Betul Samachar: घोटालेबाजों पर कार्रवाई में जनप्रतिनिधियों का सुस्त रवैया

अफसरों को मिलता है लीपापोती का पूरा मौका
Betul Samachar: बैतूल। जिले में भ्रष्टाचार के मामले सामने आते ही कार्रवाई की मांग तेज हो जाती है, लेकिन जनप्रतिनिधियों का एक्शन कई बार इतनी देर से होता है कि तब तक संबंधित अधिकारियों को सफाई देने, रिकॉर्ड दुरुस्त करने और मामले को संभालने का पर्याप्त मौका मिल जाता है। पिछले एक साल में सामने आए भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के कई मामलों में कार्रवाई की यही तस्वीर दिखाई दी है। कार्रवाई हुई, लेकिन सवाल यह है कि जब मामला सामने आया था, तब जनप्रतिनिधि कहां थे?
हाल ही में सीएमएचओ मनोज हुरमाड़े पर आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि करीब 250 कर्मचारियों की जगह 450 कर्मचारी दर्शाकर भुगतान किया गया। मामला सामने आए करीब एक पखवाड़ा बीत चुका है, लेकिन अब तक जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई बड़ा हस्तक्षेप या स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि मामले में जांच और कार्रवाई की रफ्तार इतनी धीमी क्यों है? यदि किसी अधिकारी पर गंभीर वित्तीय अनियमितता के आरोप लगते हैं तो तत्काल जांच शुरू कर रिकॉर्ड सुरक्षित करने की जरूरत होती है। देरी होने पर संबंधित पक्ष को अपना बचाव तैयार करने का मौका मिल जाता है।
चिचोली के मामले में भी देरी
इससे पहले चिचोली में करोड़ों रुपए के भ्रष्टाचार का मामला सामने आया था। मामले ने काफी सुर्खियां बटोरीं, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई होने में समय लगा। इस दौरान मामले को लेकर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता भी सवालों के घेरे में रही। आरोप सामने आने के तुरंत बाद दबाव बनाने के बजाय बाद में सक्रियता दिखाई गई।
जेएच कॉलेज छात्रवृत्ति घोटाले में भी यही तस्वीर
जिले के प्रमुख जेएच कॉलेज में छात्रवृत्ति से जुड़ी गड़बड़ी का मामला भी सामने आया था। इस मामले में भी कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। आरोप सामने आने के बाद तत्काल कदम उठाने के बजाय प्रक्रिया आगे बढ़ने में समय लगा। ऐसे मामलों में देरी से न केवल जांच प्रभावित होने की आशंका रहती है, बल्कि जिम्मेदार लोगों को बचाव का अवसर भी मिल जाता है।
सवाल कार्रवाई से ज्यादा ‘समय’ पर
भ्रष्टाचार के मामलों में कार्रवाई होना जरूरी है, लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है समय पर कार्रवाई होना। जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी केवल मामला सुर्खियों में आने के बाद बयान देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि भ्रष्टाचार का मामला सामने आते ही तत्काल जांच और कार्रवाई क्यों नहीं होती? यदि कार्रवाई पहले हो तो लीपापोती की गुंजाइश कम होगी और प्रशासन में जवाबदेही भी मजबूत होगी।
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें
👇https://chat.whatsapp.com/KWRuTRhIWoXDiwhdwiCm29?mode=gi_t
बैतूल जिले की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending और Viral खबरों के लिए जुड़े रहे snewstimes.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें snewstimes.com




