Betul News : नपा की आंखों के सामने बेसमेंट का व्यवसायिक उपयोग
दिल्ली कोचिंग हादसे के बाद सरकार के निर्देश पर याद आए नियम तो महज 49 को नोटिस, अभी भी शहर में कई बेसमेंट पर कार्रवई का इंतजार

Betul news: बैतूल। देश की राजधानी नई दिल्ली की एक कोचिंग के बेसमेंट में हुए हादसे के बाद जैसे सरकार की नींद खुल गई है। केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार इस मामले में बेसमेंट का व्यवसायिक उपयोग होने पर कार्रवाई के लिए अधिकारियों को निर्देश दे रही है, लेकिन बैतूल में अजूबा सामने आया है कि यहां पर अधिकारियों के आंखों के नीचे ही एक नहीं बल्कि सौ से अधिक बेसमेंट तैयार हो गए।
चौकाने वाली बात तो यह है कि खुद नपा की लोकनिर्माण शाखा ने ही इन बेसमेंट के अनुमति दी और अनुज्ञाधारियों ने इसका व्यवसायिक उपयोग कर लिया। सरकार के आदेश के बाद बेसमेंट वाले 49अनुज्ञाधारियों को चिन्हित किया गया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि इसकी संख्या एक सैकड़ा से भी अधिक है।
बैतूल नगरपालिका अजब है गजब है, इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं है। नियमों को ताक पर रखकर सरकार के हितों का भी ध्यान भी नहीं रखना यहां के अधिकारियों की आदत में शुमार हो गया है। भले ही सीएमओ समय समय पर इन लोगों पर नकेल कस रहे हैं, लेकिन नियमों की अनदेखी आम बात हो गई है।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण शहर में बड़ी ईमारतों के निर्माण के दौरान बेसमेंट के नाम पर व्यवसायिक उपयोग के लिए दुकान बनाने के रूप में सामने आया है। यह सिलसिला आज नहीं बल्कि पिछले कई वर्षों से चला आ रहा है। जानकार सूत्र बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी शाखा के अधिकारियों के साथ कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण बेसमेंट के नाम लंबे समय से अनुमति दी जा रही है, लेकिन इस अनुमति की वास्तविकता शहर में बने कई कांप्लेक्स और दुकानों को देखने के बाद अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिम्मेदारों ने किस तरह आंखों में धूल झोंकर गड़बड़झाला किया है।
अनुमति बेसमेंट की, बन गई दुकानें
जानकार सूत्र बताते हैं कि शहर में पिछले दस वर्षों में कई रिहायशी और व्यवसायिक क्षेत्र में बेसमेंट के नाम कांप्लेक्स तैयार हो गए। नगरपालिका के अधिकारियों की आंखों के सामने बेसमेंट के नाम व्यवसायिक उपयोग हो गया। कहीं अनुज्ञाधारियों ने बेसमेंट के नाम कई दुकानों का निर्माण कर करोड़ों का मुनाफा कमा लिया। इसके अलावा कई कांप्लेक्स और दुकान संचालकों ने बेसमेंट और पार्किंग का उपयोग व्यवसायिक हित में धड़ल्ले से कर रहे हैं। चौकाने वाली बात तो यह भी है कि अभी भी शहर में कई कांप्लेक्स और मल्टी कांप्लेक्स में नगरपालिका से नक्शा पास कराने के बाद ड्राइंग डिजाइन से छेड़छाड़ करते हुए बेसमेंट का निर्माण किया जा रहा है। यदि अधिकारी स्वंय मौके पर देखे तो शहर में एक दर्जन से अधिक ऐसे मामले सामने आ सकते हैं।
घर के भेदी ढहा रहे लंका
बैतूल नगरपालिका में घर का भेदी लंका ढहाए का किस्सा चरितार्थ हो रहा है। सूत्र बताते हैं कि बेसमेंट के नाम पर अनुमति देने का काम नपा की पीडब्ल्यूडी शाखा को है। यहां के मुखिया कुछ दैवेभो कर्मचारियों को बेसमेंट के नाम व्यवसायिक उपयोग की शिकायत होते ही सक्रिय कर देते हैं। इसके बाद बड़ा खेल शुरू हो जाता है। यह सिलसिला कई वर्षों से चला आ रहा है। सूत्र बताते हैं कि इसी गड़बड़झाले के चक्कर में बेसमेंट के नाम कई अवैध कांप्लेक्स तैयार हो गए। दिल्ली हादासे के बाद अब इनकी सूची बनाकर नोटिस जारी किए गए हैं। अधिकारी दावे कर रहे हैं कि सभी को चिन्हित कर कार्रवाई करेंगे, लेकिन अपने ही घर को ठीक करने को लेकर नपा के कर्मचारी खुद कटघरे में आ खड़े हुए हैं।
इनका कहना…
बेसमेंट के नाम दुकानें बनाने और व्यवसायिक उपयोग करने को लेकर अब तक 49 मामले सामने आए हैं। सभी को नोटिस जारी कर दिए गए हैं। यदि बेसमेंट के नाम व्यवसायिक उपयोग हुआ है तो इसे सील करने के अलावा तोड़ने की भी कार्रवाई करेंगे।
नीरज धुर्वे, एई नपा बैतूल।



