Betul Samachar: फर्जी खातों की सूची जेब में, निर्देश मिलते ही बोर्ड पर चलने लगती हैं उंगलियां

Betul News: List of fake accounts in pocket, fingers start moving on the board as soon as instructions are received

10 से 20 प्रतिशत शुल्क पर किया जा रहा फर्जीवाड़ा, आपरेटरों की बोल रही तूती

Betul Samachar: बैतूल। शासन की योजनाओं में चल रहे डिजिटल कामकाज के बीच साइबर फर्जीवाड़ा किस तेजी से पांव पसार रहा है। इसके उदाहरण भी जिले में हुए करोड़ों के फर्जी लेनदेन में सामने आ चुके हैं। सांझवीर टाईम्स ने जब इसकी पड़ताल की तो कई चौकाने वाली जानकारी सामने आई हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ सरकारी विभागों में बैठे ऑपरेटरों के पास सैकड़ों की संख्या में बैंक खाता धारकों की सूची पहले से ही तैयार रहती है। जैसे ही किसी योजना या पोर्टल पर नया भुगतान शुरू होता है तुरंत उनके हाथ की उंगलियां की-बोर्ड पर दौड़ने लगती हैं और कुछ ही मिनटों में वास्तविक लाभार्थियों के साथ फर्जी खातों में राशि ट्रांसफर कर दी जाती है। इसका पूरा हिसाब-किताब रखा जाता है। जिस फर्जी खाते में राशि ट्रांसफर की जाती है, उसकी बकायदा सूची बनाकर वसूली कर ली जाती है। सूत्र बताते हैं कि जिन खाता धारकों के खातों में राशि डाली जाती है, उसका कुछ हिस्सा खाता धारक को दे दिया जाता है।

हींग लगे ना फिटकरी, रंग भी चोखा

सरकारी विभागों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक बजट के विभागों में पदस्थ ऑपरेटर 100 से 150 फर्जी बैंक खाता धारकों की सूची मय खाता नम्बर अपनी जेब में रखकर घूमते हैं। यह खाता धारक करीबी और जान पहचान वाले ही होते हैं। जैसे ही आपरेटरों को ऊपर से हरी झंडी मिलती है। आपरेटरों की सूची बाहर और कि बोर्ड पर उंगलियां चलनी शुरू हो जाती हैं। जिन फर्जी खातों के उपयोग किया जाता है, उन्हें खाते में डाली रकम की 10 से 20 प्रतिशत राशि सेवा शुल्क के रूप में दे दी जाती है। यानी कि हींग लगे ना फिटकरी रंग चोखा। सूत्रों की माने तो कई बार यह फर्जी खाते एक ही मोबाइल नंबर, बैंक खाते या पहचान पत्र से भी लिंक किए जाते हैं ताकि जांच में आसानी से बचा जा सके।

कड़ी निगरानी और सुधार की जरूरत

ऐसे फर्जी मामलों में सबसे बड़ा नुकसान उन गरीब और ग्रामीण लाभार्थियों को हो रहा है जो शासकीय योजनाओं की जानकारी के अभाव में असली लाभ से वंचित रह जाते हैं। वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारी भी कई बार इन तकनीकी गड़बड़ियों या सेटिंग के चलते जांच तक सीमित रह जाते हैं। शिकायतें तो कई बार पहुंचती हैं, लेकिन जांच का नतीजा ठंडे बस्ते में चला जाता है, जो अभी तक होता आया है ।

जानकारों का मनाना है कि यदि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निगरानी प्रणाली को मजबूत किया जाए, तो इस तरह के फर्जीवाड़े पर रोक लग सकती है। फिलहाल, जिस तरह के फर्जीवाड़े सामने आ चुके हैं, उससे यह साबित हो रहा है कि कई सरकारी विभागों में इस फर्जी वाड़े के जाल का फैलाव इतना बड़ा हो गया है कि कुछ ऑपरेटर खुद को प्रभावशाली व्यक्ति समझने लगे हैं। उनके इशारे पर ही तय होता है कि कौन सा नाम लाभार्थी सूची में जाएगा और कौन बाहर रह जाएगा। यह स्थिति शासन की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर रही है और तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग कर रही है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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