Betul Exclusive: 457.57 करोड़ की मेंढा-वर्धा जल योजना का टेंडर निरस्त

जिले के 332 गांवों तक पानी पहुंचने की योजना खटाई में, नए सिरे से जारी होंगे टेंडर
Betul Exclusive: (सत्येंद्र सिंह परिहार) बैतूल। जिले के ग्रामीण अंचलों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की महत्वाकांक्षी मेंढा और वर्धा जलाशय परियोजना फिलहाल खटाई में पड़ गई है। मध्यप्रदेश जल निगम द्वारा संचालित इस योजना के तहत जिले के सात विकासखंडों के 332 गांवों तक नल से शुद्ध पेयजल पहुंचाया जाना था, लेकिन कार्य में गंभीर लापरवाही के चलते 457.57 करोड़ की दोनों परियोजनाओं के टेंडर निरस्त कर दिए गए हैं।
जानकारी के अनुसार इन दोनों योजनाओं को पूर्ण करने की जिम्मेदारी मेसर्स एलएन मालवीय इंफ्रा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड को सौंपी गई थी। कंपनी को 14 मार्च 2023 को वर्क ऑर्डर जारी किया गया था। तय समयसीमा के अनुसार 13 मार्च 2026 तक कार्य पूर्ण होना था, लेकिन अब तक मात्र 30 से 40 प्रतिशत कार्य ही किया जा सका। समय सीमा समाप्ति के करीब पहुंचने के बावजूद प्रगति बेहद धीमी रहने के कारण जल निगम को टेंडर और अनुबंध निरस्त करने की कार्रवाई करनी पड़ी।
वर्धा जलाशय परियोजना
वर्धा जलाशय परियोजना के अंतर्गत 91 गांवों में पेयजल आपूर्ति की योजना बनाई गई थी। इसमें आमला विधानसभा के 1, मुलताई विधानसभा के 78 तथा प्रभात पट्टन विकासखंड के 12 गांव शामिल थे। इस परियोजना की कुल लागत 134.59 करोड़ रुपये तय की गई थी। लेकिन ठेकेदार द्वारा अपेक्षित प्रगति नहीं किए जाने के कारण विभाग को यह टेंडर निरस्त करना पड़ा।
मेंढा जलाशय परियोजना
इसी प्रकार मेंढा जलाशय परियोजना के तहत चार विधानसभाओं के 241 गांवों को शामिल किया गया था। इनमें बैतूल विधानसभा के 136, आमला के 8, आठनेर के 73 और भैंसदेही विधानसभा के 24 गांव शामिल थे। इस परियोजना की कुल लागत 323.98 करोड़ रुपये थी। यहां भी ठेकेदार की लापरवाही के चलते कार्य अधूरा रह गया, जिससे ग्रामीणों को अब भी पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है।
डेढ़ वर्ष का समय और लगेगा, अधिकारियों ने ठेकेदारों को सिखाया
जल निगम अधिकारियों के अनुसार शेष कार्य को पूर्ण कराने के लिए रिटेंडर की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली गई है। नए ठेकेदार के माध्यम से कार्य शुरू होने में और परियोजना पूर्ण होने में लगभग डेढ़ वर्ष का अतिरिक्त समय लगेगा। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि कार्य में तेजी लाकर ग्रामीणों को जल्द से जल्द पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने के प्रयास किए जाएंगे। इस बीच मझधार में योजना अटकने के बावजूद जल निगम द्वारा समय रहते ठेकेदार के खिलाफ सख्त कदम उठाया गया है। अधिकारियों का मानना है कि जनहित से जुड़ी योजनाओं में लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इनका कहना….
समय सीमा के अनुसार कार्य नहीं होने के कारण टेंडर और अनुबंध निरस्त किए गए हैं। रिटेंडरिंग की प्रक्रिया जारी है। प्रयास किए जाएंगे कि परियोजना समयबद्ध रूप से पूर्ण कर सभी ग्रामों तक पेयजल पहुंचाया जा सके।
अविनाश दिवाकर, महाप्रबंधक, जल निगम




