Betul News: वर्षों से एक ही छात्रावास में अंगद के पैर की भाति जमे अधीक्षक

केंद्रीय मंत्री के निर्देशों की भी हवा निकली, कैसे सुधरेंगी स्थिति?
Betul News: बैतूल। जिले में छात्रावासों की स्थिति को बिगाड़ने के लिए अधीक्षकों को जि मेदार कहा जा सकता है। इन्हीं के जि मे पूरे छात्रावास की व्यवस्था होती है, लेकिन लंबे समय से एक ही छात्रावास में जमे होने के कारण ध्यान नहीं दे पाने के कारण स्थिति लगातार बिगड़ रही है। चौकाने वाली बात यह है कि आदिवासी मामलों के केंद्रीय राज्य मंत्री और स्थानीय सांसद दुर्गादास उईके ने पिछले दिनों भैंसदेही के एक कार्यक्रम में अजाक के अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि लंबे समय से जमे अधीक्षकों को तत्काल हटाया जाए, लेकिन दो माह बीतने के बाद उनके आदेश का पालन नहीं हुआ। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधीक्षकों पर विभागीय अधिकारियों की कितनी मेहरबानी है।
आए दिनों छात्रावासों में अव्यवस्था के मामले सामने आ रहे हैं। ऐसे मामले भी केवल सिर के ऊपर से पानी जाने के बाद पीड़ित छात्र-छात्राओं के मोर्चा खोलने के बाद उजागर हो रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि प्रबंधन के डर से कई छात्रावासों में विद्यार्थी आवाज बुलंद नहीं कर पा रहे हैं, इसी वजह से छात्रावासों में रहकर पढ़ाई करने के लिए विद्यार्थी मिलने वाली सुविधाओं को ही मजबूरी में अपना रहे। आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत आने वाले छात्रावासों को मनमाना बजट आवंटित होता है लेकिन विद्यार्थियों को सुविधाएं दिए जाने के नाम पर केवल दिखावा किया जा रहा है।
छात्रावास अधीक्षकों का बाल भी बांका नहीं
जिले में चौंकाने वाला पहलू यह है कि अधिकांश छात्रावासों में नियम विरूद्ध अधीक्षकों की नियुक्ति की गई है, इसमें कई तो ऐसे हैं जो अधीक्षकों के लिए बिल्कुल पात्र नहीं हैं, लेकिन इन्हें प्रभार सौंपकर अजाक के अधिकारियों ने पॉवरफुल कर दिया है। पूर्व में प्रभारी मंत्री की मौजूदगी में भी लंबे समय से जमे अधीक्षकों का मामला जोर शोर से उठा था, तब तत्कालीन सहायक आयुक्त ने केवल फाइल टेबल पर बुलाई, लेकिन अधीक्षकों को हटाने की जहमत नहीं उठाई।
दो माह पहले केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उईके ने भैंसदेही के एक कार्यक्रम में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की शिकायत के बाद मंच से ही अजाक के अधिकारियों को स त निर्देश दिए थे कि जिले में लंबे समय से जमे अधीक्षकों को तत्काल हटाकर उन्हें जानकारी दी जाए, लेकिन उनके निर्देशों को अजाक के अधिकारियों ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब केंद्रीय मंत्री के आदेशों की अवहेलना हो रही है तो फिर अजाक में किस तरह की भर्राशाही चल रही है।
एक ही दुकान से किराना, अन्य सामग्री
यह भी जांच का विषय हो सकता है कि लंबे समय से जमे छात्रावास अधीक्षकों द्वारा विद्यार्थियों को दो टाइम का अच्छा भोजन उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है, लेकिन किराना सामग्री वाले दुकानदार को ब्रांडेेंड कंपनी के बिल का भुगतान किया जा रहा है। वर्षों से एक ही फर्म को किराना सामग्री का भुगतान करना भी जांच का विषय हो सकता है। इसके अलावा छात्रावासों में लगने वाली अन्य सामग्री भी वर्षों से उन्हीं फार्मों से खरीदी जा रही है जो छात्रावास अधीक्षकों के करीबी है। इस मामले में जिले के जनप्रतिनिधि और अधिकारी जांच कराए तो दूध का दूध, पानी का पानी हो जाएगा।
इनका कहना
मैं अभी एक सप्ताह के अवकाश पर हूं। कार्यालय में चौहान और जैन से जानकारी ले सकते हैं। केंद्रीय मंत्री ने क्या निर्देश दिए थे इसकी जानकारी मुझे नहीं है।
विवेक पांडे, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास विभाग बैतूल।




