Betul Samachar: स्कूलों में सन्नाटा, दफ्तरों में शिक्षक, बच्चों के भविष्य से खिलवाड़?

स्कूल छोड़ कार्यालय में बाबूगिरी कर रहे शिक्षक
Betul Samachar: बैतूल। जिले की शासकीय शिक्षा व्यवस्था एक गंभीर विरोधाभास से जूझ रही है। एक ओर ग्रामीण अंचलों के स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी है, वहीं दूसरी ओर जिला शिक्षा विभाग कार्यालय में शिक्षक अटैच कर बैठाए गए हैं। इस स्थिति ने न केवल शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि हजारों विद्यार्थियों के भविष्य को भी संकट में डाल दिया है, खासकर तब जब वार्षिक परीक्षाएं नजदीक हैं। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कुछ चुनिंदा शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों से हटाकर जिला शिक्षा कार्यालय बैतूल में तैनात किया गया है, जहां उनसे शैक्षणिक कार्य की बजाय बाबूगिरी और लिपिकीय काम कराया जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि इन शिक्षकों का वेतन संबंधित स्कूलों से ही आहरित किया जा रहा है, जबकि वे स्कूलों में पढ़ाने के बजाय दफ्तरों में फाइलें संभालते नजर आ रहे हैं।हालांकि अफसर शिक्षको की तैनाती को परीक्षा की तैयारियों से जोड़ रहे हैं। और भरोसा दिया जा रहा है कि, परीक्षाओं के बाद इन शिक्षकों को मूल पदस्थापना पर रवाना कर दिया जाएगा।
आधा दर्जन शिक्षक बाबू की निभा रहे भूमिका
जानकारी के अनुसार ऋषि त्रिवेदी (उच्च माध्यमिक विद्यालय जींन), आशीष तमाड़कर (उच्च माध्यमिक विद्यालय बारवीं), समीर श्रीवास (महदगांव), सिंधिया बर्डे (हिवरखेड़ी), विनीत मगरदे (रोढ़ा) और संगीता मरकाम (बोरगांव) जैसे शिक्षकों को उनके मूल पदस्थापना स्थल से हटाकर कार्यालय में अटैच किया गया है। इससे इन स्कूलों में शिक्षकों की संख्या और कम हो गई है, जिसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल पहले से ही संसाधनों और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। कई विद्यालयों में विषय शिक्षक उपलब्ध नहीं होने से नियमित कक्षाएं नहीं लग पा रही हैं।
प्रायवेट ट्यूशन पढ़ाने पालक हो रहे मजबूर
इस सम्बंध में अभिभावकों का कहना है कि परीक्षा के समय बच्चों को अतिरिक्त मार्गदर्शन और पुनरावृत्ति की आवश्यकता होती है, लेकिन शिक्षक न होने के कारण पढ़ाई बाधित हो रही है। मजबूरी में कई परिवार बच्चों को निजी ट्यूशन के लिए भेज रहे हैं, जिससे आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। शिक्षा से जुड़े संगठनों का कहना है कि सरकारी नियमों के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति कक्षा शिक्षण के लिए की जाती है, न कि कार्यालयी कामकाज के लिए। यदि विभाग को प्रशासनिक कार्य के लिए स्टाफ की आवश्यकता है तो उसके लिए अलग से लिपिक या कर्मचारी नियुक्त किए जाएं।
शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर दफ्तरों में बैठाना नीतियों के खिलाफ है और यह बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन भी है। अभिभावकों और शिक्षा संगठनों ने जिला प्रशासन और उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। अब सवाल यह है कि क्या जिला शिक्षा विभाग समय रहते चेत जाएगा और शिक्षकों को फिर से स्कूलों में भेजेगा, या फिर बच्चों का भविष्य दफ्तरों की फाइलों में ही उलझा रह जाएगा।
इनका कहना….
परीक्षा की तैयारियों को लेकर शिक्षको की सहायता ली जा रही है, परीक्षा के बाद इन्हें मूल पदस्थापना पर भेज दिया जाएगा।
भूपेंद्र वरकड़े, प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी बैतूल




