Betul Samachar : आचार संहिता में भी बैतूल जनपद सीईओ पर जिला प्रशासन की मेहरबानी!

Betul Samachar: District administration's kindness to Betul district CEO even in the code of conduct!

निर्वाचन आयोग ने तीन दिन पहले हटाया, जिला प्रशासन आदेश का हवाला देकर कर रहा टालमटोली

Betul Samachar : बैतूल। इस समय आदर्श आचार संहिता का पालन कराने के लिए प्रशासन के अधिकारी कई तरह के जतन कर रहे हैं। निर्वाचन आयोग के निर्देशों का भी शक्ति से पालन किया जा रहा है, लेकिन बैतूल का जिला प्रशासन इससे अछूता दिखाई दे रहा है। मामला बैतूल जनपद की सीईओ अपूर्वा सक्सेना से जुड़ा है, जिन्हें एक ही जिले में चार वर्ष तक रहने के बाद जिले से हटाने के आदेश जारी किए।

आश्चर्य की बात यह है कि जिला प्रशासन ने सीईओ पर मेहरबानी बनाते हुए अभी रिलीव नहीं किया है। लोकसभा चुनाव के लिए नोडल अधिकारी बनाए गए जिला पंचायत सीईओ का कहना है कि आयोग से इस तरह के कोई निर्देश नहीं मिले, फिर सीईओ को कैसे हटाए। उन्होंने यह भी तर्क देकर चौका दिया कि अखबार में खबर प्रकाशित होना हमारे लिए कोई आधार नहीं है।

बैतूल जनपद पंचायत में अपूर्वा सक्सेना पिछले चार वर्षों से सीईओ के पद पर पदस्थ है। उनकी कार्यप्रणाली को लेकर कई शिकायतें भी हुई, लेकिन सूत्र बताते हैं कि राजनैतिक रसूख के कारण वे अपने पद पर जमी रही। नवंबर- दिसंबर में विधानसभा चुनाव होना था। इसके पूर्व एक ही जिले में तीन वर्ष से अधिक पदस्थ रहने वाले अधिकारियों को हटाने का सिलसिला शुरू हुआ। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के उपसचिव राकेश कुशरे ने 1 सितंबर 2023 को करीब 18 जनपद सीईओ और विकास खंड अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए थे।

इसमें बैतूल जनपद सीईओ अपूर्वा सक्सेना को रतलाम जिले की पिपलौदा का सीईओ बनाने के आदेश जारी किए थे। जिले में चार वर्ष होने के बावजूद उन्होंने रिलीव होने के बजाए राज्य शासन के आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। इसके बाद उनके तबादले पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी। जनपद सीईओ ने स्टे मिलते ही एक बार फिर अपना कार्यभार संभाल लिया था।

लोस चुनाव के पहले फिर सख्त हुआ आयोग

स्टे के बाद बैतूल जनपद सीईओ के पद पर कार्यरत सक्सेना को चार वर्ष होने के बाद लोकसभा चुनाव के पहले फिर हटाने के आदेश निर्वाचन आयोग ने दिए। करीब दो दर्जन से अधिक अधिकारियों के तबादला करने के निर्देश दिए थे। यह सभी अधिकारी एक ही जगह तीन वर्ष से अधिक समय से पदस्थ थे। इस सूची में बैतूल जनपद सीईओ अपूर्वा सक्सेना का भी नाम शामिल था।

राजधानी से लेकर स्थानीय अखबारों में भी निर्वाचन आयोग के निर्देश पर स्थानांतरित हुए अधिकारियों के नाम भी प्रकाशित किए, लेकिन जिला प्रशासन निर्वाचन आयोग के आदेश न पहुंचने का हवाला दे रहा है। दूसरी तरफ सीईओ पूर्व की तरह जनपद पंचायत में अपने काम निपटा रही है। यह कहीं न कहीं निर्वाचन आयोग के निर्देशों की अवेहलना जैसा है। अधिकारी आदेश न मिलने का हवाला देकर निर्वाचन आयोग के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है।

इनका कहना..

हमने भी अखबारों के माध्यम से खबर पढ़ी है। कलेक्टर कार्यालय में आज तक निर्वाचन आयोग का जनपद सीईओ को हटाने संबंधी कोई भी आदेश नहीं पहुंचा है। हम ऐसे में बैतूल जनपद सीईओ को कैसे रिलीव कर सकते हैं। अखबार में खबर के आधार पर रिलीव करना संभव नहीं है।

अक्षत जैन, स्वीप नोडल अधिकारी बैतूल

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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