Betul Tax Evasion: टैक्स चोरी की शिकायत पर वाणिज्य कर विभाग मौन

एक साल से शिकायत कर्ता कर रहा कार्रवाई का इंतजार
Betul Tax Evasion: बैतूल। जिले में कर चोरी के मामलों को लेकर सरकार भले ही सख्ती की बात करती हो, लेकिन बैतूल का वाणिज्य कर विभाग इस मामले में सुस्त रवैया अपनाता नजर आ रहा है। बाजार में खुलेआम कच्ची पर्ची पर लाखों करोड़ों का व्यवसाय हो रहा है। टैक्स चोरी की शिकायत किए जाने के बावजूद करीब एक वर्ष बीत जाने पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है, जबकि कार्रवाई की दिशा में अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
एक साल पहले की गई थी शिकायत, कार्यवाही शून्य
बैतूल शहर के रामनगर निवासी प्रदीप कुमार चौकीकर ने बताया कि उन्होंने 10 मार्च 2025 को वाणिज्य कर नियमों के उल्लंघन और कर चोरी को लेकर विस्तृत शिकायत विभाग में दर्ज कराई थी। शिकायत के साथ संबंधित प्रमाण भी उपलब्ध कराए गए थे। उस समय अधिकारियों ने मामले में जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया था, लेकिन एक साल का लंबा समय बीत जाने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि इस दौरान वे कई बार विभागीय कार्यालय पहुंचे, लेकिन हर बार उन्हें केवल आश्वासन देकर लौटा दिया गया। उनका कहना है कि सरकार जहां कर चोरी के मामलों में सख्ती बरतने की बात करती है, वहीं विभाग के कुछ अधिकारी इस दिशा में गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। इससे शिकायतकर्ता को लगातार परेशान होना पड़ रहा है।
कार्रवाई को लेकर एक-दूसरे पर टाली जा रही जिम्मेदारी
वाणिज्य कर विभाग में कर निरीक्षक के पद पर रोहित जरीवाला और विजय राठौर पदस्थ हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार विभाग में प्राप्त शिकायतों की जांच और निराकरण का जिम्मा इन्हीं अधिकारियों पर है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब भी वह कार्रवाई की जानकारी लेने के लिए कार्यालय पहुंचते है, तो दोनों अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आते हैं। कभी कहा जाता है कि दूसरे अधिकारी इस मामले को देख रहे हैं, तो कभी यह कहा जाता है कि वरिष्ठ अधिकारी के निर्देश मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। इस तरह जिम्मेदारी टालने के कारण मामला लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ है।
अब शिकायत की फाइल गुम होने की दी जा रही जानकारी
मामले में नया मोड़ तब आया जब शिकायतकर्ता ने बताया कि अब उनकी शिकायत से जुड़ी फाइल ही विभाग में नहीं मिल रही है। प्रदीप चौकीकर के अनुसार उन्होंने छह पेज की विस्तृत शिकायत विभाग में जमा की थी। कई बार कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी जब कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की। वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि फाइल कर निरीक्षक के पास है और उसी स्तर पर कार्रवाई की जा रही है, लेकिन बाद में यह सामने आया कि संबंधित फाइल विभाग में खोजने पर भी नहीं मिल रही है। इससे विभागीय लापरवाही पर और सवाल खड़े हो गए हैं।
अब कलेक्टर और कमिश्नर से शिकायत की तैयारी
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होती है तो अब वे इस मामले की शिकायत कलेक्टर और संभागीय कमिश्नर से करेंगे। उनका कहना है कि टैक्स चोरी जैसे गंभीर मामले में भी यदि विभाग कार्रवाई नहीं करता है तो इससे शासन को राजस्व का नुकसान होने के साथ-साथ विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इस पूरे मामले ने वाणिज्य कर विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है और अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस पर क्या कदम उठाते हैं।




