Betul ki Khabar: 13 कर्मचारी और 2 डॉक्टरों के भरोसे चल रही क्रिटिकल केयर यूनिट

स्टाफ की कमी से व्यवस्था प्रभावित, गंभीर मरीजों को अब भी भोपाल-नागपुर करना पड़ रहा रेफर
Betul ki Khabar: बैतूल। करीब 18 करोड़ रुपए की लागत से तैयार की गई पीएम अभिम क्रिटिकल केयर यूनिट स्टाफ की भारी कमी से जूझ रही है। 50 बिस्तरीय इस यूनिट का शुभारंभ तो कर दिया गया, लेकिन पर्याप्त कर्मचारियों की नियुक्ति नहीं होने से पुराने स्टाफ के भरोसे ही व्यवस्था संचालित की जा रही है। इसका असर मरीजों की सुविधाओं और उपचार व्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
अस्पताल प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों की कमी दूर करने के लिए कलेक्टर से लेकर स्वास्थ्य विभाग भोपाल तक कई बार पत्राचार किया जा चुका है, लेकिन अब तक अतिरिक्त स्टाफ उपलब्ध नहीं हो सका है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार क्रिटिकल केयर सेंटर में वर्तमान में महज 8 नर्सिंग स्टाफ, एक वार्डबॉय, एक ड्रेसर और तीन सुरक्षा गार्ड सहित कुल 13 कर्मचारी कार्यरत हैं। वहीं यूनिट में दो डॉक्टर डॉ. रूपेश पदमाकर और डॉ. प्रकाश चंदेलकर सेवाएं दे रहे हैं। 50 बिस्तरों की क्षमता वाले सेंटर के लिए यह स्टाफ काफी कम माना जा रहा है।
कर्मचारियों की कमी के कारण कई बार मौजूद स्टाफ को एक से अधिक जिम्मेदारियां संभालनी पड़ती हैं। किसी कर्मचारी के अवकाश पर जाने पर स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
छुट्टी पर जाने से बढ़ जाती है परेशानी
क्रिटिकल केयर यूनिट में चौबीसों घंटे मरीजों की निगरानी और उपचार की जरूरत होती है। ऐसे में पर्याप्त नर्सिंग एवं सपोर्टिंग स्टाफ का होना जरूरी है। वर्तमान में सीमित कर्मचारियों से व्यवस्था चलने के कारण ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों पर अतिरिक्त दबाव रहता है। स्टाफ की कमी के कारण मरीजों के परिजनों को भी कई बार परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
क्रिटिकल केयर का उद्देश्य नहीं हो रहा पूरा
जिस उद्देश्य से क्रिटिकल केयर यूनिट का निर्माण किया गया था, वह भी पूरी तरह पूरा होता नजर नहीं आ रहा है। यूनिट में वर्तमान में आर्थोपेडिक वार्ड संचालित किया जा रहा है। जबकि क्रिटिकल केयर सेंटर का मुख्य उद्देश्य गंभीर मरीजों को तत्काल उपचार और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। पर्याप्त संसाधन और विशेषज्ञ स्टाफ नहीं होने के कारण गंभीर मरीजों को अपेक्षित उपचार नहीं मिल पा रहा है।
क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू होने के बाद उम्मीद थी कि जिले के गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर बेहतर उपचार मिल सकेगा और उन्हें इलाज के लिए बार-बार भोपाल या नागपुर रेफर नहीं करना पड़ेगा। लेकिन स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते गंभीर मरीजों को अब भी बड़े शहरों का रुख करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन द्वारा अतिरिक्त कर्मचारियों की मांग लगातार उठाई जा रही है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग इस समस्या का समाधान कब तक करता है।
इनका कहना..
स्टॉफ की मांग को लेकर कई बार पत्राचार किया है। अभी तक स्टॉफ की पूर्ति नहीं हो पाई है। कम स्टॉफ के कारण कई प्रकार की दिक्कतें आती है।
डॉ रूपेश पदमाकर, प्रभारी क्रिटिकल यूनिट, जिला अस्पताल, बैतूल
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