Betul Ki Khabar: महंगी हुई शराब तो महुएं की बढ़ने लगी डिमांड
Betul Ki Khabar: When the liquor became expensive, the demand for honey started increasing

कम कीमत में पूरा मजा, कच्ची शराब का बढ़ा ट्रेंड
Betul Ki Khabar: बैतूल। जिला मुख्यालय के आसपास शराब दुकानों पर सिंडिकेट के हावी होने के बाद शराब की कीमत आसमान छू रही है। शराब के शौकीनों का एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जिनकी पहुंच से अब महंगी शराब काफी दूर हो चुकी है। ऐसे में अब महुये से बनी कच्ची शराब की डिमांड धीरे धीरे रफ्तार पकड़ना शुरू कर दिया है। अधिकांश सुरा प्रेमी यह कहते सुने जा रहे हैं कि, अंग्रेजी शराब से तौबा कर अब महुआ शराब से ही काम चलाना मजबूरी बन चुका है। क्योंकि जितना पैसा अंग्रेजी शराब की एक बोतल में खर्च करना पड़ रहा उतने ही पैसो में 2 सप्ताह तक शौक पूरे हो जाएंगे। ऐसे में महंगा ठेका लेने वाले ठेकेदारों के गुर्गे कच्ची शराब बिक्री को लेकर मैदान में उतरकर कच्ची शराब बिक्री को रोकने का प्रयास करेंगे तो वहीं आपसी विवादों के चलते अपराधों को भी बढ़ावा मिलना तय माना जा रहा है।
डबल हुए रेट , सुरा प्रेमियों में दिख रही निराशा
शराब के नए ठेके होने के बाद अंग्रेजी शराब की कीमतों में आई तेजी के बाद उन सुरा प्रेमियों में भारी निराशा देखी जा रही है, जो रोजाना जाम छलकाने का शौक पाले हुए हैं। शराब की बढ़ी हुई कीमतें अब अधिकांश सुरा प्रेमियों के बूते की बात नहीं रही।कुछ सुरा प्रेमियों ने बताया कि, ठेके होने के पूर्व आरएस की बोतल दुकान से ही 600 रुपए में मिल जाती थी। लेकिन अब इसी बोतल की कीमत 1100 रुपए कर दी गयी है। 900 रुपए कीमत की ब्लेंडर की बोतल के रेट 1500 रुपए कर दिए गए हैं।
इसी तरह आरसी, ओसी, बीपी सहित सभी ब्रांडों की कीमतें पहले से डबल हो चुकी हैं। देशी दारू का एक पव्वा 60 रुपए का मिल जाता था अब इसकी कीमत 100 रुपए कर दी गयी है। ऐसे में अब शौक पूरा करने के लिए महुये से बनी कच्ची शराब का सेवन ही एक मात्र विकल्प बचा हुआ है। महुआ शराब की एक बोतल मात्र 120 रुपए में मिल जाती है। इतनी कम कीमत में शौकीन दो दिनों तक अपना शौक पूरा कर सकते हैं। जब शौक ही पूरा करना है तो सस्ता माल हमारे लिए ज्यादा फायदेमंद साबित होगा।
दबिश के दौरान ग्रामीण इलाकों में होंगे जमकर पंगे
इधर करोड़ो रुपए खर्च कर महंगे ठेके लेने वाले ठेकेदारों की भी पूरी कोशिश होगी कि वे अपने इलाके में महुये से बनी शराब की बिक्री पर प्रभावी रोक लगा सकें । क्योंकि उन्हें भी अपने व्यवसाय में मुनाफे की दरकार है। ऐसे में ठेकेदार को निगरानी के लिए दबिश टीम भी तैयार करनी पड़ेगी। और जब दबिश टीम ग्रामीण इलाकों में दबिश पर निकलेगी तो पंगे होना भी स्वाभाविक है । ऐसे में अपराधों को बढ़ावा तो मिलेगा ही, आये दिन आपसी विवाद भी देखने को मिलेंगे। जो भी है लेकिन महंगे ठेकों ने सुरा प्रेमियों कि मुश्किले जरूर बढ़ा दी हैं।




