Politics: राजनीतिक हलचल: पेविंग ब्लाक भुगतान को लेकर नेताओं में कैसे ठनी??सामाजिक कार्यक्रम में जिला प्रमुख का यह कैसा रुख???किस पार्टी के और विकेट गिराने की तैयारी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कालम राजनीतिक हलचल में……..

पेविंग ब्लाक भुगतान को लेकर नेताओं में ठनी
शहर की राजनीति एक बार फिर तेज तड़के के साथ गरमा गई है। मामला पेविंग ब्लाक भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है। चर्चा है कि पिछले 6 माह से एक वरिष्ठ पार्षद का पेविंग ब्लाक का भुगतान पार्टी बदलकर आए नेताओं ने नहीं किया है। चर्चा है कि वरिष्ठ पार्षद पेविंग ब्लाक के भुगतान के लिए जब भी पाला बदलकर आए नेताओं और उनके पुत्रों को करते हैं तो मोबाइल तक रिसीव नहीं किए जा रहे हैं।
एक सड़क निर्माण में पेविंग ब्लाक लगाकर नेता जी ने ठेका लिया था, लेकिन उन्हें अब तक भुगतान नहीं मिला है। इसी वजह पेविंग ब्लाक बनाने वाले वरिष्ठ पार्षद को भुगतान न होने की दुहाई दी जा रही है। राजनीति गलियारों में इस भुगतान को लेकर जमकर चर्चा चल रही है। आश्वासन की राजनीति पर 6 माह निकल जाने के बाद दोनों पक्ष भुगतान देने और न देने को लेकर अपना-अपना दुखड़ा लोगों को सुना रहे हैं, लेकिन शहर के चौक चौराहों पर यह मामला जमकर सुर्खिया बटोर रहा है।
सामाजिक कार्यक्रम में जिला प्रमुख का यह कैसा रूख?
एक सामाजिक सामूहिक कार्यक्रम उस समय राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया, जब विपक्ष के एक जिला प्रमुख कार्यक्रम में तो पहुंचे, लेकिन उनका रवैया काफी नाराजगी भरा और दूरी भरा नजर आया। मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह बात तेजी से चर्चा में आ गई कि कार्यक्रम के आमंत्रण कार्ड में उनका नाम शामिल नहीं था, इसके चलते माहौल पहले से ही थोड़ा असहज माना जा रहा था।
चर्चा है कि संबंधित नेता अपने समर्थक औए समाज के पिता-पुत्र नेता के आग्रह पर कार्यक्रम में पहुंचे थे, लेकिन मंच और भीड़ के बीच उनका व्यवहार अपेक्षाकृत औपचारिक और ठंडा दिखाई दिया। चर्चाओं के मुताबिक उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद भाजपा के जनप्रतिनिधियों से सामान्य अभिवादन हैलो-हाय तक से परहेज किया, जिसे कई लोगों ने नोटिस किया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच इस व्यवहार को लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक दूरी का संकेत माना, तो कुछ ने इसे व्यक्तिगत असंतोष बताया। वहीं सोशल चर्चाओं में इसे लेकर हल्के-फुल्के तंज भी कसे जाने लगे और कुछ लोगों ने इसे अहंकार से जोड़कर भी चर्चा शुरू कर दी। हालांकि राजनीतिक जानकार इसे अलग नजरिए से देख रहे हैं।
उनका कहना है कि स्थानीय राजनीति में कई बार मंच साझा करने के बावजूद नेताओं के बीच अनकहे मतभेद और पुरानी राजनीतिक खींचतान सामने आ ही जाती है, जो ऐसे मौकों पर व्यवहार में झलक जाती है। इस पूरे घटनाक्रम पर किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन सामाजिक कार्यक्रम अब राजनीतिक संकेतों के कारण नगर में चर्चा का विषय बन गया है।
और भी विकेट गिराने की तैयारी
जिले की राजनीति में इन दिनों क्रिकेट मैच के आखिरी ओवर जैसी स्थिति बनी हुई है, जहां हर गेंद पर विकेट गिरने की आशंका जताई जा रही है। पिछले दिनों एक बड़ी राजनीतिक हलचल उस समय देखने को मिली जब एक पार्टी के प्रदेश प्रमुख की मौजूदगी में नगर पालिका अध्यक्ष द्वारा विपक्षी खेमे से अलग होकर दूसरी पार्टी की सदस्यता लेने की चर्चा ने राजनीतिक गलियारों में गर्मी बढ़ा दी।
इस घटनाक्रम को जहां सत्ता पक्ष अपने लिए एक मजबूत बढ़त के रूप में देख रहा है, वहीं विपक्ष इसे ज्यादा तवज्जो न देने की बात कह रहा है। विपक्षी खेमे का तर्क है कि संबंधित नपा अध्यक्ष की वापसी से जमीनी स्तर पर कोई बड़ा राजनीतिक फर्क नहीं पड़ेगा। हालांकि, बयानबाज़ी के बीच अंदरखाने की कहानी कुछ और ही बताई जा रही है। सूत्रों और राजनीतिक चर्चाओं की मानें तो यह भी संभावना जताई जा रही है कि यह पाला परिवर्तन केवल शुरुआत भर हो सकता है।
नगर की राजनीति में यह सुगबुगाहट तेजी से फैल रही है कि संबंधित नपा अध्यक्ष अपने साथ कुछ अन्य पार्षदों को भी नए राजनीतिक खेमे में ला सकती हैं। यदि ऐसा होता है तो नगर की सियासी गणित पूरी तरह बदल सकती है।
राजनीतिक जानकार इसे धीरे-धीरे बनते बड़े सियासी समीकरण के तौर पर देख रहे हैं, जहां एक-एक कदम आगे चलकर पूरी रणनीति का आकार बदल सकता है। वहीं कुछ लोग इसे आगामी चुनावों से पहले शक्ति प्रदर्शन की तैयारी भी मान रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी भी स्तर पर आधिकारिक तौर पर इस तरह के विस्तार या नए पाले में जाने को लेकर स्पष्ट पुष्टि सामने नहीं आई है, लेकिन चर्चाओं का बाजार गर्म है और हर गली-चौराहे पर यही सवाल गूंज रहा है।
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