Betul Ki Khabar : खौफ के साए में नौनिहाल, जिले में 624 स्कूल की हालात खस्ताहाल
Betul Ki Khabar: Children live in the shadow of fear, 624 schools in the district are in a bad condition

आज से स्कूलों की हुई शुरूआत, पहले दिन उपस्थिति कम
Betul Ki Khabar : बैतूल। गर्मी की छुट्टियों के बाद सोमवार से स्कूलों की शुरूआत हो गई। स्कूल तो खुल गए, लेकिन विद्यार्थी खौफ के साये में पढ़ाई करने के लिए मजबूर है। जिले के सैकड़ों सरकारी स्कूलों की हालात खस्ताहाल है, जिनकी मरम्मत कार्य अभी तक पूरा नहीं हो सका। स्कूलों में हमेशा हादसा होने का खतरा बना रहता है। बजट के आभाव में स्कूल की मरम्मत न होने की जानकारी सामने आई है।
1 अप्रैल से नए शिक्षा सत्र की शुरूआत होने के बाद एक महीने तक स्कूल संचालित हुए। इसके बाद गर्मी की छुट्टियां लग गई। अब दोबारा स्कूलों की शुरूआत हो चुकी है। पहले दिन स्कूल पहुंच विद्यार्थियों का शिक्षकों ने तिलक लगाकर स्वागत किया। विद्यार्थियों को प्रतिदिन स्कूल आने के लिए प्रेरित किया है। स्कूल की शुरूआत होते ही अध्ययन कार्य भी प्रारंभ हो गया। पहले दिन स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बहुत कम रही। शिक्षकों का कहना है कि अभी तो स्कूलों में शुरूआत हुई। धीरे-धीरे स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति बढ़ते जाएगी। शिक्षकों ने विद्यार्थियों के पालकों से कहा है कि वे प्रतिदिन विद्यार्थियों को प्रतिशत दिन स्कूल भेज ताकि अध्ययन कार्य प्रभावित ना हो।
624 स्कूलों की हालात खस्ता हाल
जानकारी के मुताबिक बैतूल जिले में करीब 2700 प्राथमिक एवं माध्यमिक स्कूल संचालित हो रहे है। इसमें से 624 ऐसे स्कूल है, जिनकी हालात खस्ताहाल है। ऐसे स्कूलों की मरम्मत होनी है। स्कूलों खुल गए, लेकिन स्कूल भवनों की मरम्मत नहीं हो सकी। किसी का छत का प्लास्टर गिरने लगा है तो, कई स्कूलों की छत जर्जर हो चुकी है। बारिश में छत से पानी टपकने लगता है तो कुछ स्कूलों की दीवारे खराब हो गई है। खस्ताहाल स्कूलों में हमेशा ही हादसे होने का डर बना रहता है। गर्मी के दिनों में स्कूलों की मरम्मत काम पूरा हो जाना था, लेकिन अभी तक मरमम्त नहीं हो सकी। ऐसा लग रहा है कि यह सत्र भी जर्जर स्कूलों में पूरा हो जाएगा। जिले में कई बार हादसे भी हो चुके है, लेकिन इसके बावजूद भी अधिकारियों द्वारा कोई एक्शन नहीं लिया जा रहा।
फनीर्चर और शौचालयों की भी हालात खराब
जिले के कई स्कूलों में फर्नीचर भी टूट गए है। फर्नीचर को नहीं सुधारा गया। विद्यार्थी टूटे-फूटे फर्नीचरों का उपयोग करने के लिए मजबूर है। 16 जून तक स्कूलों में शौचालायों का मरम्मत कार्य पूरा हो जाना था, लेकिन कई स्कूलों के शौचालयों की मरम्मत का काम पूरा नहीं हो सका। सरकार द्वारा जारी की गई तिथी निकल गई, लेकिन शौचालय सहीं नहीं हो सके। शौचालयों की स्थिति ठीक नहीं होने के कारण विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ स्कूलों में तो पीने के पानी के भी पर्याप्त इंतजाम नहीं है, जिले में दिन प्रतिदिन सरकारी स्कूलों की हालात खराब होते जा रही है।
इनका कहना
सरकार की तरफ से स्कूलों की मरम्मत के लिए कोई बजट नहीं आया है। बजट आने पर स्कूलों की मरम्मत पूरी की जाएगी।
जितेन्द्र भंनारिया, डीपीसी जिला केन्द्र, बैतूल



