Betul Ki Khabar : प्रशासकीय सुविधाओं के नाम पर 60 किमी दूर तक प्रभार

भैंसदेही में सचिवों की ड्यूटी का अजब बंटवारा; मूल पंचायत से 30-60 किमी दूर दूसरी पंचायतें, अलग सेक्टर में भी जिम्मेदारी
Betul Ki Khabar : बैतूल। ग्राम पंचायतों में कामकाज सुचारू रखने के लिए जिला पंचायत ने सचिवों को अतिरिक्त पंचायतों का प्रभार तो दे दिया, लेकिन प्रभार की दूरी ने ही पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भैंसदेही जनपद की छह पंचायतों के सचिवों को 30 से 60 किलोमीटर दूर तक की पंचायतों का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। कुछ मामलों में तो मूल पंचायत और अतिरिक्त प्रभार वाली पंचायत अलग-अलग सेक्टर में हैं। जिला पंचायत के 6 अगस्त के आदेश में इसे ‘प्रशासकीय कार्य सुविधा बताया गया है।
अब सवाल यह है कि जो सचिव अपनी मूल पंचायत में रोजमर्रा के काम संभालने में व्यस्त हैं, वे 50-60 किमी दूर दूसरी पंचायत में नियमित रूप से कैसे उपलब्ध रहेंगे? यदि सचिव दूसरी पंचायत में रहेगा तो पहली पंचायत और पहली में रहेगा तो दूसरी पंचायत के कामकाज का क्या होगा?
कहीं 60 तो कहीं 50 किमी दूर भेज दिया
आदेश में अतिरिक्त प्रभार का जो बंटवारा किया गया है, उसमें दूरी को लेकर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। राक्सी से डेडवाकुंड और चोपनीखुर्द से कोथलकुंड का अतिरिक्त प्रभार करीब 60 किलोमीटर दूर है। वहीं झल्लार से धार की दूरी भी करीब 50 किलोमीटर बताई गई है। इन मामलों में सेक्टर भी अलग हैं। पंचायत सचिव का काम सिर्फ पंचायत कार्यालय में बैठना नहीं है। ग्रामसभा, मनरेगा, पीएम आवास, निर्माण कार्यों की निगरानी, जन्म-मृत्यु पंजीयन, हितग्राही योजनाएं, पंचायत की वित्तीय व्यवस्था और ग्रामीणों की शिकायतों सहित कई काम सीधे सचिव से जुड़े होते हैं।
ऐसे में एक सचिव को दो पंचायतों की जिम्मेदारी देने के साथ यदि दोनों के बीच 30 से 60 किमी की दूरी भी हो तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि सचिव का समय पंचायत संभालने में लगेगा या सड़क पर आने-जाने में? दूरस्थ पंचायतों में सचिव की नियमित उपलब्धता नहीं रही तो ग्रामीणों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी पंचायत कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं। योजनाओं के क्रियान्वयन और निर्माण कार्यों की निगरानी पर भी इसका असर पड़ने की आशंका है।
‘सुविधा किसकी, यह सबसे बड़ा सवाल
जिला पंचायत ने आदेश में अतिरिक्त प्रभार देने के पीछे ‘प्रशासकीय कार्य सुविधा के आधार बनाया है। लेकिन इसी आधार पर अब सवाल खड़ा हो रहा है कि प्रशासनिक सुविधा के लिए निकटवर्ती पंचायतों का विकल्प क्यों नहीं चुना गया? जब सचिव को अपनी मूल पंचायत से 50-60 किमी दूर भेजा जा रहा है और वह भी दूसरे सेक्टर में, तो क्या यह व्यवस्था वास्तव में प्रशासनिक सुविधा बढ़ाएगी? या फिर इससे सचिव और ग्रामीण दोनों के लिए परेशानी बढ़ेगी?
व्यवस्था की जरूरत थी तो दूरी क्यों नहीं देखी?
पंचायतों में सचिवों की कमी होने पर अतिरिक्त प्रभार देना सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था का हिस्सा हो सकता है। लेकिन अतिरिक्त प्रभार ऐसी पंचायत में हो, जहां सचिव जरूरत पड़ने पर कम समय में पहुंच सके, तो व्यवस्था ज्यादा व्यावहारिक रहती है। भैंसदेही में जारी आदेश के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अतिरिक्त प्रभार तय करते समय पंचायतों के बीच की दूरी और सेक्टर का ध्यान रखा गया था? यदि नहीं, तो ‘प्रशासकीय सुविधा का आधार ही सवालों के घेरे में आ जाता है। इस संबंध में अपर प्रभारी जिला पंचायत सीईओ वंदना जाट को उनके मोबाइल 9893335269 पर काल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।
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