Betul Ki Khabar: बैतूल में भी इंदौर जैसे हादसे से इंकार नहीं

नालों में सिवरेज का पानी पाइप लाइन के वाल्व से सटे, इंदौर हादसे के बाद भी नहीं चेती नपा
Betul Ki Khabar: बैतूल। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में पीने के पानी की लाइन में सीवरेज का पानी की चपेट में आने से 15 लोगों की मौत का मामला इन दिनों सुर्खियां बटोर रहा है। इसके बाद मुख्यमंत्री ने सभी नगर निगमों के महापौर और निगमायुक्त को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
हालांकि नगरपालिका को इस संबंध में अब तक कोई निर्देश नहीं मिले हैं, लेकिन सांझवीर की पड़ताल में सामने आया है कि ताप्ती बैराज से शहर की करीब 11 टंकियों के लिए बिछाई गई अंडरग्राउंड- ओपन पाइप लाइन इंदौर की तरह बैतूल में भी हादसा कर सकती है। कुछ जगह ऐसी है, जहां सीवरेज का पानी मुख्य पाइप लाइन के वाल्व से सटा हुआ है। यदि वाल्व में लीकेज आया और सीवरेज का पानी पाइप लाइन में घुसा तो तय है कि इंदौर जैसा हादसा बैतूल में भी हो जाएगा।
यदि इसका उदाहरण देखना है तो नपा के अधिकारियों को खुद शहर के नालों से होकर गई मुख्य और सप्लाई वाली पाइप लाइन का निरीक्षण करना सतत आवश्यक है। सांझवीर ने इंदौर में हुए हादसे के बाद शहर के कुछ स्थानों पर जो हालात देखे, यह चौकाने वाले थे। दरअसल कालेज चौक पर ही दो जगह ऐसे हालात दिखाई दिए जहां सीवरेज का पानी किसी भी समय वाल्व में लीकेज होने पर पाइप लाइन में जा सकता है।
परशुराम चौक के सौंदर्यीकरण के बाद नाले में एक बड़ा पाइप डालकर सीवरेज का पानी बारिश में निकलता है। यही पर केवल बीस मीटर की दूरी पर मुख्य पाइप लाइन का बड़ा वाल्व लगा है। यदि इसमें जरा सा भी लीकेज आया तो इसका पानी मुख्य पाइन लाइन में मिलने से इंकार नहीं किया जा सकता। इसी तरह कालेज की पुलिया के पास भी पाइप लाइन के पास से नाले का पानी जा रहा है।

इसके अलावा शहर के एक दर्जन ऐसे नाले हैं जिसके पास से होकर मुख्य पाइप लाइन और सीवरेज बिलकुल सटे हुए हैं। इतना होने के बावजूद नपा की जलशाखा ने सीवरेज का पानी मुख्य पाइप लाइन में जाने को लेकर सतर्कता नहीं बरती तो इसका खामियाजा किसी भी समय लोगों को भुगतना पड़ सकता है। शहर के नागरिकों को भारी भरकम जल शुल्क वसूला जा रहा है, लेकिन इंदौर हादसे के बाद बैतूल नपा बिलकुल अलर्ट नहीं हो पाई है।
इधर नगरपालिका जिन टंकियों के माध्यम से पूरे शहर में पानी की आपूर्ति करती है, उनकी सफाई वर्ष में मात्र दो बार ही की जाती है। अधिकारियों का दावा है कि यह सफाई पर्याप्त है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे कोसों दूर नजर आती है। कई वार्डवासियों का कहना है कि सप्लाई किया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं होता।
विशेषकर बरसात और सर्दियों के मौसम में मटमैला पानी आने की शिकायतें बढ़ जाती हैं। हाल ही में इंदौर में दूषित पानी पीने से 15 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग बीमार हुए हैं। इस घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इंदौर में भी पहले लोगों ने गंदा पानी आने की शिकायतें की थीं, लेकिन नगर निगम के अधिकारियों ने समय रहते गंभीरता नहीं दिखाई। परिणामस्वरूप यह लापरवाही जानलेवा साबित हुई। अब यह मामला पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इंदौर की घटना से भी सबक नहीं
चौकाने वाली बात यह है कि बैतूल नगर पालिका को भी इंदौर की घटना से सबक नहीं लिया है। यदि समय रहते जलप्रदाय व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यहां भी ऐसी किसी अप्रिय घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। शहर की बड़ी आबादी पीने के पानी के लिए पूरी तरह नगर पालिका पर निर्भर है। ऐसे में पानी की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
जानकारी के अनुसार बैतूल शहर में कुल 33 वार्ड हैं। इन सभी वार्डों में नगर पालिका द्वारा 9 पानी की टंकियों के माध्यम से सप्लाई की जाती है। इन टंकियों को प्रतिदिन भरा जाता है और सीधे घरों तक पानी पहुंचाया जाता है। नगर पालिका का कहना है कि पानी को फिल्टर प्लांट में शुद्ध करने के बाद ही सप्लाई किया जाता है, लेकिन पाइपलाइन लीकेज के कारण कई जगहों पर दूषित पानी घरों तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है।
हर महीने दर्जनभर से अधिक शिकायतें
नगर पालिका कार्यालय में पानी की सप्लाई ठीक नहीं होने, पाइपलाइन फूटने, गंदा पानी आने जैसी 12 से 15 शिकायतें प्रतिमाह दर्ज होती हैं। इसके बावजूद इनका समय पर समाधान नहीं हो पाता। कई नागरिकों का कहना है कि शिकायत दर्ज कराने के बाद भी समस्या कई दिनों तक बनी रहती है। थोड़ी सी भी लापरवाही लोगों के स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकती है।
नागरिकों की मांग है कि पानी की टंकियों की नियमित और गहन सफाई कराई जाए, पाइपलाइन लीकेज को तुरंत दुरुस्त किया जाए और पानी की गुणवत्ता की नियमित जांच हो। इंदौर की घटना एक चेतावनी है, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। अब जरूरत है कि बैतूल नगर पालिका सतर्कता दिखाए और जनता को शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराए।
इनका कहना…
सीवरेज का पानी और पाइप लाइन का वाल्व पास है तो इसको लेकर निरीक्षण करेंगे। पानी की ठंकियों की वर्ष में दो बार सफाई होती है जहां से भी लिकेज और मटमेले पानी की शिकायते आती है उसे तत्काल दुरूस्त किया जाता है।
धीरेन्द्र राठौर, जल शाखा प्रभारी, नपा बैतूल




