Betul News: जिन वन कर्मियों पर सवाल, उन्हीं को मिलेगा कमेंडेशन डिस्क! प्रशस्ति पत्र

लंबित जांच और विवादों के बीच पुरस्कार के लिए नामों की अनुशंसा, वन विभाग के अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
Betul News: बैतूल। वन विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित करने की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में आ गई है। दक्षिण वन मंडल सामान्य के दो कर्मचारियों के नाम वर्ष 2026 के प्रतिष्ठित ‘प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख कमेंडेशन डिस्क एवं प्रशस्ति पत्र के लिए अनुशंसित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
खास बात यह है कि जिन कर्मचारियों के नाम पुरस्कार के लिए भेजे गए हैं, उनकी कार्यप्रणाली और छवि को लेकर विभाग के भीतर ही चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर किन उपलब्धियों और मापदंडों के आधार पर इन नामों की अनुशंसा की गई है?
लंबित जांच के बीच पुरस्कार की अनुशंसा
सूत्रों के मुताबिक, दक्षिण वन मंडल सामान्य में पदस्थ वन क्षेत्रपाल दयानंद डेहरिया का नाम पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया है। बताया जाता है कि उनके खिलाफ जांच लंबित है। इसके अलावा हाल ही में ताप्ती रेंज की तीन से चार बीटों में बड़े पैमाने पर सागौन कटाई की घटनाएं सामने आई थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए डीएफओ अरिहंत कोचर ने अलग-अलग रेंज के कर्मचारियों को जांच के लिए जंगल में उतारा था। हालांकि इस जांच का अंतिम नतीजा अब तक सार्वजनिक नहीं हुआ है।इसी मामले से जुड़ी एक और चर्चा विभाग में है।
सूत्रों का दावा है कि गौनीघाट में जब्त की गई सागौन लकड़ी से कथित तौर पर संबंधित अधिकारी के लिए फर्नीचर तैयार कराया जा रहा था। सरकारी वाहन के निजी उपयोग को लेकर भी आरोप लगाए जाते रहे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुरस्कार की अनुशंसा के बाद इन चर्चाओं ने फिर जोर पकड़ लिया है।
ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थ वन रक्षक पर भी सवाल
पुरस्कार के लिए अनुशंसित दूसरे नाम वन रक्षक अशोक गढ़ेकर का बताया जा रहा है, जो ट्रेनिंग स्कूल में पदस्थ हैं। उनके संबंध में भी विभागीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। सूत्रों के अनुसार, उनका निजी मकान किराए पर दिया गया है, जबकि ट्रेनिंग स्कूल के सरकारी आवास पर उनके कब्जे को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
हाल ही में वन रक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में पैदल चाल समिति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी गई थी। इस दौरान कुछ अभ्यर्थियों को कथित तौर पर उपकृत किए जाने की चर्चाएं भी विभाग में हैं। हालांकि इन आरोपों की भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अनुशंसा करने वाले अधिकारी की भूमिका भी जांच के दायरे में
गौरतलब है कि वन विभाग के आदेश क्रमांक एफ 3-10/2022/10-1, दिनांक 7 दिसंबर 2022 के तहत प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को वन क्षेत्रपाल, उपवन क्षेत्रपाल, वनपाल और वनरक्षकों को उत्कृष्ट कार्यों के लिए कमेंडेशन डिस्क एवं प्रशस्ति पत्र देने का प्रावधान है। वर्ष 2026 के लिए मुख्यालय स्तर पर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (प्रशासन-1) की अध्यक्षता में गठित समिति ने विभिन्न वनवृत्तों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण कर प्रदेश के 26 अधिकारियों-कर्मचारियों के नामों की अनुशंसा की है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि दक्षिण वन मंडल से भेजे गए नामों का चयन किन उपलब्धियों के आधार पर हुआ? क्या अनुशंसा से पहले संबंधित कर्मचारियों की कार्यप्रणाली, लंबित जांच और उनके विरुद्ध सामने आई शिकायतों का परीक्षण किया गया था? पुरस्कार की अंतिम प्रक्रिया से पहले इन तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल जरूरी मानी जा रही है।
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