Betul Samachar: 300 की नकल, 1500 की वसूली, बाबू की छुट्टी में नानू राज कायम

हस्ताक्षर से लेकर रिकार्ड तलाशने तक अलग-अलग वसूली का दावा
Betul Samachar: बैतूल। जिले के रजिस्ट्री कार्यालय में सरकारी शुल्क से कई गुना अधिक राशि वसूलने के आरोपों ने कार्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद की गई पड़ताल में सामने आया कि रजिस्ट्री की सत्यापित प्रति (नकल) के लिए निर्धारित शासकीय शुल्क 300 रुपए है, लेकिन नकल शाखा में पदस्थ बाबू के अक्सर अवकाश पर होने का लाभ उठाकर यहां अस्थाई कर्मचारी नानू आवेदकों से 1500 रुपए तक वसूल रहा है।
इस आरोप के बाद अधिकारी इसे सिरे से नकार रहे हैं। उनका कहना है कि मामला उनके संज्ञान में भी आया है। पूछताछ की जाएगी। लेकिन सवाल है कि अभी तक अधिकारियों को इसकी भनक क्यों नहीं लग पाई।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ लोगो ने जब अतिरिक्त राशि लेने का कारण पूछा तो कथित तौर पर बताया गया कि नकल पर हस्ताक्षर कराने के लिए कोई धुर्वे साहब 500 रुपए लेते हैं, जबकि रसीद ‘कंज्यूमÓ कराने के नाम पर साहब की किसी महिला मित्र को भी 200 रुपए देने पड़ते हैं। इसके अलावा पुराने रिकॉर्ड तलाशने के नाम पर अलग से राशि ली जा रही है, जिसे नानू ने स्वयं अपना खर्च बताता है।
मामले में यह आरोप भी लगाया है कि बाबू की अनुपस्थिति के दौरान एक निजी स्कूल की संचालिका को पुराने सरकारी रिकॉर्ड की फोटो खींचने की तक कि यहा अनुमति दे दी गई। वहीं नानू द्वारा स्वयं दस्तावेजों का अनुवाद कर उनकी इबारत लिखकर देने की बात भी सामने आई है, जबकि यह कार्य केवल अधिकृत कर्मचारी के अधिकार क्षेत्र में ही आता है। इन दावों ने रिकॉर्ड की सुरक्षा और कार्यालय की कार्यप्रणाली पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच और कार्रवाई की उठी मांग
शिकायत के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि उप पंजीयक कार्यालय में कथित अवैध वसूली और रिकॉर्ड से जुड़ी अनियमितताओं से अधिकारी अनजान हैं या फिर यह सब उनकी जानकारी में हो रहा है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ आम नागरिकों के साथ धोखाधड़ी का भी माना जाएगा।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि रजिस्ट्री कार्यालय में पारदर्शिता बहाल हो और आम जनता का विश्वास कायम रह सके।
इनका कहना….
मेरे संज्ञान में भी यह मामला आया है। जबकि ऐसा कुछ नहीं है। यह जरूर है कि बाबू बीमार होने से अक्सर अवकाश पर रहता है। फिर भी जांच करवाई जाएगी।
दिनेश कौशले , जिला पंजीयक बैतूल
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