Betul Samachar : एक तुगलकी फरमान से दर्जनों शिक्षकों के भविष्य पर लटकी तलवार

चयन पात्रता परीक्षा पास करने के बाद फंसाया बीएड का पेंच
Betul Samachar : बैतूल। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा विभिन्न विषयों को पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया चलाई जा रही है। इसमें कोटे के आधार पर अतिथि शिक्षकों का चयन भी किया जा रहा है, लेकिन चयन पात्रता में एक मौखिक शर्त जोड़ दी गई है कि विभाग द्वारा चाहे गए संबंधित विषयों में ही बीएड होना चाहिए उन्हीं का चयन किया जाएगा, लेकिन जिन लोगों का स्नातक में विषय अलग था और बीएड दूसरे विषय से किया है तो वह पात्र नहीं माना जाएगा।
इसी आधार पर कई शिक्षकों को बाहर करना तय माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि अभी तक दर्जनों शिक्षक इसकी जद में आ चुके हैं। अब शिक्षकों का कहना है हमने पढ़ाई कर बीएड की परीक्षा पास की है। पढ़ाने का भी अनुभव, लेकिन इस तुगलकी फरमान से नुकसान हो रहा है। गौरतलब है कि व्यापमं परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों के सत्यापन अंतिम चरणों में हैं। जिन लोगों ने 2018 व 2023 की प्राथमिक व माध्यमिक शिक्षक व्यापमं परीक्षा पास की है। अब उन चयनित अभ्यर्थियों के विषयवार चयन परीक्षा के भौतिक दस्तावेजों का सत्यापन का कार्य चल रहा है।
विरोध कर रहे शिक्षक बोले-दो बार व्यापमं परीक्षा पास की है
मंगलवार और बुधवार को दो दिन ऐसे अभ्यर्थियों ने जमकर विरोध किया और लोक शिक्षण संचालनालय के अधिकारियों से मुलाकात भी की है। ऐसे ही कुछ शिक्षकों ने बताया कि हम लोग ग्रेजुएशन कर चुके हैं। बीएड हैं। 5 से 10 साल से शासकीय स्कूलों में पढ़ा रहे हैं। दो बार व्यापामं परीक्षा पास कर चुके हैं, लेकिन हम लोगों के दस्तावेज स्वीकार नहीं कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमें आदेश हैं कि संबंधित विषय में जो बीएड है, उनके ही दस्तावेज लेना है, शेष के नहीं। हम लोगों के दस्तावेज एक तरह से निरस्त ही माने जा रहे हैं।
सत्यापन कर संचालनालय भेजे जाएंगे दस्तावेज
इस मामले को जिला शिक्षा अधिकारी अनिल कुशवाह से संपर्क किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया। वहीं स्थिति स्पष्ट करते योजना अधिकारी सुबोध शर्मा ने बताया कि स्नातक और बीएड अलग विषयों में करने वाले शिक्षकों के आवेदन लेने या सत्यापन ना करने जैसी कोई बात नहीं है। ऐसे शिक्षकों के प्रकरण भी संचालनालय भेजे जाएंगे। ऐसे प्रकरण होल्ड की श्रेणी में माने जाते हैं। इन प्रकरणों के निराकरण के लिए बाकायदा कमेटी का गठन किया जाएगा। संभावना है कि ऐसे शिक्षकों को साल छह महीने का समय दे दिया जाए ताकि वह नियम के मुताबिक चयन में खरे उतर सकें। फिलहाल संचालनालय के इस आदेश ने उन शिक्षकों की नींद जरूर उड़ा दी है। जिन्होंने पूरी मेहनत और अथक परिश्रम कर अपने आप को इस लायक बना लिया था कि उनकी भी सरकारी नौकरी लग जाए, परन्तु अब इनके चेहरों पर मायूसी साफ नजर आने लगी है।
इनका कहना…
ऐसे प्रकरण संचालनालय भेजे जाएंगे। गठित कमेटी द्वारा इसका निराकरण किया जाएगा। संभव है कि अभ्यर्थियों को इसके लिए समय भी दिया जा सकता है।
सुबोध शर्मा, योजना अधिकारी शिक्षा विभाग, बैतूल




