Betul Ki Khabar : वर्षों पुरानी परम्परा को युवाओं ने किया पुनर्जीवित

Betul Ki Khabar: Youth revived years old tradition

बैतूल बाजार में 40 साल बाद आयोजित किया गया नरोनया का रिवाज

Betul Ki Khabar :  बैतूल । धार्मिक नगरी बैतूल बाजार में वर्षों पुरानी परंपरा को आज की युवा पीढ़ी ने फिर से पुनर्जीवित कर दिया। किसी समय रामनवमी के अवसर पर नरोनया नामक परम्परा गांव के बुजुर्ग बड़ी धूमधाम से मनाया करते थे। नगर में नरसिंग भगवान अवतार नरोनया का जुलूस बड़े ही धूमधाम के साथ निकाला जाता था, लेकिन पिछले 40 सालों से यह परंपरा लगभग विलुप्त ही हो चुकी थी।

नगर के युवाओं ने इस विषय पर विचार कर रामनवमी की रात इस परंपरा की पुन: शुरुआत की तो बुजुर्गों सहित नगरवासियों ने खुशी जाहिर की है। आयोजन में बैतूल बाजार सहित आसपास के ग्रामों में रहने वाले हजारों लोग शामिल हुए और युवाओं की मुक्त कंठ से सराहना भी की।

नरसिंह अवतार ने नगर में लगाई दौड़

दरसल नगर में होने वाले सभी धार्मिक आयोजनों को लोग बड़े ही उत्साह के साथ मनाते है ऐसा ही एक बरसों पहले आयोजन जो कि रामनवमी की रात को आयोजित किया जाता था जिसे नारोन्या नाम से जाना जाता था । परम्परा अनुसार एक व्यक्ति को भगवान नरसिंह अवतार में सजाकर पूरे नगर में दौड़ाया जाता था

यह नरसिंह अवतार लोगों को मारता था। इसी परंपरा का निर्वहन कर नरसिंह अवतार ने सारे नगर में दौ? लगाई। आज के इस आधुनिक दौर में इस तरह के आयोजनों को बहुत पीछे छोड़ दिया है, लेकिन नगर के युवाओं ने सोच विचार कर अब पुन: इस परंपरा की शुरुवात कर दी है।

भगवान विष्णु ने लिया था नरसिंह अवतार

नगर के विलास जोशी ने बताया कि इस परंपरा का धार्मिक महत्व भी है। इसका पौराणिक कथाओं में राजा हिरण्य कश्यप से सम्बन्ध है। राजा हिरण्य कश्यप ने कठोर तपस्या कर ब्रम्हा जी से वरदान प्राप्त किया था की कोई मानव उसे मार न सके और न ही कोई पशु,उसकी मृत्यु दिन में हो न रात में, न घर के भीतर हो न ही बाहर , नाआकाश में ना धरती पर ,अस्त्र से न शास्त्र से द्य भगवान के इस वरदान से राजा हिरण कश्यप को घमंड हो गया था ।

राजा हिरण कश्यप अपने पुत्र प्रह्लाद से भी नफरत करता था, क्योंकि भक्त प्रहलाद भगवान विष्णु की पूजा करता था इसलिए राजा हिरण कश्यप ने प्रहलाद को मारने का आदेश दिया था, इसके बाद भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर राजा हिरण कश्यप का वध किया था। इसी परंपरा का निर्वहन किया जाता था, लेकिन अब यह परम्परा फिर से शुरू कर दी गई है। यही वजह है कि भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार को पूजा जाने लगा। रामनवमी पर बैतूल बाजार के प्राचीन मंदिर काला मंदिर से नरसिंह अवतार नारोन्या को निकालकर पूरे नगर में घुमाया गया।

युवा पीढ़ी को सनातन से जोड़ने शुरू की परंपरा

सनातन सेना के सदस्य शिवा मालवीय और दीपक वर्मा ने बताया की नई पीढ़ी को सनातन धर्म से जोड़ने के लिए ही इस आयोजन को पुन: शुरू किया गया है। नगर के प्राचीन काला मंदिर से इस जुलूस को रात के अंधेरे में मशाल की रोशनी में पूरे नगर में घुमाया गया था। और जिस रिवाज से यह परम्परा निभाई जाती थी उस रिवाज का पूरा पालन किया गया। अब प्रतिवर्ष रामनवमी के पावन पर्व पर नरोनया का पर्व नगर में मनाया जाएगा।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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