Betul Samachar: सर्विस प्रोवाइडर का कमीशन और जटिल प्रक्रिया बना आय का मुख्य स्रोत!

सोशल मीडिया पर भी सच्चाई हो रही उजागर, 9 साल से एक ही जगह पदस्थ रजिस्ट्रार
Betul Samachar: बैतूल। जमीन और मकान की खरीद फरोख्त में शासन को तो करोड़ों का राजस्व मिल रहा है। बावजूद रजिस्ट्री की जटिल प्रक्रिया की आड़ में अधिकारी भी बहती गंगा में आज कल से नहीं, बल्कि पिछले 9 वर्षों से जमकर हाथ धो रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक एक ही जगह पर पदस्थ होने के साथ साथ हाल ही में पड़ोसी जिले नर्मदापुरम का भी दायित्व मिल चुका है। मतलब पांचों उंगलियां घी में और सिर कढ़ाई में है। भले ही इस गम्भीर मामले में कोई शिकायत सामने नहीं आ पाती, लेकिन सांझवीर टाईम्स के पास क्रेता, विक्रेताओं और जमीन से जुड़े एजेंटों द्वारा दी गई महत्वूपूर्ण जानकारी मौजूद है।
सांझवीर टाईम्स द्वारा उप पंजीयक कार्यालय में मची लूट को लेकर लगातार खबरें प्रकाशित होने के बाद अब सोशल मीडिया पर ख़बर पर प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। यह इस बात का सबूत है कि खेल छोटा मोटा नहीं बल्कि बहुत बड़ा है। इस बीच जानकारी सामने आ रही है कि खबरों के बाद उप पंजीयक दिनेश कौसले सर्विस प्रोवाइडरों कार्यालय जाकर रिकार्ड भी खंगाल रहे हैं। इसके पीछे की वास्तविकता सामने नहीं आई है और न ही उनके द्वारा किसी तरह का प्रेसनोट जारी किया है।
अधिकारी से लेकर भृत्य तक जमाकर रखी पूरी सेटिंग
रजिस्ट्री की आड़ में हो रहे लाखों के वारे न्यारे को लेकर सूत्रों मिली जानकारी के मुताबिक ऑन लाइन रजिस्ट्री की जटिलताओं को देखकर ना ही क्रेता लफड़े में पड़ना चाहते हैं और ना ही विक्रेता। वहीं दूसरी तरफ रिजिस्त्री कार्यालय की तरफ से सेवाएं देने के लिए थोक में सर्विस प्रोवाइडर नियुक्त कर दिए गए हैं। जानकारों का कहना है कि सर्विस प्रोवाइडरों को सिर्फ दस्तावेज ही उपलब्ध करवाना होता है। बाकी पूरी प्रक्रिया वह स्वयं पूर्ण कर स्टाम्प ड्यूटी समेत अतिरिक्त रकम की वसूली कर लेते हैं।
जिन्हें इस खेल के बारे में पता है वह तो आसानी से रुपया सरका देते हैं तो वहीं दूसरी तरफ यदि फर्जी लेन देन को लेकर किसी क्रेता, विक्रेता ने जवाब सवाल कर लिया तो उसे दस्तावेज की टाइपिंग और अन्य खर्च बताकर संतुष्ट कर दिया जाता है। दिन भर में जितनी भी रजिस्ट्री होती हैं। सभी का हिस्सा उस तक पहुंचा दिया जाता है। जानकारों का दावा है कि, इस फर्जी वाड़े में अधिकारी से लेकर प्यून तक कि हिस्सेदार तय है जो रजिस्ट्री की नकल निकाल कर देता है।
9 साल से डटे अधिकारी, फर्जीवाड़े की शोसल मीडिया पर भी पुष्टि
आम नागरिकों से जटिल प्रक्रिया की आड़ में कई जा रही लूट पाट को जब सांझवीर टाईम्स ने उजागर करना शुरू किया तो लोगों की प्रतिक्रिया भी सामने आनी शुरू हो गई है। कोई इसे कमीशन से जोड़ रहा है तो कोई कड़ी कार्यवाही की वकालत कर रहा है। एक फेसबुक यूजर ने इस फर्जीवाड़े के प्रकाशन को एक दम सही मुद्दा करार देकर साधुवाद तक प्रदान कर दिया। इससे साबित होता है कि सर्विस प्रोवाइडरों की आड़ में यह खेल आज कल से नहीं बल्कि वर्षों से खेला जा रहा है। बताया जा रहा है कि इस खेल के माहिर खिलाड़ी आंखों में धूल झोंककर पिछले 9 सालों से अदृश्य रूप से अपनी दुकानदारी चला रहे हैं।
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