Betul News: किराया बढ़ा तो बसों में भीड़ आधी मजदूरों ने गांवों में ही तलाशा रोजगार

किमी का सफर भी महंगा लगा तो पैदल या लिफ्ट का सहारा, रोज कमाने-खाने वालों के बजट पर सबसे ज्यादा असर; बारिश ने भी घटाई यात्रियों की संख्या
Betul News: बैतूल। यात्री बसों का किराया बढ़ते ही इसका सीधा असर अब बसों की सीटों और यात्रियों की जेब पर दिखाई देने लगा है। 6 अगस्त से बढ़ी किराया दर के बाद कई रूटों पर बसें अपनी क्षमता से आधे यात्रियों के साथ ही दौड़ रही हैं। रोजाना आने-जाने वाले मजदूर और ग्रामीण अब गैर-जरूरी सफर टाल रहे हैं। कई मजदूरों ने तो शहर आकर काम करने के बजाय गांव और घर के आसपास ही रोजगार तलाशना शुरू कर दिया है। वजह साफ है—कमाई सीमित है और आने-जाने का खर्च बढ़ गया है।
बस संचालकों के मुताबिक किराया बढ़ने के बाद यात्रियों की संख्या में कमी आई है। दूसरी ओर डीजल, कर्मचारियों का वेतन, मेंटेनेंस और परमिट सहित संचालन के खर्च जस के तस बने हुए हैं। ऐसे में कम यात्रियों के साथ बस चलाना संचालकों के लिए भी घाटे का सौदा साबित होने लगा है। यदि यही स्थिति बनी रही तो ग्रामीण रूटों पर बसों के संचालन पर भी असर पड़ सकता है।

5 किमी का सफर भी अब सोचकर, मजदूर पैदल जाने को मजबूर
बढ़े किराये का सबसे ज्यादा असर छोटे सफर करने वाले यात्रियों पर दिखाई दे रहा है। पांच किलोमीटर या आसपास की दूरी के लिए भी लोग अब बस में बैठने से पहले किराये का हिसाब लगा रहे हैं। कई मजदूर पैदल ही निकल रहे हैं तो कुछ परिचितों से लिफ्ट लेकर काम चला रहे हैं।
रोज मजदूरी के लिए शहर आने वाले लोगों का कहना है कि यदि दिनभर की कमाई का बड़ा हिस्सा आने-जाने में ही खर्च हो जाए तो दूर जाकर काम करने का फायदा कम हो जाता है। यही कारण है कि ग्रामीण क्षेत्रों से जिला मुख्यालय और आसपास के शहरों में आने वाले मजदूरों की संख्या घटने लगी है।
पहले रोज आते थे, अब जरूरी काम पर ही निकल रहे
किराया बढ़ने से यात्रियों की यात्रा की जरूरत भी बदल गई है। पहले ग्रामीण क्षेत्रों से लोग खरीदारी, छोटे-मोटे काम, मजदूरी और अन्य जरूरतों के लिए नियमित रूप से शहर आते थे। अब कई लोग जरूरी काम होने पर ही बस से सफर कर रहे हैं। इससे बसों में यात्रियों की संख्या कम हो गई है।
बस एजेंटों का कहना है कि किराया बढ़ने के बाद यात्रियों का व्यवहार बदला है। पहले जिस रूट पर बस में पर्याप्त यात्री मिल जाते थे, वहां अब कई बार सीटें खाली रह रही हैं।
संचालकों की चिंता: खर्च बढ़ा, यात्री घटे
बस संचालकों के सामने भी दोहरी परेशानी खड़ी हो गई है। संचालन का खर्च लगातार बढ़ रहा है, जबकि किराया बढ़ने के बावजूद यात्रियों की संख्या कम हो रही है। बस को तय समय और रूट पर चलाने के लिए डीजल, ड्राइवर-कंडक्टर का वेतन, मरम्मत और अन्य खर्च करने ही पड़ते हैं।
संचालकों का कहना है कि किराया बढ़ने से उनकी कमाई बढ़ने के बजाय कई रूटों पर यात्री कम हो गए हैं। ग्रामीण रूटों पर इसका असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। यदि यात्रियों की संख्या इसी तरह कम रही तो भविष्य में कुछ रूटों पर बस संचालन का समय और फेरे प्रभावित होने की आशंका है।
बारिश ने और बढ़ाई परेशानी
किराया बढ़ने के साथ पिछले दो-तीन दिनों से जारी बारिश ने भी यात्रियों की आवाजाही कम कर दी है। लगातार बारिश के कारण लोग गैर-जरूरी काम से घर से निकलने से बच रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कीचड़ और खराब रास्तों के कारण भी आवाजाही प्रभावित है। यानी बस संचालकों के सामने इस समय किराया बढ़ने से यात्री कम होना और बारिश से आवाजाही घट जाना दोहरी चुनौती है। वहीं आम यात्रियों के लिए बढ़ा किराया रोजमर्रा के सफर का अतिरिक्त बोझ बन गया है।
यात्रियों की कमी से खाली रह रही सीटें
बस संचालकों के अनुसार किराया बढ़ने के बाद कई बसों में पहले की तुलना में यात्रियों की संख्या कम हुई है। खासकर मजदूर और ग्रामीण वर्ग प्रभावित हुआ है। इसका असर बसों की सीटों पर साफ दिखाई दे रहा है। कई बसें आधी क्षमता के यात्रियों के साथ ही रूट पर चल रही हैं।
इनका कहना…
‘जब से यात्री बसों का किराया बढ़ा है, यात्रियों की संख्या में भी कमी आई है। कई बसें आधी खाली चल रही हैं। ‘
— मंटू खान, एजेंट, खान बस सर्विस, बैतूल
‘कुछ दिनों से बसों में यात्रियों की संख्या कम हुई है। पहले मजदूर वर्ग के लोग भी नियमित रूप से आना-जाना करते थे, अब उनकी आवाजाही कम हो गई है। ‘
— कैलाश ठाकुर, एजेंट, डिस्ट्रिक्ट बस सर्विस, बैतूल
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