Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: थाने की कुर्सियो से चिपकी रणनीति का आखिर क्या है गणित?? सरकारी नुमाईंदे किस युवक की धमाचौकड़ी से परेशान??? किस साहब को एक माह का प्रभार मिलने से खिली बांछे???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……..

थाने की कुर्सियों से चिपकी रणनीति का गणित

हाल ही में वर्दी वाले विभाग में तीन थानेदारों की जिले से रवानगी हो गई। एक सप्ताह बीतने के बाद इनकी रिलीविंग नहीं हो पाई है। अब इसे महज प्रशासनिक ढिलाई समझना भूल होगी। इसके पीछे पूरा गणित मंथली का बताया जा रहा है। चर्चा है कि नए जिले में कदम रखते ही तुरंत थाना मिलेगा या नहीं इसकी कोई गारंटी नहीं। यदि मिल भी गया तो सिस्टम जमाने में 15-20 दिन ऐसे ही निकल जाएंगे।

इससे जेब पर बोझ पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता है। चर्चा है कि वैसे भी यह खास व्यवस्था हर माह की 10 से 15 तारीख तक चरम पर रहती है। ऐसे में सुनहरा मौकेे को छोड़ना किसे मंजूर रहेगा। चर्चा है कि तबादले के आदेश भले आ चुके हो, लेकिन असली विदाई की घड़ी मंथली के कलैंडर से तय हो रही है। अब देखना यह है कि इस रणनीतिक देरी को व्यवस्था मानकर नजर अंदाज करते या थानेदार रीलिव हो जाएंगे।

सरकारी दफ्तरों में युवक की धमाचौकड़ी

एक युवक अक्सर कलेक्ट्रेट, नपा और सरकारी दफ्तर में जमकर धमाचौकड़ी मचा रहा है। उसकी इस हरकत से विभागीय अधिकारी और कर्मचारी खासे परेशान हो रहे हैं। वह अपने आप को वल्लभ भवन तक हिला देने वाला बताते फिर रहा है, इससे कर्मचारियों में भी भय व्याप्त है। चर्चा है कि एक बार तो उसने जिला पंचायत में जिले के एक कलेक्टर से अपनी रिश्तेदारी भी घोषित कर दी थी।

चूंकि उस समय कलेक्टर और युवक का सरनेम एक ही था, लेकिन जब खोजबीन शुरू की तो पूरे तथ्य झूठे पाए गए। इसके बाद तथाकथित फर्जी युवक को दुत्कार मारकर भागा दिया था। हालांकि कलेक्टर के जाने के बाद भी यह युवक शासकीय दफ्तरों में घूमकर धौंस जमाते देखा जा सकता है। बताते चले कि युवक शहर के कालापाठा का रहने वाला है और वह एक बैग लेकर चलता है, जिसमें कागजों का जखीरा भरा हुआ है।

एक माह के प्रभार से खिली बांछे

राजस्व विभाग की एक महिला अधिकारी एक माह की ट्रेनिंग पर क्या गई, पुराने साहब की बांछे खिल गई। दरअसल बड़े साहब एक माह के लिए पुराने खिलाड़ी रहे साहब को प्रभार सौंप दिया। चर्चा है कि इसके बाद साहब की लाटरी लग गई है और उन्होंने अपने आप में मातहमों के अलावा पुराने कालोनाइजर और अन्य लोगों को संदेश भेज दिया है कि एक माह में जितने काम करवाना है करवा लो।

इसके बाद मौका नहीं मिलेगा। उनके संदेश को कालोनाइजरों की गैंग ने गंभीरता से लिया और अब संबंधित तहसील आफिस में उनकी धमाचौकड़ी इस बात का प्रमाण है कि एक माह में साहब खुद के अलावा कालोनाइजरों को भी फीलगुड महसूस करवाने की तैयारी कर रहे हैं।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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