Betul News: सरकारी खजाने से अफसरों की सैर सपाटा!

Betul News: Officers' trip from the government treasury!

वन विभाग में निजी कामों में भी सरकारी ईंधन से सैकड़ों किमी चल रहे वाहन, अधिकारियों की चुप्पी पर सवाल

Betul News: बैतूल। जिले में पदस्थ कई अधिकारी इन दिनों सरकारी संसाधनों का खुलकर दुरुपयोग कर रहे हैं। शासन द्वारा सीमित उपयोग के निर्देशों के बावजूद अधिकारी सरकारी वाहनों का इस्तेमाल निजी कार्यों और पारिवारिक कार्यक्रमों के लिए बेझिझक कर रहे हैं। खास तौर पर वाहनों का बेजा उपयोग सबसे ज्यादा वन विभाग में देखा जा रहा है, जहां नियम विरुद्ध तरीके से लग्जरी वाहनों का सबसे ज्यादा मजा सैर-सपाटे के लिए किया जा रहा है। इन वाहनों में सरकारी ईंधन डलवाकर अधिकारी सैकड़ों किलोमीटर की यात्राएं कर रहे हैं, जिससे सरकारी खजाने पर भारी बोझ पड़ रहा है। गौरतलब है कि एक तरफ शासन स्तर पर सरकारी खर्चों में कटौती की बात की जा रही है तो दूसरी तरफ अफसर हैं कि, वीक एंड आते ही सरकारी वाहन लेकर या तो गृह क्षेत्र पहुंच रहे या फिर सैर सपाटे का मजा लिया जा रहा है।

सरकारी खाते से कट रही ईंधन की पर्चियां, ड्यूटी के नाम पर चालक भी साथ

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वन विभाग के उच्च अधिकारियों से लेकर रेंज स्तर के अधिकारी अपने रिश्तेदारों से मिलने, विवाह में शामिल होने या छुट्टी के दिनों में घूमने तक के लिए सरकारी वाहन का प्रयोग कर रहे हैं। जबकि नियम के मुताबिक सरकारी वाहन का उपयोग केवल ऑन ड्यूटी ही किया जा सकता है। निजी काम के लिए अधिकारियों को अपने स्वयं के निजी वाहन का ही उपयोग करना है, लेकिन अधिकारी बेख़ौफ निजी उपयोग के लिए सरकारी धन को स्वयं का समझ शासन को चूना लगा रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि वाहन चालक को भी सरकारी ड्यूटी के नाम पर साथ ले जाया जाता है, ताकि खर्च का रिकॉर्ड बन सके औऱ ईंधन की पर्चियां सरकारी खाते से काटी जाती हैं और यह पूरा खेल खुलेआम बिना किसी रोक-टोक के चल रहा है।

सरकारी डीजल, पेट्रोल की बर्बादी, चालकों का भी शोषण

सरकारी नियमों के अनुसार, अधिकारी केवल दफ्तर से फील्ड भ्रमण या शासकीय कार्यों के लिए ही वाहन का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन सूत्र बताते हैं कि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। सरकारी वाहन अवकाश के दिनों में भी सड़कों पर सरपट दौड़ते नजर आते हैं, जबकि इसके एवज में चालक को ओवरटाइम भत्ता भी नहीं मिलता है। उन्हें तो केवल अधिकारी के फरमान का पालन करना पड़ता है। नतीजतन न केवल सरकारी पेट्रोल-डीजल की बर्बादी हो रही है, बल्कि चालकों का भी शोषण होना साफ नजर आ रहा है।

उच्च अधिकारियों की चुप्पी पर कई सवाल

सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी तो अपने परिवार को रेलवे स्टेशन या एयरपोर्ट छोड़ने तक के लिए भी सरकारी वाहन का ही इस्तेमाल करते हैं। वहीं कई वाहन ग्रामीण क्षेत्रों के निरीक्षण के नाम पर निजी कार्यक्रमों तक जाते हैं। विभागीय स्तर पर निगरानी के अभाव और उच्चाधिकारियों की चुप्पी से यह प्रवृत्ति और बढ़ती जा रही है और गम्भीर सवाल खड़े कर रही है। आम आदमी को सरकारी सेवाओं के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं, वहीं अधिकारी सरकारी संसाधनों को निजी सुख-सुविधा का माध्यम बना रहे हैं।

यदि इस पर शीघ्र अंकुश नहीं लगाया गया तो सरकारी खजाने पर इसी तरह हर महीने लाखों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ना तय है। अब देखना यह है कि विभाग के उच्च अधिकारी इस मामले में संज्ञान लेकर कार्रवाई करते हैं या नहीं। आम जनता की नजरें अब जवाबदेही तय करने वाले अफसरों पर टिकी हैं, ताकि सरकारी संपत्ति को निजी ऐश का जरिया बनने से रोका जा सके।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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