अलकेश आर्य के कार्यकाल में यह प्रस्ताव परिषद के सम्मेलन में पारित हो चुका है। उनका कार्यकाल खत्म होने को सात साल से भी अधिक का समय बीत गया, लेकिन इस प्रस्ताव पर नगरपालिका ने कोई रूचि नहीं दिखाई। नतीजा यह हुआ कि कारगिल चौक पर हर मिनट चारों ओर से करीब 300 वाहनों की आवाजाही होने के बाद भी ट्रैफिक सिग्नल लगाने की बात आगे नहीं बढ़ी और फाइल धूल में दबकर दफन हो गई।
हादसों के बावजूद नहीं लिया सबक
चौकाने वाली बात यह है कि कारगिल चौक से लिंक रोड, गेंदा चौक तक अब तक कई हादसे हो चुके हैं। कई लोगों की जान भी जा चुकी है। लोगों का आक्रोश बढ़ा तो नपा और लोकनिर्माण विभाग ने छोटे स्पीड ब्रेकर बनाकर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। अब स्थिति यह है कि बनाए गए स्पीड ब्रेकर भी सड़क के लेबल पर आ गए, नतीजन हर माह इस मार्ग पर हादसे हो रहे हैं।
इस चौराहे में आखिर क्या था, जो ट्रैफिक सिग्नल को मिली प्राथमिकता?
कालेज चौराहें पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने को लेकर लोग भी हतप्रद है। भले ही इसे सौगात कहे, लेकिन आसपास के पर्यावरणविदों को चौराहें का सौंदर्यीकरण नहीं भा रहा है। दरअसल हरे भरे और छायादार पेड़ों की कटाई करने से उनमें आक्रोश पनप रहा है। यह समझ से परे हैं कि चारों ओर से बराबर समतल कर यहां सड़क बनाना संभव नहीं है। इसके बावजूद पेड़ों की ताबड़तोड़ कटाई कर और तथाकथित जनप्रतिनिधियों ने पर्यावरण से खिलवाड़ करने से कोई कसर नहीं छोड़ी। ट्रैफिक सिग्नल से कालेज चौक को कितना लाभ मिलेग, यह तो भविष्य बताएगा, लेकिन पर्यावरण से खिलवाड़ करने का आक्रोश कहीं लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी को महंगा पड़ा तो इसके लिए तथाकथित राजनेता के साथ इस एजेंडा को आगे बढ़ाने वाले अधिकारियों के सिर मत्था चढ़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
इनका कहना….
मुझे कारगिल चौक पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने के प्रस्ताव के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। इस संबंध में यदि प्रस्ताव लिया होगा तो इसकी फाइल तलब की जा रही है।
ओमपाल सिंह भदौरिया, सीएमओ बैतूल




