Politics: राजनीतिक हलचल: सोशल मीडिया पर व्यूवर्स कम होने पर किस अध्यक्ष की चिंता बढ़ी?? मंडल अध्यक्ष के नाम के लिए किस निष्काषित नेता की सिफारिश को मिली तवज्जो??? मौका परस्तों को तवज्जो मिलने से कौनसे नेताजी का छलका दुख???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

सोशल मीडिया पोस्ट पर व्यूअर्स कम होने पर नेताजी की चिंता
एक विपक्षी पार्टी के जिला अध्यक्ष खासे चिंतित दिखाई दे रहे हैं। दरअसल उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर दो अलग-अलग साइट बनाई है। हर पोस्ट पर बमुश्किल 100 या इससे नीचे के व्यूअर्स के कमेंट्स आने से नेताजी खासे परेशान हो गए हैं। एक दिन में उनके विभिन्न कार्यक्रमों की पोस्ट सोशल मीडिया पर डालने के लिए टीम तैनात की गई है। इन पर खूब पैसा खर्च किया जा रहा है, लेकिन उतना रिस्पांस नहीं मिलने से पिछले दिनों इस टीम पर खूब लाल पीले हुए। उन्होंने चेतावनी दी है कि व्यूअर्स बढ़ाने के लिए किसी से संपर्क किया जाए। अपनी पार्टी के कुछ भरोसेमंदों को भी जिला अध्यक्ष ने कहा है कि इसके लिए कोई तरकीब जल्द निकाली जाए।
मंडल अध्यक्ष के लिए किसने की सिफारिश?
देर आए दुरुस्त आए की तर्ज पर जिले के एक सुरक्षित विधानसभा में मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति हो गई। हालांकि जिसे जिम्मा दिया गया है, उसके नाम की किसी को उम्मीद नहीं थी। अब चर्चा चल रही है कि स्थानीय विधायक को भी भ्रम में रखकर क्षेत्र के एक भाजपा नेता की आत्महत्या मामले में पार्टी से निष्कासित चल रहे भारी भरकम नेता ने नाम सुझाया। यह बात पार्टी के ही कई कार्यकर्ता दबी जुबान से करते देखे जा रहे हैं। आरक्षित मंडल अध्यक्ष की मांग, यहां पर लंबे समय से की जा रही है, लेकिन अनसुनी कर सामान्य वर्ग के भाजपा नेता को मंडल अध्यक्ष बनाना किसी के गले नहीं उतर रहा है। यहां पर दावेदारों की सूची लंबी होने के कारण इसे लंबे समय तक होल्ड करना पड़ा था।
मौका परस्तों को तवज्जों मिलने से दुखी नेता
एक पार्टी के जिला अध्यक्ष के पहले खासे सिपाहसलार रहे नेता जी को बिलकुल तवज्जों नहीं मिल रही है। बेचारे नेताजी जिम्मेदारी मिलने के लिए लगातार आस लगाए बैठे हैं, लेकिन छुटभैयों को रेवड़ियों की तरह पद बांट दिए गए और उनका नंबर ही नहीं आया। इससे आहत प्रमुख विपक्षी पार्टी के नेताजी अपने जिला अध्यक्ष को लेकर अब सार्वजनिक रूप से भी तंज कसने लगे हैं। कुछ सोशल मीडिया ग्रुपों पर मौका परस्तों लोगों को तवज्जों मिलने पर कह रहे हैं कि यहां पर असली बादम की जगह मूंगफल्ली को बादाम समझा जा रहा है। हमने तो अच्छा-बुरा देखे बगैर हर आदेश माना और हल्के में लिया जा रहा है। बताते चले कि यह नेताजी किसी समय विपक्षी पार्टी के जिला अध्यक्ष के मीडिया से जुड़े एक संस्थान में घंटों रणनीति पर चर्चा कर गप्पे लड़ाते थे।




