Betul Samachar: गबन के आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने में लेटलतीफी क्यों?

Betul News: Why is there a delay in confiscating the property of those accused of embezzlement?

पहले किया दावा, अब एसआईटी प्रमुख जानकारी देने में कतरा रहे

Betul Samachar: बैतूल। चार माह बाद पुलिस ने चिचोली जनपद में हुए 13 करोड़ 21 लाख के घोटाले में दो आरोपियों को पकड़कर खूब वाहवाही लूटी। हालांकि पुलिस को इसके लिए जितनी शाबासी मिलना था, वह नहीं मिल पाई। दरअसल करोड़ों का गबन करने वाले मुख्य आरोपी ब्लाक समन्वयक राजेंद्र परिहार, कंप्यूटर आपरेटर सुमित सोनी और एक अन्य पर शिंकजा नहीं कसा गया।

दस दिन पहले पुलिस ने प्रेसनोट जारी कर दावा किया था कि शेष आरोपियों की संपत्ति कुर्क कर दी जाएगी, लेकिर आज तक प्रक्रिया कितनी आगे बढ़ी बताने से इंकार किया जा रहा है। इसी वजह एसआईटी प्रभारी की भूमिका संदिग्ध कही जा सकती है। वैसे भी उन्होंने दो दिन में दो तरह की बातें कहकर तीसरे दिन मामले की जानकारी देने के बजाए फोन रिसीव नहीं किया। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि पुलिस की स्पष्ट भूमिका को वे सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना में 13 करोड़ से अधिक का गोलमाल होने के बावजूद पुलिस के साथ प्रशासन की भूमिका पर लगातार सवाल उठाएं जा रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार वस्तुस्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। कई गंभीर और आरोपियों को छूट देने जैसे संगीन आरोप लगने के बावजूद कार्रवाई केवल औपचारिक बनकर रह गई है। शाहपुर जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष विशाल सिंह ठाकुर तो खुलकर आरोप लगा रहे हैं कि चाहे कुछ हो जाए पुलिस इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं करेंगे।

उनका नया आरोप है कि जहां अधिकारी आधारित राजनीति होती है, वहा ईमानदार अधिकारी के समर्थन में नहीं बोला जाता है। जहां पर भ्रष्ट अधिकारी की चरण वंदना के कारण उनके समर्थन में बोला जाता है, वहां यह सब स्थिति होगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है कि दावे के साथ कहते हैं कि मामले में कुछ नहीं होगा। जांच कमेटी को कैसे पता चला कि आपरेटर दोषी है और कार्यालय प्रमुख बेगुनाह है, जिसकी जवाबदारी है, वह ही यह सब कह रहा है। डीएससी चोरी हो गई और एक अधिकारी पूरे जिले को बेवकूफ बना रही है।

उन्होंने कमिश्रर द्वारा अब तक कार्रवाई नहीं करने पर सवाल उठाते कहा कि कितना समय लगेगा, जबकि एसआईटी की भूमिका पर सवाल उठाते कहा कि अगर कार्रवाई नहीं करते हैं तो जिले के जनप्रतिनिधियों से पूछना चाहिए। यदि कोई गरीब अपराध करता है तो कानून की बात की जाती है, लेकिन प्रभावशाली अपराध कर रहा है तो पूरा जिला उसे बचाने के लिए लगा है। इससे लगता है कि सब मिले हुए हैं।

एसआईटी प्रमुख के अलग अलग दावे

पुलिस द्वारा मामले में शाहपुर एसडीओपी मयंक तिवारी को एसआईटी प्रमुख बनाया है। उनके द्वारा कछुवा चाल से जांच की जा रही है, उस पर सवाल उठ रहे हैं। यह बात इसलिए कही जा रही है कि वे ही मीडिया को अलग-अलग जानकारी दे रहे हैं और बाद में मोबाइल उठाने से परहेज कर लेते हैं। इसकी बानगी 3 दिन पहले देखने मिली जब उन्होंने आरोपियों की संपत्ति के लिए अगले दिन यानी शुक्रवार संपर्ककरने लिए कहा था।

व्यस्तता के कारण इस दिन शाम तक जानकारी देने के दावे के बाद शनिवार के दिन फोन किया तो वे मीटिंग में होने की बात कहकर काल बैक करते रहे और रविवार 3 बजे तक उनसे आरोपियों की संपत्ति कुर्क करने की जानकारी के लिए कई बार फोन किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया। उन्हें मोबाइल के वाटसएप और मैंजर पर भी मैसेज किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। इस बात से अंदाजा लगाया सकता है कि एसआईटी प्रमुख जानकारी देने से कतरा रहे हैं।

इनका कहना….

प्रकरण में राजपत्रित अधिकारी जांच कर रहे हैं। जांच के दौरान कई तथ्य गोपनीय रखा जाना प्रशासनिक दृष्टि से आवश्यक है। जांच के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

निश्चल एन झारिया, एसपी बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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