Betul News: खंडहर होने लगा 4 करोड़ की लागत से बना ट्रामा सेंटर भवन

टूटने लगे खिडक़ी-दरवाजे, जगह-जगह से झड़ रहा प्लास्टर

Betul News: बैतूल (सांझवीर टाईम्स)। जिला अस्पताल परिसर में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बना 50 बिस्तरीय ट्रामा सेंटर भवन अब लापरवाही और देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील होने की कगार पर पहुंच गया है। कभी आपातकालीन सेवाओं के लिए आधुनिक सुविधा के रूप में देखा जाने वाला यह भवन अब जर्जर हालत में खड़ा है।

यहां लगे खिडक़ी-दरवाजे टूटने लगे हैं और दीवारों से प्लास्टर झडऩे लगा है। यदि जल्द मरम्मत और उपयोग की ठोस योजना नहीं बनी तो आने वाले कुछ वर्षों में यह करोड़ों की संपत्ति पूरी तरह बेकार हो सकती है।

जानकारी के अनुसार इस ट्रामा सेंटर भवन का लगभग 4 करोड़ की लागत से निर्माण कार्य हुआ है। वर्ष 2016 में पूरा हुआ था और 27 नवंबर 2016 को इसका विधिवत लोकार्पण किया गया था। शुरुआत में यहां ऑर्थोपेडिक वार्ड संचालित होता था, जहां सडक़ दुर्घटनाओं और हड्डी टूटने जैसे मामलों का इलाज किया जाता था।

इसके अलावा प्रथम तल पर मातृ एवं शिशु देखभाल से जुड़ा मेटरनिटी वार्ड भी कुछ समय तक संचालित रहा। समय के साथ अस्पताल परिसर में नए भवनों का निर्माण हुआ और सुविधाओं का स्थानांतरण शुरू हो गया।

नए अस्पताल भवन में मेटरनिटी वार्ड को शिफ्ट कर दिया गया, जबकि कुछ ही महीनों बाद ऑर्थोपेडिक वार्ड को भी क्रिटिकल केयर यूनिट में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद से ट्रामा सेंटर भवन का उपयोग सीमित हो गया।

सिटी स्केन सेंटर हो रहा संचालित

वर्तमान में इस भवन में केवल कुछ ही सेवाएं संचालित हो रही हैं, जिनमें सिटी स्कैन, एक्स-रे और जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र से संबंधित कार्यालय तथा जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यालय शामिल हैं। बाकी अधिकांश हिस्से खाली पड़े हैं। लगातार उपयोग और रखरखाव के अभाव के कारण भवन की हालत तेजी से खराब होती जा रही है।

कई कमरों में दरवाजे-खिड़कियां टूट चुकी हैं और दीवारों में दरारें स्पष्ट दिखाई देने लगी हैं। स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के कुछ कर्मचारियों का कहना है कि भवन के बड़े हिस्से का उपयोग नहीं होने से यह परिसर असुरक्षित और अस्वच्छ होता जा रहा है। समय रहते यदि मरम्मत और पुन: उपयोग की योजना नहीं बनाई गई तो यह करोड़ों की सरकारी संपत्ति पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।

ट्रामा सेंटर को शिफ्ट करने का कोई औचित्य नहीं

उधर, ट्रामा सेंटर से ऑर्थोपेडिक वार्ड को क्रिटिकल केयर भवन में स्थानांतरित किए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों और कुछ स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि इस शिफ्टिंग का कोई स्पष्ट औचित्य नहीं था। केवल भवन बदला गया है, जबकि सुविधाएं पहले जैसी ही हैं। क्रिटिकल केयर यूनिट, जिसे गंभीर मरीजों के उपचार के लिए विकसित किया गया था, वहां अब सामान्य हड्डी रोगियों का इलाज हो रहा है।

इससे न केवल उस भवन के मूल उद्देश्य पर सवाल उठ रहे हैं, बल्कि ट्रामा सेंटर भवन भी उपयोगहीन होकर धीरे-धीरे जर्जर होता जा रहा है। यदि समय रहते प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया तो आने वाले वर्षों में यह भवन पूरी तरह खंडहर में बदल सकता है, जिससे सरकारी धन की बड़ी बर्बादी मानी जाएगी। इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. जगदीश घोरे को उनके मोबाईल नंबर 9425636311 पर संपर्क किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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